अहिंसक शिक्षा: बच्चे की जिद और उसके नखरों का सामना प्यार के साथ कैसे करें! 5 मार्च 2014

पालन पोषण

कल मैंने बच्चों को उन परिणामों की जानकारी दिये जाने की आवश्यकता के बारे में लिखा था, जो उनके द्वारा की जाने वाली शैतानियों से उपज सकते हैं। आज मैं उन परिणामों के सृजन के बाद होने वाली वाली महत्वपूर्ण प्रक्रिया के बारे में लिखना चाहता हूँ:

5) अपने निर्णयों पर दृढ़ रहें।

मान लीजिए आपने अपने बेटे से कह दिया कि क्योंकि उसने अपनी खिलौने की कार कमरे के बाहर फेंक दी है इसलिए अब आप उसकी कार उसे वापस नहीं देंगे तो फिर वैसा ही कीजिए। आपने उससे कहा था कि कार को बाहर न फेंके क्योंकि वह टूट सकती है। आपने एक बार फिर से कहा और उसके बाद भी उसने वही किया है तो आपको कार उससे ले लेनी चाहिए। ले लीजिए। वह अपनी गलती दोहरा रहा है, खासकर इसलिए कि वह देखना चाहता है कि आप उससे कार लेते हैं या नहीं। अब उसे यह दिखाने की बारी आपकी है कि आप जो बात कहते हैं उस पर दृढ़ रहते हैं और यह एक महत्वपूर्ण तरीका है, जिससे आप अपने बच्चे को आपकी बात मानने पर मजबूर कर सकते हैं।

पढ़ते हुए यह आसान लगता है: बस कार उससे ले ही तो लेना है। मगर व्यवहार में यह बहुत कठिन काम सिद्ध हो सकता है और मैं अपने अनुभव से जानता हूँ कि एक जिद्दी नन्ही बच्ची से निपटना कितना मुश्किल होता है। चीख-चीखकर रोना सुनने के लिए और सख्त अड़ियलपन का सामना करने की तैयारी कर लीजिए, यहाँ तक कि सबके सामने भी। फर्श पर लोट लगाते हुए शोर मचाना, उसे गोद में लेने की कोशिश करने पर अपने नाखूनों से खरोंच देना, दांतों से काटना या आपकी ही पिटाई करने की कोशिश करना और फेफड़ों की पूरी शक्ति लगाकर इस तरह चिल्लाना कि पाँच किलोमीटर तक उसका स्वर सुनाई दे और लोग समझें कि आप कितने बुरे अभिभावक हैं। आपको इन सब बातों का सामना करना है।

अक्सर समझा जाता है कि ऐसा होगा मगर यह सच नहीं है और जिनके बच्चे हैं वे सभी इस बात को जानते हैं। बाकी किसी बात की चिंता न करें, वे एक न एक दिन खुद यह बात जान जाएंगे या फिर वे यह सोचते ही रहेंगे कि आप बुरे अभिभावक हैं, जब कि आप जो कर रहे हैं वह उचित है।

उचित बात आपका अपने निर्णय पर दृढ़ रहना है भले ही वास्तव में ऐसा हो ही जाए लेकिन ध्यान रहे कुछ भी हो जाए आपको क्रोध में नहीं आना है और न ही अपने बच्चे के प्रति आक्रामक होना है। शांत और निश्चिंत रहें। अगर संभव हो तो अपने बच्चे को ऐसी जगह ले जाएँ जहां सिर्फ वह और आप हों या अगर पूरी तरह एकांत जगह नहीं है तो वहीं आसपास कोई शांत कोना खोजकर उसके साथ बैठें।

अपने बच्चे को बाहों में भर लें-बशर्ते आप स्वयं शांतचित्त हों-और उसे गोद में ले लें और इस दौरान उसे अपनी भावनाएँ व्यक्त करने दें। उनका व्यक्त होना ज़रूरी है, यह स्वाभाविक बात है। ध्यान रखें कि वह खुद अपने आपको चोट न पहुंचा ले और अगर वह आपको चोट पहुँचाने की कोशिश करता है तो उसकी पीठ अपनी तरफ कर लें। अब उसे ठंडे शब्दों में, शांति पूर्वक एक बार फिर से बताएं कि आपने उसकी कार इसलिए ले ली क्योंकि वह उसे बार-बार बाहर फेंक रहा था और अब वह उसे नहीं मिलेगी क्योंकि अभी भी वह चीख-चिल्ला रहा है। वह उसे तभी मिलेगी जब बाद में वह शांत हो जाएगा और अपना गुस्सा और ज़िद छोड़ देगा।

और कभी न कभी वह शांत हो जाएगा। मेरा विश्वास करें। और इससे वह एक सीख लेगा कि आप जो कहते हैं उसे गंभीरता के साथ पूरा करते हैं और कोई ज़िद या चीखना-चिल्लाना या रोना-धोना आपके निर्णय को बदल नहीं सकता।

6) मसले का अंत प्यार के साथ करें।

एक बार आपका बच्चा शांत हो जाए-भले ही आपकी थोड़ी-बहुत मदद से-जैसे आप उससे कोई दूसरा काम करने के लिए कह सकते हैं, दूसरी जगह जाकर खेलने की सलाह दे सकते हैं-लेकिन ध्यान रखें कि इस मसले का अंत प्यार के साथ करें। बच्चे को यह महसूस कराएं कि भले ही उसने इतनी ज़िद की, इतना नाटक किया, किसी भी कारण से किया हो, कहीं भी और कितना भी किया हो, इसके बावजूद आप उससे प्यार करते हैं और उसके लिए उसके साथ खड़े हैं। उसे गले लगाएँ, आपस में एक दूसरे को चूमें और उसे बताएं कि आप उससे प्यार करते हैं।

ज़िद पर पार पाना आसान नहीं है लेकिन उसका यह आखिरी हिस्सा आपके लिए बहुमूल्य पुरस्कार सिद्ध होगा जो आपको सुखद भावनाओं से भर देगा। आपने अभी-अभी अपने बच्चे को सफलतापूर्वक एक पाठ पढ़ाया है, प्रेम के साथ, भावनाओं के ज्वार के बीच उसकी सहायता करते हुए, उसके मानसिक उद्वेलन में उसके साथ खड़े रहकर अपनी मजबूत भुजाओं का सहारा देते हुए, जो उसे उसकी सीमाओं की पहचान कराती हैं मगर प्यार के साथ उसे थाम भी लेती हैं और उसे सही रास्ते पर लाने का काम भी करती हैं।

अब मैं जाता हूँ, और अपनी बेटी को चूमता हूँ…

Leave a Comment