बच्चों के पालन-पोषण का आनंद: समस्याएं, समाधान और पुनः नयी समस्याएं – 22 अप्रैल 2015

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

आज हमने एक अनोखी बात नोटिस की- स्वाभाविक ही ख़ुशी और आश्चर्य के साथ- कि अपरा आजकल बहुत सी वह बातें नहीं करती, जो सप्ताह भर पहले अक्सर बहुत ज़्यादा किया करती थी: नखरे करना, बेतरह ज़िद करना, किसी भी बात के लिए बुरी तरह मचलना! अगर इसका कुछ लाभ होता तो मैं कहता, 'टच वुड', लेकिन ऐसा लगता है कि नखरों का वह दौर बीत चुका है। और इसी के साथ हमें एक बात और पता चली: विकास विभिन्न चरणों में और क्रमशः होता रहता है। एक खास तरह का व्यवहार, कोई आचरण शुरू होता है, कुछ दिन चलता है फिर एक समय आता है जब वह खत्म हो जाता है। और, ज़रूरी नहीं मगर फिर उसकी पुनरावृत्ति भी हो सकती है।

पिछले कुछ महीनों में हमारे यहाँ किशोर या वयस्क बच्चों के बहुत से अभिभावकों का आना हुआ और इस दौरान हमने देखा कि ठीक खाना खाते समय अक्सर सबकी मौजूदगी में अपरा पर गुस्से का दौरा पड़ जाता था! आप कल्पना कर सकते हैं कि उसका यह तमाशा मेज़बान के रूप में और उस नौटंकीबाज़ के माता-पिता के रूप में हमारे लिए कितना सुखद रहता होगा! 🙂

इस विषय में सबसे अच्छी सलाह जो हमें प्राप्त हुई, यह थी: बेफिक्र रहो, तीन माह में यह समस्या अपने आप दूर हो जाएगी।

और ऐसा ही हुआ! इस बीच उसके आचरण और व्यवहार के बहुत से तरीकों में हमने इसे महसूस किया! मैं जानता हूँ कि बहुत से आदर्शवादी अभिभावक हैं, जो अपने बच्चों और उनके आचरण को लेकर बहुत ज़्यादा परेशान रहते हैं। वे बच्चों को ऐसा व्यवहार करता हुआ देखते हैं और गहरी निराशा से भर उठते हैं, वे उनके अजीबोगरीब और अनपेक्षित व्यवहार से परेशान होते हैं। वास्तव में वे इसे बच्चों के सीखने-समझने की प्रक्रिया के रूप में नहीं देख पाते!

इतना दुखी होने की ज़रुरत नहीं है! बच्चों के लिए हम सभी अच्छा करना चाहते हैं, हम चाहते हैं कि वे बहुत कामयाब और भले इंसान बनें- लेकिन अगर आप उनकी सीखने के दौरान होने वाली मामूली गलतियों पर परेशान होते रहेंगे तो उसके लिए जो अच्छा से अच्छा आप करना चाहते हैं, वह करने में आपके सामने मुश्किलें पेश आएँगी! अगर आप उसके लिए हर संभव अच्छा कर रहे हैं तो कोई कारण नहीं कि आप परेशान हों!

आप बच्चों के लिए हर संभव अच्छा कर रहे हैं। हालांकि इसमें कोई हर्ज़ नहीं कि आप कभी कभार अपनी प्रतिक्रियाओं पर पुनर्विचार कर लें, उनका पुनर्विश्लेषण कर लें, लेकिन मुझे लगता है कि आपको उनके परिणामों को लेकर इतना ज़्यादा परेशान और चिंतित नहीं होना चाहिए, इतना तनावग्रस्त नहीं हो जाना चाहिए कि लालन-पालन के तरीकों की तुलना करने के लिए किताबें छानने लगें या विशेषज्ञों की राय लेने पहुँच जाएँ।

बच्चों को अपना कुछ अतिरिक्त प्रदान करें, थोड़ा अधिक समय, अपना अखंड अवधान, तवज्जो और सबसे मुख्य बात, उनके साथ बिताए जा रहे अपने समय का आनंद लें!

अंत में अपने एक मेहमान से प्राप्त यह आश्वासन मैं आपके साथ साझा करूँगा: आप अभी जिस विशेष परिस्थिति का सामना कर रहे हैं, उसे संभालिए, उसका डटकर सामना कीजिए और प्रसन्न रहिए। जब आप उसकी ओर से निश्चिन्त हो जाएँगे तभी अचानक यह समस्या दोबारा आपके सामने उपस्थित हो जाएगी!

एक आनंद, जो अगले 18 साल बना रहेगा- या और भी अधिक समय तक!