अहिंसक शिक्षा: अपने बच्चों को स्पष्टीकारण दीजिये और अहिंसक परिणामों का सृजन कीजिए- 4 मार्च 2014

पालन पोषण

कल मैंने बच्चों को अहिंसक तरीके से शिक्षित करने की दिशा में कुछ सुझाव प्रस्तुत किए थे। यह एक बहुत महत्वपूर्ण विषय है। क्योंकि हम खुद इस वक़्त एक बच्चे को प्रेमयुक्त अहिंसक माहौल में बड़ा करने की प्रक्रिया से गुज़र रहे हैं इसलिए यह न समझें कि सिर्फ मेरे लिए ही यह महत्वपूर्ण है। यह विषय उन सभी अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपने बच्चों से प्रेम करते हैं। हिंसा कभी भी श्लाघनीय नहीं हो सकती।

3) ‘नहीं’ शब्द का सिर्फ प्रयोग ही न करें- उसे स्पष्ट भी करें!

जब किसी बात पर ‘नहीं’ कहें तो समझाएँ कि आप उस बात के लिए क्यों मना कर रहे हैं। जब बच्चा गर्म ओवन की तरफ हाथ बढ़ा रहा है तो आप उसे मना करते हुए कहें: ‘वह बहुत गर्म है’ या ‘तुम्हारा हाथ जल जाएगा’। सिर्फ ‘नहीं’ कहेंगे तो आपका बच्चा इतना ही समझ पाएगा कि आप नहीं चाहते कि वह ओवन को छुए। वह सिर्फ इतना ही समझेगा कि आप उस पर नियंत्रण करना चाहते हैं, उसे आपकी बात माननी पड़ेगी क्योंकि आप उसकी माँ या उसके पिता हैं। अगर आप मना करने के साथ मना करने का कारण भी जोड़ दें कि आप नहीं चाहतीं कि उसे चोट पहुंचे या उसे तकलीफ हो और संभव हो तो उसका हाथ पकड़कर ओवन के पास जाकर उसकी गर्मी का अहसास भी करा दें तो वह अच्छी तरह समझ जाएगा कि ओवन कितना गर्म हो सकता है और उसे छूने से किस तरह उसे तकलीफ पहुँच सकती है। तब वह यह भी समझ जाएगा कि आपको उसकी कितनी फिक्र है, आपने उसे जलने से बचाने के लिए उससे ‘नहीं’ कहा है, मना किया है!

अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो बच्चा सिर्फ यह सुनेगा: ‘अगर यह करोगे तो मैं तुम्हारी पिटाई करूंगा’ या फिर तब तक सिर्फ ‘नहीं’ की पुनरावृत्ति सुनता रहेगा जब तक कि आप अपना आपा नहीं खोते और उसके बाद तड़ाक! एक चांटा! इसमें कोई सीखने की बात आप उसे नहीं बताते, इसके अलावा कि अगर वह आपका कहना नहीं मानता तो आप उसकी पिटाई करेंगे। वह नहीं समझ पाएगा कि ‘क्यों नहीं’। आपने उसे समझाया ही नहीं।

यह बहुत आसान और प्रभावशाली है। सिर्फ उसके साथ थोड़ी सी बात करनी है! और यह मत समझिए कि आपका बच्चा इतना छोटा है कि समझ नहीं पाएगा! शिशुओं की और छोटे बच्चों की जानकारियों और नई बातों को ग्रहण करने की शक्ति देखकर आप अचंभित रह जाएंगे, यह देखकर भी कि कितनी तेज़ी के साथ अपने नन्हें से दिमाग की सहायता से वे परिणामों और निष्कर्षों तक पहुँच जाते हैं। आप आश्चर्य में पड़ जाएंगे, जब देखेंगे कि आपका बच्चा उसके या आपके कामों के परिणामों के बारे में तुरत-फुरत बताने में सक्षम होता है! फिर आप ही बताएं कि आप उससे ‘नहीं’ क्यों कहते हैं! दुनिया की जानकारियाँ उसे प्रदान करना आपके अभिभावकत्व का सबसे सुंदर हिस्सा है!

और अब, जबकि हम परिणामों के बारे में बात कर रहे हैं तो:

4) अहिंसक परिणामों को भी बच्चों के सामने स्पष्ट करें और फिर उन्हें उनके निष्कर्षों तक ले जाएँ।

अब हम उन प्रकरणों का ज़िक्र करेंगे जहां हम पाते हैं कि हमारी बेटी भी वही सब कर रही होती है, जो उसे नहीं करना चाहिए। आपने उससे कहा कि साथ खेल रहे दूसरे बच्चे का खिलौना न ले। वह जैसे सुन ही नहीं रही है, जब कि आप उससे कह रहे हैं कि यह अच्छी बात नहीं है और यह कि वह कोई दूसरा खिलौना ले सकती है। अगर इसके बावजूद वह उस बच्चे से उसका खिलौना छीनना जारी रखती है और उसके लिए जिद पकड़ ली है तो भी अपनी बेटी पर क्रोधित न हों और न ही उसकी पिटाई करें।

लेकिन इस बात को अनदेखा भी न करें। अक्सर यह होता है, क्योंकि या तो आप सुस्त और उदासीन होते हैं या फिर अपनी बच्ची से ही डर जाते हैं कि कहीं वह कोई हंगामा खड़ा न कर दे या फिर आप समझ ही नहीं पाते कि क्या किया जाए। लेकिन जो आपने अपनी बच्ची से कहा है वह उसने सुन लिया है और वह आपका कहना नहीं मान रही है तो इसका कारण यह है कि वह देखना चाहती है कि आगे अब आप क्या करेंगे।

अपनी बच्ची को बताएं कि अगर वह आपका कहना नहीं मानेगी तो क्या होगा। उससे कहें कि ‘उस बच्चे का खिलौना मत लो नहीं तो तुम्हें मेरे पास आकर यहाँ बैठना पड़ेगा’। और बिल्कुल वही करें। उसे उठाकर उस लड़के से अलग कर दें और अपने पास बिठा लें और उससे कहें कि अगर वह किसी के खिलौने छीनेगी तो वह उसके साथ नहीं खेल सकती। उसकी तरफ ध्यान दें और उसे समझाएँ। जब आपके द्वारा दी गई इस जानकारी का विश्लेषण करने के बाद वह समझकर शांत हो जाए तब उससे पूछें कि क्या वह किसी और खिलौने से खेलने के लिए तैयार है। पहले उसे आपकी बात स्वीकार कर लेने दें कि वह अब ऐसा नहीं करेगी और फिर उसे जाने दें।

यह महज एक उदाहरण है लेकिन मैं समझता हूँ कि आपने बात समझ ली होगी: आसपास अहिंसक परिणाम सृजित करें, अपने बच्चे को चेतावनी दें और फिर उसे पूरी तरह अमल में लाएँ।

इनके अलावा भी कुछ और महत्वपूर्ण बाते हैं जो आगे आएंगी और मैं कल उनके विषय में विस्तार से लिखूंगा।

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