भारत में हिंसा: अपने कुत्ते से अपने बच्चों की तरह प्रेम करना और उसी तरह पीटना! 12 मार्च 2014

पालन पोषण

हर शुक्रवार लिखे जाने वाले मेरे ब्लॉग के लिए हम नियमपूर्वक अपने स्कूल के बच्चों के घरों का दौरा करते हैं, जहां उनके परिवार के बारे में जानकारियाँ इकट्ठी की जाती हैं और उनके वीडियो बनाए जाते हैं। हाल ही में हमारी एक मित्र आश्रम आई हुई थी और स्वयं हमारे साथ चलकर देखना चाहती थी कि ये बच्चे अपने घरों में किस तरह रहते हैं। ऐसे दौरों पर हमें पता नहीं होता कि वहाँ जाकर हमें क्या अनुभव हो सकता है और यह बात हमने अपने मित्र को भी बताई। हमें ऐसे परिवार भी मिल सकते थे, जहां आर्थिक विपन्नता के बावजूद घर को साफ-सुथरा रखा जाता है और परिवार में सुख-शांति का एहसास होता है। या हम ऐसे टूटे-बिखरे परिवार का सामना भी कर सकते हैं, जहां पिता शराबी है, परिवार के सदस्य आपस में लड़-झगड़ रहे हैं, आदि आदि। इस बार जब हम अपने मित्र के साथ निकले तो हमें वह दृश्य देखने को मिला, जिसकी हमें भी अपेक्षा नहीं थी-अपने पालतू कुत्ते के साथ हिंसक व्यवहार।

भारत में भी कुछ लोग हैं, जो घर में पालतू कुत्ते रखते हैं और वे उनसे बहुत प्यार करते हैं। वे उनके साथ अपने बच्चों जैसा प्रेम करते हैं, वैसा ही जैसा प्रेम पश्चिम में लोग अपने पालतू कुत्तों के साथ करते हैं। और वे अपने कुत्तों को मारते हैं, उसी तरह जैसे वे अपने बच्चों को मारते हैं।

रमोना, पूर्णेन्दु और हमारी मित्र को हमारे स्कूल की एक बच्ची अपने घर ले जाती है और एक कुत्ता भागता हुआ आता है और उन पर बेतहाशा भौंकने लगता है। माँ उस पर ‘नहीं!’ कहते हुए चीख पड़ती है और वह आठ साल की बच्ची, जिसके साथ हम उनके यहाँ आए थे, एक छड़ी फटकारते हुए उस कुत्ते की तरफ लपकती है। बेचारा कुत्ता अपने पिछले पैरों के बीच दुम दबाए पीछे हटकर एक तरफ बैठ जाता है। अब माँ बच्ची से छड़ी ले लेती है और बातचीत के दौरान जब भी कुत्ता भौंकने को होता, एक छड़ी कुत्ते की पीठ पर जमाती जाती है, जिससे कुत्ता और पीछे, एक कोने में चला जाता है और आखिर वहाँ चुपचाप मुर्दे की तरह पसर जाता है।

चौंक गए ना? मुझे लगता है मेरी मित्र भी स्तब्ध रह गई होगी। लेकिन तब तक ही जब तक उसे यह नहीं बताया गया होगा कि जिस कुत्ते को वे लोग इस तरह मार-पीट रहे हैं वह उनका पाला हुआ कुत्ता है! जब हमने उसे यह बताया तो वह हैरान-परेशान हो गई! जब उनके पास एक जानवर है और वे उसे खाना खिलाते हैं, खुद उनके पास ज़्यादा कुछ नहीं है मगर उस कुत्ते को पाल-पोस रहे हैं तो इसका तो यही मतलब है कि वे उससे बहुत प्यार करते हैं! और जब वे उससे प्यार करते हैं तो फिर उसे मारते क्यों हैं, वह भी छड़ी से?

इसे समझना बहुत आसान है: वे अपने बच्चों की तरह कुत्तों से भी प्यार करते हैं। बिल्कुल उसी तरह जैसा पश्चिमी देशों में भी देखा जाता है।

जी हाँ! आप अपने कुत्ते या बिल्ली को अपने बच्चों की तरह गले से लगा लेते हैं, पुचकारते है, उससे बातें करते हैं, उसके साथ खेलते हैं, अच्छे से अच्छा खाना खिलाते हैं। वे भी यही करते हैं: खाना खिलाते हैं, खेलते हैं, पुचकारते हैं, बातें करते हैं-और मारते-पीटते भी हैं, उसी तरह जैसे वे अपने बच्चों को मारते-पीटते हैं।

कुछ समय पहले रमोना और मैं अपने कुछ मित्रों के यहाँ गए थे। उनके घरों में कुत्ते पाले हुए थे। भारत में कुत्ते पालना बहुत आम नहीं है और इसलिए यह हमारे लिए कुतूहल का विषय होता रहा है कि वे अपने पालतू कुत्तों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। और वहाँ हमारी बात की पुष्टि होती रही है: वे अपने बच्चों की तरह अपने कुत्तों से बातें करते हैं और उन बातों में मारने-पीटने की धमकियाँ भी होती हैं: "शांत बैठो नहीं तो मारेंगे", "उधर जाकर बैठो नहीं तो डंडे से पिटाई होगी"

तो इस तरह आप देखते हैं कि बच्चे हों या पालतू कुत्ते, हिंसा को भारत में गलत बात नहीं माना जाता। जैसे अपने बच्चों के साथ बलप्रयोग अनुचित है उसी तरह अपने कुत्ते या बिल्ली या किसी भी दूसरे जानवर को मारना अनुचित है। जरा सोचिए, उन निरुपाय जीवों के साथ, जो आपके विरुद्ध कुछ नहीं कर सकते, आप कितना क्रूर व्यवहार करते हैं।

अमन और शांति की तरफ कदम बढ़ाइए और यह काम अपने घर से शुरू कीजिये!

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