जब मैं अपने ब्लॉग लिखता हूँ तो रमोना तुरंत ही उनका जर्मन में अनुवाद कर देती है। उसके बाद भोपाल निवासी अजित जी मेरे शब्दों को पढ़कर उनका हिन्दी में अनुवाद करते हैं। वे अपना काम बहुत अच्छी तरह से करते हैं और समय के साथ हम अच्छे मित्र भी बन गए। जब वे मुझे अपना अनुवाद भेजते हैं तो मैं उन्हें ऑनलाइन अपलोड कर देता हूँ। पिछले किसी दिन के अनुवाद में मेरी नज़र 'grateful' शब्द के अनुवाद पर पड़ी। थोड़ा आगे-पीछे पढ़ने के बाद मैं काफी समय सोचता रहा कि इस शब्द का ठीक-ठीक अर्थ क्या होना चाहिए!
वाक्य इस प्रकार था: "I realized how grateful I was….." । 'grateful' शब्द का हिन्दी में अनुवाद करने पर उसमें भाग्य और नियति का अर्थ भी सम्मिलित हो जाता है। मैं सोच में पड़ गया कि 'grateful' और 'lucky' शब्द क्या वास्तव में प्रकारांतर से धर्म और ईश्वर से संबन्धित हैं।
मैं कहना चाहता हूँ कि मैं भाग्यशाली हूँ लेकिन इसे कहने के लहजे के अनुसार धार्मिक लोग इसका मतलब यह निकाल सकते हैं जैसे मैं इस भाग्य के लिए किसी ईश्वर का या प्रकृति (ब्रह्मांड) का या उसे बनाने वाली किसी उच्च शक्ति का धन्यवाद कर रहा हूँ। हिन्दी में मैं 'luck' शब्द का इस तरह अनुवाद कर सकता हूँ और आसानी के साथ उसे धार्मिक विषयवस्तु के रूप में प्रस्तुत कर सकता हूँ। फिर हमेशा यह माना जाएगा कि मैं सिर्फ भाग्यशाली नहीं हूँ बल्कि यह भाग्य, जो मुझे प्राप्त हुआ है वह मुझे किसी के द्वारा प्रदत्त है बल्कि यह भाग्य मुझे किसी की कृपा के फलस्वरूप प्राप्त हुआ है।
जर्मन भाषा में भाग्य के दो अर्थ हो सकते हैं: भाग्य और प्रसन्नता। यह मुझे अच्छा लगता है- आप भाग्यशाली हैं इसलिए आप प्रसन्न भी हैं! वाक्य की बनावट के आधार पर आप आसानी के साथ समझ सकते हैं कि सामने वाला क्या कहना चाहता है लेकिन सिर्फ अकेला शब्द दोनों अर्थ रखता है।
जब मैं कहता हूँ कि मैं भाग्यशाली हूँ तो उसके पीछे भावना यह होती है कि अगर मैं एक सिक्का उछालूँ तो गिरने पर उसकी कोई भी सतह ऊपर हो सकती है। आप भाग्यशाली तभी होते हैं जब आप किसी एक सतह पर दाँव लगाते हैं और वह ऊपर रहती है-लेकिन इस पर किसी खास शक्ति का हाथ नहीं होता। 'किसी ने' हेड या टेल को ऊपर नहीं रखा है, यह यूँ ही, बिना किसी कारण के हुआ है। किसी पूर्व निश्चित होनी के तहत यह नहीं हुआ है, किसी नियति ने इसका होना सुनिश्चित नहीं किया है। यह महज 50-50 का संयोग है। इससे ज़्यादा कुछ नहीं।
मेरे लिए यह महज एक तथ्य है: जब मैं 'grateful' कृतज्ञ हूँ या शुक्रिया अदा करता हूँ तो मेरे मन में यह विचार कभी नहीं आता कि मैं ईश्वर का एहसानमंद हूँ। किसी प्रकृति (ब्रह्मांड) या किसी और चीज़ का भी नहीं। अगर कोई व्यक्ति मेरे किसी काम में रुचि रखता है या मदद करता है तो मैं उसका कृतज्ञ या एहसानमंद हो सकता हूँ। मगर धर्म द्वारा आविष्कृत किसी काल्पनिक अस्तित्वहीन व्यक्ति या चीज़ या आकृति का नहीं।
आप सोच में पड़कर पूछ सकते हैं: "आप किसके प्रति एहसानमंद होते हैं?" लेकिन इसका उत्तर सिर्फ इतना है कि मेरे अंदर कृतज्ञता का यह भाव बिना किसी विशेष संबंध के पैदा होता है।
मैं असंख्य बातों के लिए कृतज्ञ हूँ! एक समय ऐसा भी था कि मैं विशेष रूप से नाम लेकर ईश्वर का धन्यवाद करता था। एक समय ऐसा भी आया जब मैं प्रकृति (ब्रह्मांड) को शुक्रिया अदा करता था। आज मैं सिर्फ कृतज्ञ होता हूँ। बस, सिर्फ कृतज्ञ।
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