बच्चों पर आपके शब्दों का असर – 22 अप्रैल 2014

कल मैंने एक पाँच सितारा होटल में हुई घटना का ब्यौरा दिया था, जिसमें वहां की एक कर्मचारी ने अपरा का टेडी बीयर छीनने का नाटक मज़ाक किया था। कल मैंने सिर्फ इतना बताया था कि इस घटना पर मैं बहुत आश्चर्यचकित और स्तब्ध रह गया था जब कि आज मैं आपको इस घटना पर अपरा और हमारी प्रतिक्रियाओं के बारे में बताना चाहता हूँ। आज भी जब बच्चों को चिढ़ाने की भारतीयों की आदत का ज़िक्र होता है तब हम इस घटना का उदहारण देते हैं।

वास्तव में, पूरी घटना बहुत तेज़ी के साथ घटित हुई और जब तक हम यह समझ पाते कि वह महिला क्या कर रही है, सब कुछ हो चुका था। अपरा स्तब्ध रह गई थी, हम अवाक् थे और सबसे पहले हमने यह किया कि एक खाली टेबल पर पहुंचकर शांति के साथ बैठ गए। अब भी वह मेरी गोद में ही थी और इस झटके से उबरने के बाद जब वह अपनी रुलाई रोक पाई तब सबसे पहले उसने अपनी माँ की तरफ देखा, फिर मेरी तरफ और कहा: वह औरत मेरा टेडी बीयर ले रही थी!

उसकी आवाज़ में हम उसकी भावनाएं सुन रहे थे: आघात, चिंता, गुस्सा और कंपकंपाहट, जो यह बता रही थी कि वह समझ नहीं पा रही है कि इससे कैसे उबरा जाए। स्वाभाविक ही, हमारी सबसे पहली प्रतिक्रिया यह थी कि हमने उसे बताया कि हम उसके साथ हैं, कि हमारे होते हुए कोई भी उसके खिलौने नहीं छीन सकता।

मैं खुद इस अनपेक्षित आघात से अब तक उबर नहीं पाया था और मैंने वह बात कही, जो मैं वैसे कभी नहीं कह सकता था। मैंने अपनी बेटी से कहा: 'आगे से कोई आदमी या औरत तुम्हारा टेडी बीयर छीनने की कोशिश करे तो उसे एक चांटा जड़ देना!'

सामान्यतः, हमारे घर और स्कूल का पहला और सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि कोई किसी पर हाथ नहीं उठाएगा! स्वाभाविक ही, अपरा भी इस नियम को अच्छी तरह जानती है इसलिए उसने मेरी तरफ आश्चर्य से देखा। क्या वाकई? और जबकि मैं अभी समझ ही रहा था कि मैं बेटी की चिंता के भावावेश में क्या कह गया, अपरा ने घटना का विश्लेषण करना शुरू कर दिया था। मैं समझ रहा था कि इस परिस्थिति में भी हिंसक होना समस्या के समाधान का अच्छा तरीका नहीं कहा जा सकता लेकिन दूसरी तरफ मैं नहीं चाहता कि किसी भी स्थिति में मेरी बेटी खुद को असहाय महसूस करे और क्रोध न करने के इस नियम के भार तले इतना दब जाए कि किसी तरह का कोई प्रतिरोध व्यक्त न करे।

इस छोटे से वाक्य की सहायता से मैं आपको दिखाना चाहता हूँ कि आपके शब्दों और व्यवहार का आपके बच्चे पर कितना गहरा असर होता है। हमने अपना नाश्ता समाप्त किया और दूर, एक आदमी की तरफ इशारा करते हुए अपरा ने पूछा, 'अगर वह आदमी मेरा टेडी बीयर लेने की कोशिश करेगा तो मैं उसे झापड़ मार सकती हूँ, ठीक है? मेरे चेहरे पर मुस्कान खेल गई और मैंने कहा, 'हाँ, ठीक है मगर वह तो अच्छा आदमी लग रहा है, वह ऐसा नहीं करेगा।' उसने सिर हिलाकर सहमति जताई लेकिन मामला अभी ठंडा नहीं पड़ा था, उसके मन में अब भी उथल-पुथल मची हुई थी।

दस मिनट बाद, होटल के कमरे में पहुंचकर उसने पूछा, 'अगर कोई मेरे बिस्किट लेने लगे तब भी मैं उसे मार सकती हूँ ना?' मैंने गंभीरता के साथ कहा, 'नहीं, तब तुम उसे एक बिस्किट दे देना क्योंकि तुम्हारे पास तो इतने सारे बिस्किट हैं, हैं ना? किसी से लड़ना-झगड़ना ठीक नहीं है और हम दूसरों को मारते नहीं हैं!' ‘हाँ, अगर टेडी बीयर लेने की कोशिश करे सिर्फ तब मारना है!' उसने कहा। और सारा दिन वह इसी तरह बात करती रही: अगर कोई आदमी अच्छा नहीं है तो, अगर कोई ऐसा करे तो, अगर वह औरत यह करे तो, वह करे तो, क्या मैं उसे मार सकती हूँ? बाहर घूमते हुए, जब हम अपने मित्रों से मिले तब और रात को खाना खाते समय भी।

एक कड़ा नियम उसके लिए शिथिल किया गया था और अब वह उसे हर तरह से आजमा रही थी कि इस शिथिलता से मिली छूट का कोई भी अंश उसके हाथ से निकलने न पाए! आपने देखा, इस दो साल की बच्ची पर उस छोटे से वाक्य का कितना असर पड़ा? आप कल्पना कर सकते हैं कि जब मेरा एक छोटा सा वाक्य इतना गहरा असर डाल सकता है तो उसके प्यारे खिलौने को उससे छीनने की आपकी कोशिश ने उस पर कितना बुरा असर डाला होगा!

एक बच्चे का दिमाग इतना कोमल होता है, उसकी भावनाएं इतनी संवेदनशील होती हैं और उनका ह्रदय इतना बहुमूल्य होता है कि उनके सामने बात करते वक़्त और अपने सामान्य व्यवहार में आपको बहुत सतर्क रहना चाहिए।

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