पिछले कुछ दिनों से मैं भारत के बारे में गैर-भारतीयों की, हमारे बच्चों के घरों के निरीक्षण के बाद हमारे मेहमानों की और भारत की गरीबी पर सामान्य रूप से विदेशी पर्यटकों की प्रतिक्रियाओं के बारे में लिखता रहा हूँ। कभी-कभी वे विदेशी मेहमान पूछते हैं कि क्या उन्हें बच्चों को भी लेकर आना चाहिए और मैं इस बारे में कहना चाहता हूँ कि मेरे विचार में उन्हें अधिक से अधिक ऐसा करना चाहिए!
मैं सचमुच यह समझता हूँ कि आपके बच्चों के लिए छुट्टियाँ मनाने का यह सबसे बढ़िया तरीका है क्योंकि यह उनके लिए बड़ा लाभप्रद सिद्ध होगा। यदि आप स्वयं पश्चिमी देशों में पले-बढ़े हैं तो शायद आपने महसूस किया होगा कि आपके लिए भारतीय जीवन की कल्पना कितनी मुश्किल रही थी, विशेष रूप से यहाँ के बच्चों की हालत के बारे में, जो अमीरी-गरीबी की विषमताओं के ठीक बीचों-बीच जीवन निर्वाह कर रहे होते हैं।
अगर आप जन्म से पहली दुनिया के निवासी हैं और सिर्फ दो सप्ताह के लिए उस दुनिया को छोड़कर गर्मी की छुट्टियाँ मनाने बाहर निकले हैं और वह भी किसी क्लब-रिसोर्ट में सारा वक़्त गुजारने के लिए, तो आप बच्चों को छुट्टियाँ मनाने किसी कम विकसित देश में ले जाने में कतराएँगे। आपने दुनिया के बहुत से दूसरे हिस्सों की खराब हालत के बारे में सुन रखा होता है, आप बहुत से खौफनाक चित्र और वीडियोज़ देख चुके होते हैं। लेकिन इन देशों में जाकर, वहाँ के जीवन का अनुभव प्राप्त करना बिलकुल अलग बात होती है!
मैं कहता हूँ कि वहाँ की यात्रा करके, वहाँ के जीवन को करीब से देखना, खुद अनुभव करना और उसे अपने बच्चों को भी दिखाना बड़ी अच्छी बात होगी। आप खुद अनुभव कर रहे होंगे कि आप कितने सौभाग्यशाली हैं-क्या आप अपने बच्चों के लिए भी वही सब नहीं चाहेंगे?
उन्हें दिखाइए कि बहुत से दूसरे लोग कैसा जीवन जीते हैं, शुरू से उन्हें समझाइए, उन्हें जिज्ञासु बनाइए! इस बात से भयभीत न हों कि यह उनके लिए बहुत ज़्यादा हो जाएगा- बच्चों में समझने की अद्भुत क्षमता होती है और वे अपने आसपास की चीजों के साथ आसानी के साथ तालमेल बिठा लेते हैं। अकसर हम बच्चों की समझने की शक्ति को वास्तविकता से कम आँकते हैं, स्वाभाविक ही इस तरह छुट्टियाँ गुज़ारना समुद्री बीचों की छुट्टियों की तरह आरामदेह नहीं होगा मगर वह उनके जीवन के लिए उससे बहुत ज़्यादा कीमती सिद्ध होगा! वे उन चीजों को देखेंगे, उन बातों का स्वतः अनुभव करेंगे अन्यथा जिन्हें वे सिर्फ टीवी पर देख पाते या अपने स्कूलों की किताबों में पढ़ते। उनके बारे में सुनी-सुनाई बातों के स्थान पर वे दोनों के बीच का अंतर महसूस कर पाएँगे। दूर किसी अनदेखी, अनजानी जगह पर होने वाली बातें मानकर उन्हें खारिज करने की जगह वे उन पर ध्यान देंगे, उनकी परवाह करेंगे और उन पर सोच-विचार करेंगे। वे बातें उनके नजदीक घटित हो रही होंगी, वह उनके लिए यथार्थ होगा!
आश्रम के बच्चों के साथ आज तक के अपने अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूँ कि यह सदा लाभप्रद होता है, यह अनुभव बच्चों को किसी तरह की हानि नहीं पहुँचाता!
और फिर निश्चित रूप से आप इस अनुभव को कुछ आरामदेह छुट्टियों के साथ जोड़ सकते हैं-आप एकाध हफ्ते के लिए किसी बीच पर भी जा सकते हैं-लेकिन कृपा करके उन्हें इन बातों को देखने और जानने-समझने का मौका भी अवश्य प्रदान करें!
Related posts
अपने बच्चों के सामने दूसरे बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करें – 18 अगस्त 2015
कैसे सतत मार्गदर्शन बच्चों के विकास में बाधा पहुँचाता है – 11 अगस्त 2015
बच्चों के पालन-पोषण का आनंद: समस्याएं, समाधान और पुनः नयी समस्याएं – 22 अप्रैल 2015
अपने बच्चों को टीवी से दूर रखें – यह उनके लिए नुकसानदेह है! 21 अप्रैल 2015
अपने बच्चों को व्यस्त और टीवी से दूर रखें लेकिन इसलिए नहीं कि वे आप पर बोझ हैं! 20 अप्रैल 2015
अपने बच्चों के साथ सेक्स के बारे में बात करना क्यों ज़रूरी है – 2 अप्रैल 2015
ईश्वर के बगैर बच्चों का लालन-पालन करना – 24 फ़रवरी 2015
पूरब और पश्चिम में स्तनपान कराना और स्तनपान छुड़ाना – एक तुलनात्मक चर्चा – 27 अगस्त 2014
अपने बच्चों को गंभीरता से लें – उनके साथ बात करें! 15 जुलाई 2014
