अपने बच्चों को डराएँ नहीं! उन्हें बताएँ कि आप हर वक़्त उनके साथ खड़े हैं! 17 अप्रैल 2014

कल मैंने आपको अपरा के अस्पताल दौरे के बारे में बताया था, जहाँ सिर्फ एक वाक्य से एक माँ ने उसे इतना चिढ़ा दिया कि फिर वह उस माँ के नवजात शिशु को देखकर अपने दिल में उमड़े सारे प्रेम और आश्चर्य को भूल गई। भारत में बच्चों के साथ ऐसे मजाक असामान्य नहीं है इसीलिए मैं पहले भी इस विषय पर लिखता रहा हूँ। लेकिन मुझे अत्यंत आश्चर्य होता है कि क्या लोग बच्चों की भावनाएं समझ ही नहीं पाते या क्या कि वे उन भावनाओं की परवाह नहीं करते।

अपरा के साथ हमने इस बात को अनगिनत बार महसूस किया है। जब हम अपने किसी मित्र के यहाँ जाते हैं तो, चाहे एकाध घंटे के लिए ही वहां क्यों न बैठें, इस बात की 100% सम्भावना होती है कि वहां उपस्थित कोई न कोई यह कहेगा: "तुम आज हमारे यहाँ रुक जाओ! जाने दो सबको, घर!"

बधाई हो! एक घंटे के लिए आपके घर क्या आए आपने हमारी बच्ची पर ऐसा प्रभाव छोड़ा कि अब वह आपके घर कभी नहीं आना चाहती। जी हाँ, उसने मुझसे यही कहा है, आपके घर के दरवाजे से बाहर निकलते ही! "चलो, घर चलते है। अब इनके यहाँ मैं कभी नहीं आऊंगी"।

मैं जानता हूँ कि आप यह नहीं चाहते कि वह न आए लेकिन यह बात वह नहीं समझती! मैं यह भी जानता हूँ कि आप उसके भीतर इस तरह की भावना पैदा करना नहीं चाहते मगर क्या आप इतना भी नहीं समझ पाते कि आप ठीक यही कर रहे हैं? मुझे पता है कि यह एक बहुत सामान्य आदत है लेकिन क्या आप यह नहीं सोचते कि यह एक बुरी आदत है?

अभिभावक खुद अपने बच्चों के साथ भी अक्सर यही करते हैं। मैं कहना चाहूँगा कि मुझे उन बच्चों के लिए वाकई बड़ा दुःख होता है, जब वे सपरिवार हमारे यहाँ आए होते हैं और वापस जाते समय बच्चे की माँ या पिता कहेंगे, "मैं घर जा रहा हूँ, रहो तुम यहीं!" रुकिए, न सिर्फ मैं उन बच्चों के लिए दुखी हो रहा हूँ, वास्तव में मैं नहीं चाहता कि आप मेरे साथ भी यह करें! अगर आप मेरे घर में उसे ऐसी धमकियाँ देंगे तो आपका बच्चा मेरे साथ एक मिनट रहना नहीं चाहेगा, न हमारे यहाँ कभी रुकना चाहेगा!

आप अपने बच्चों को क्या दर्शाना चाहते हैं? स्वाभाविक ही, जो मैं अपने बच्चे को सिखाना चाहता हूँ, उसका विपरीत! मैं चाहता हूँ कि मेरी बच्ची को हर वक्त यह पता रहे कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं उसके साथ खड़ा रहूँगा। मैं उन जगहों में उसके साथ रहूँगा, जहाँ वह असुविधा महसूस करती है। मैं उसे सुविधाजनक माहौल दुंगा, मेरी गोद उसकी सुरक्षित जगह होगी और अगर उसे ज़रूरत पड़े तो मेरी बाहें उसकी छिपने की जगह बनेंगी। उसे कभी यह न लगे कि मैं उसके पास नहीं हूँ। जब कुछ गलत करने पर मैं उसे डांटता हूँ, हम गले लिपट जाते हैं। मैं उसे दिखाना चाहता हूँ कि उस पर नाराज़ होने के बावजूद और उसे वह गलती फिर से न करने की कड़ी हिदायत देने के बाद भी मैं उससे प्रेम करता हूँ और मैं हमेशा उसके लिए, उसके पास मौजूद हूँ।

आप कभी नहीं पाएंगे कि जब वह खेल रही है और अच्छे मूड में है, मैं अपनी बेटी को चिढ़ा रहा हूँ, उससे कह रहा हूँ कि मैं उसे छोड़कर चला जाऊँगा। मैं उसे डरा हुआ नहीं देखना चाहता। मैं नहीं चाहता कि वह रोए और दया की भीख मांगे। मैं अपनी बेटी को खुश देखना चाहता हूँ।

और आप क्या चाहते हैं?