स्वतंत्र और भ्रष्टाचार-मुक्त मीडिया का स्वप्न – ‘इंडिया संवाद’ – 23 मार्च 2015

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

आजकल मेरे जीवन में कुछ नया और अनोखा घटित हो रहा है और उसमें मैं व्यक्तिगत रूप से संलग्न हो चुका हूँ: मैंने कुछ लोगों के एक समूह से जुड़ने का, उसका हिस्सा बनने का फैसला किया है, जो एक नया, भ्रष्टाचार-मुक्त समाचार चैनल शुरू करने की परिकल्पना के साथ काम करने में जुटा हुआ है। यह समाचार चैनल सामान्य लोगों के लिए, सामान्य लोगों द्वारा संचालित किया जाएगा।

मीडिया को प्रजातंत्र का चौथा खम्भा कहा जाता है। मीडिया समाज में, लोगों के जीवनों में, वास्तव में जीवन के हर पहलू में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है! मीडिया लोगों का अभिमत तैयार करता है, उनकी समझ विकसित करता है, उनके दिमागों को प्रभावित करता है और फिर उसी आधार पर वे अपने निर्णय लेते हैं। किसी विषय में ये निर्णय सकारात्मक भी हो सकते हैं और नकारात्मक भी! और स्वाभाविक ही जब वे लोग, वे कंपनियाँ या वे संगठन जो मीडिया केंद्र चलाते हैं, स्वार्थी हो जाएँ और अपने प्रभावों का इस्तेमाल समाज की भलाई के लिए नहीं बल्कि अपने निजी लाभ के लिए करते हैं तो परिणाम बहुत बुरे होते हैं!

यह मैंने अमरीका में होता हुआ सुना है और हम सब यहाँ भारत में साफ-साफ होता हुआ देख ही रहे हैं: सिर्फ गिने-चुने कुछ लोग हैं जो मीडिया को नियंत्रित करते हैं और अपने स्वार्थ के लिए उसका बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका मकसद लोगों को समाचार देना या उनकी जानकारी में वृद्धि करना नहीं होता बल्कि वे पहले अपना लाभ देखते हैं और फिर उसके अनुसार ही निर्णय लेते हैं कि किसी खास समाचार या जानकारी को जनता तक पहुँचाना है या नहीं।

भारत के पिछले आम चुनाओं में यह बिल्कुल स्पष्ट दिखाई दिया था: देश के सबसे बड़े कार्पोरेट घराने भाजपा के समर्थन में उतर आए थे। वास्तव में इन कार्पोरेट घरानों ने भाजपा के लिए खूब पैसा खर्च उँड़ेला था जिसे वे प्रेस और मीडिया घरानों के ज़रिए बार-बार अपने विज्ञापन प्रसारित करवाने में और भाजपा और मोदी की खबरें प्रसारित करवाने में करते थे। इन कार्पोरेट घरानों ने पैसे के बल पर अर्जित अपने दूसरे प्रभावों का इस्तेमाल भी मीडिया को भाजपा के पक्ष में मोड़ने के उद्देश्य से किया था। और अंततः देश में टीवी विज्ञापनों वाली सरकार बन गई।

चुनावों के बाद मीडिया के इस व्यवहार की कड़ी आलोचना भी हुई-विशेष रूप से सोशल मीडिया में, जहाँ हर कोई अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र और सक्षम होता है। दरअसल ऐसा लग रहा था जैसे देश में कोई नैतिकता बची नहीं रह गई है, सब कुछ सिर्फ पैसे का खेल है। और स्पष्ट हो चुका है कि क्या चल रहा है:’नेटवर्क 18’ खरीदकर मुकेश अंबानी देश के सबसे बड़े मीडिया नेटवर्कों में से एक का मालिक बन चुका है और अब वह एक और चैनल खरीदने जा रहा है, सन टीवी! अब वह कुछ समाचारों को प्रसारित करने हेतु पैसा देगा और कुछ के लिए नहीं। सरकार के पास कार्पोरेट घरानों को लाभ पहुँचाने के कई तरीके होते हैं और मोदी के समर्थन में जो पैसा अंबानी ने निवेश किया था, उसे अब वह कई तरीकों से सरकार से वसूल करेगा।

ऐसा लगता है जैसे पैसा ही दुनिया को चला रहा है। जो पैसा खर्च कर सकते हैं वे मीडिया का इस्तेमाल अपने लाभ के लिए कर सकते हैं और जनता क्या देखे तथा क्या न देखे, इस बात का निर्णय कर सकते हैं। गरीबों के लिए यहाँ कुछ भी नहीं है। उनकी तकलीफ़ें, उनकी समस्याएँ, उनकी आहें, उनकी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं है।

बड़े-बड़े प्रसिद्ध मीडिया घरानों में उच्च पदों पर आसीन कई पत्रकार देख रहे थे कि क्या चल रहा है। पैसा ही हर बात का फैसला कर रहा था: जो समाचार उनके सामने रखा हुआ है, उसका प्रसारण किया जाना है या नहीं, इसका फैसला भी। यह उनकी पत्रकारीय नैतिकता को ठेस पहुंचाने वाली बात थी, पत्रकार के रूप में यह उनके लिए बेहद अपमानजनक था। उनकी निगाह में यह अनैतिक था, यह सब करने वे पत्रिकारिता के क्षेत्र में नहीं आए थे। वे उद्विग्न थे और उनमें से कुछ ने अच्छे-खासे वेतन वाली अपनी नौकरियाँ छोड़ दीं और एक नया ध्येय, एक नया और अलग स्वप्न लिए वहाँ से बाहर निकल आए:

वे अब एक ऐसा मीडिया चैनल शुरू करने का विचार कर रहे हैं जो इन सब समस्याओं से मुक्त हो। क्या हम कोई ऐसा मीडिया केंद्र विकसित कर सकते हैं जो किसी विशेष राजनैतिक पार्टी या कार्पोरेट घराने की मिल्कियत न हो और न ही उनसे प्रभावित हो बल्कि जनता उसकी मालिक और कर्ता-धर्ता हो? वास्तविक पत्रिकारिता के लिए समर्पित, तटस्थ और जिसे खरीदा न जा सके, ऐसा ईमानदार, पत्रकारिता के उच्च आदर्शों के लिए समर्पित, तटस्थ मीडिया केंद्र?

इस विचार के बारे में मुझे ऑनलाइन पता चला और जब मैंने इस योजना का समर्थन करने की इच्छा व्यक्त की तो उन्होंने मुझसे संपर्क किया। मुझे लगता है कि यह आवश्यक है-विशेष रूप से मीडिया के साथ मेरे कई निराशाजनक अनुभवों के बाद। वह एक और कहानी है जिस पर मैं बाद में कभी चर्चा करूँगा। बहरहाल, मैं उनके प्रयासों में शामिल हुआ और हम आपस में कई बार मिले भी।

तो चैनल की स्थापना और उसे सुचारू रूप से चलाने के लिए अब एक सार्वजनिक ट्रस्ट कायम हो चुका है। हमारा मुख्य आदर्श यह है कि वह भ्रष्टाचार विरोधी और भ्रष्टाचार से मुक्त चैनल हो। हमारी दूसरी मीटिंग में मैंने कहा कि सामान्य जनता, जिनका यह चैनल होगा, न सिर्फ समाचारों के उपभोक्ता हों बल्कि स्वयं संवाददाता भी हों! वे सब लोग, जो सामान्य परिस्थितियों में अपना जीवन गुज़ार रहे हों और जिनके पास भले ही पत्रकारिता में कोई डिप्लोमा न हो। अपने आसपास व्याप्त भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने का उनमें हौसला होना चाहिए।

इस ट्रस्ट और इस मिशन का नाम होगा, ‘इंडिया संवाद’ और आज, भगत सिंह के शहीदी दिवस, 23 मार्च, 2015 के दिन हमने ‘www.indiasamvad.co.in’ नाम से अपनी वेबसाइट लांच कर दी है। अभी इसकी यह पहली झलक भर है और समय के साथ इसे और विकसित किया जाएगा तथा हिन्दी में भी शुरू किया जाएगा। शुरू से ही सामान्य लोगों के लिए इसमें यह सुविधा उपलब्ध की गई है कि वे अपने समाचार साइट पर साझा कर सकें और हम ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को इससे जोड़ने के लिए कटिबद्ध हैं-इस वेबसाइट पर, फेसबुक पेज पर और फेसबुक ग्रुप बनाकर। स्वाभाविक ही हम लगातार तब तक इस प्रयास में लगे रहेंगे जब तक कि एक नए समाचार चैनल की स्थापना नहीं कर लेते- जनता द्वारा, जनता के लिए!

और क्योंकि समाचारों को प्रसारित करना या न करना पैसे पर निर्भर नहीं होगा इसलिए हमारे पास इतनी क्षमता और इतना हौसला होगा कि हर तरह के सच्चे, ईमानदार और जनता से जुड़े हुए समाचार हम प्रसारित कर सकें और दिखा सकें कि वास्तव में देश में क्या चल रहा है और देश में जो कुछ भी हो रहा है उसकी वास्तविकता उजागर कर सकें!

मैं इस विचार को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाना चाहता हूँ और उनका समर्थन और सहयोग प्राप्त करना चाहता हूँ। कृपया इस ग्रुप से जुड़िये, उनकी साइट पर जाकर पढ़िए, अपने समाचार साझा कीजिए और जो भी मदद आप करना चाहें, कर सकें, करें। मेरा विश्वास है कि यह देश के लिए बहुत अच्छा होगा कि जनता को असली समाचार, व्यापक बहुमत के समाचार जानने का मौका मिले, न कि मुट्ठी भर सत्ताधारी, धनाढ्य और संपन्न लोगों के समाचार।