अपने बच्चों के सामने दूसरे बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करें – 18 अगस्त 2015

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

हमारे यहाँ, आश्रम में हमेशा बच्चे मौजूद होते हैं और स्वाभाविक ही पिछले साढ़े तीन साल से उनके बीच हमारी बेटी भी है। वह अब भी उन बच्चों में सबसे छोटी है और जब कि वह हमारे लिए हमेशा कुछ ख़ास रहेगी, हम उसे एक बात सिखाने की भरसक कोशिश करते हैं: हम सब बराबर है। तुम और दूसरे सभी बच्चे एक जैसे हैं। मुझे लगता है, बहुत से अभिभावक अपने बच्चों के मन यह संदेश बिठाने के लिए परिश्रम करते होंगे और इसीलिए मैं आज यह ब्लॉग लिख रहा हूँ।

हमारे स्कूल का एक बुनियादी उसूल है, मेरे जीवन का भी यह बुनियादी उसूल है और अपनी बेटी को भी मैं यही बात सिखाना चाहता हूँ: हम सब बराबर हैं। कोई भी आपसे ऊपर नहीं है, दूसरे जो भी काम कर सकते हैं, आप भी कर सकते हैं। लेकिन साथ ही, कोई भी आपसे छोटा नहीं है।

निश्चित ही आपका बच्चा आपके लिए हमेशा ख़ास होगा। आप सोचेंगे कि वह अधिक बुद्धिमान, अधिक सुन्दर है, हर चीज़ में दूसरे बच्चों से बढ़-चढ़कर है। यहाँ तक सब कुछ ठीक है, आप इस एहसास में खुश रहें, आनंदित हों और जब भी वह कुछ अच्छा करे, उसकी तारीफ़ करें।

लेकिन उसे यथार्थ की सीमा में रखें: बच्चे सभी एक जैसे होते हैं। कुछ बच्चे किसी क्षेत्र में प्रतिभाशाली होते हैं तो दूसरे किसी दूसरे क्षेत्र में। हम ही होते हैं जो उन्हें एक काम में या किसी और काम में प्रशिक्षित करते हैं और संभवतः उसमें उसे आगे और विकसित करने में अपना योगदान देते हैं!

लेकिन साथ ही हम ही होते हैं जो उन्हें इस बात की शिक्षा देते हैं कि एक-दूसरे के साथ परस्पर समान व्यवहार किया जाना चाहिए। हमें इसका उदाहरण बनना चाहिए। न सिर्फ दूसरे वयस्कों के साथ समान व्यवहार करके और यह दर्शा के कि हमें अपने साथ बराबरी का व्यवहार पसंद है, बल्कि दूसरे बच्चों के साथ वैसा ही व्यवहार करके, जैसा हम अपने बच्चे के साथ करते हैं।

आप नहीं चाहेंगे कि आपका बच्चा दूसरों को नीची नज़र से देखे। तो फिर आप भी वैसा ही करें और उसके सामने अपना उदाहरण प्रस्तुत करें।

मेरी बेटी मेरे लिए सदा कुछ ख़ास रहेगी और निश्चित ही मेरे पूरे परिवार के लिए भी। वह हमारे लिए राजकुमारी है- लेकिन हमारे साथ और भी दूसरे बच्चे रहते हैं। वे सभी एक से नियम सीख रहे हैं और जब भी हमारी बेटी उन नियमों से विचलित होती है तो उसे भी तुरंत आगाह किया जाता है।

स्वाभाविक ही वह हमारी थाली में खाएगी, हमारे साथ सोएगी। वह हमारे लिए खास होगी लेकिन मैं उसे सिखाना चाहता हूँ कि जब कि वह अपने आसपास के लोगों के लिए कुछ खास है, उसके आसपास मौजूद हर व्यक्ति भी कुछ और लोगों के लिए खास है। और जितने ज़्यादा खास लोग तुम्हारे आसपास मौजूद होंगे उतना ही खुश तुम रहोगी।

हम सब बराबर हैं, हम सब खास हैं!

और अब हम पवन के भाई, गुड्डू का जन्मदिन मनाने जा रहे हैं, जो अब हमारे साथ ही रह रहा है। वह उसका खास दिन होगा- हम सुनिश्चित करेंगे कि उसे महसूस हो कि वह हम सबके लिए कितना खास है!