जब एक टिप्पणी आपको आश्चर्यचकित कर देती है क्योंकि वह घृणा से लबरेज है – 15 जनवरी 2015

कुछ समय पहले मुझे अपने एक पाठक की टिप्पणी प्राप्त हुई। उसने मुझ पर एक आरोप लगाया था: मैं यूरोप को जर्मनी जैसा प्रदर्शित करता हूँ। जबकि मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि यह सत्य नहीं है, मैं उसकी अत्यंत अत्यंत कटु भाषा से थोड़ा हतप्रभ रह गया: वह यह दर्शाने की कोशिश कर रहा था कि मेरे ब्लॉग से वह अपमानित महसूस कर रहा है और इसलिए उसने जर्मन जनता, वहाँ की संस्कृति और उस देश को बुरा-भला कहते हुए कई अपमानजनक बातें कहीं।

मैं उस पाठक की टिप्पणी को ज्यों का त्यों यहाँ रख रहा हूँ, जिससे आप मेरे कहने का अर्थ बेहतर समझ सकें।

"मैं एक पूर्व-यूरोपियन व्यक्ति हूँ और कई पश्चिमी यूरोपियन देशों में भी रह चुका हूँ। मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि जितने लोगों से मैं मिला हूँ उनमें जर्मन लोग ही एकमात्र बीमार लोग हैं। मेरे मुताबिक जर्मनी में रहना हर तरह से अत्यंत घृणास्पद और जीवन को बरबाद करने जैसा है। जर्मनी में रहने वाले जिन विदेशियों से मैं मिल पाया हूँ, उनका भी यही मत है। थोड़ा कष्ट करके ज़रा पूर्वी और दक्षिण यूरोपीय देशों, यहाँ तककि ब्रिटेन को भी निष्पक्ष दृष्टिकोण से परखने की कोशिश करें तो आप आश्चर्यचकित रह जाएँगे। कृपा करके सभी यूरोपियन्स को ‘जर्मन’ कहकर सारे यूरोपियन्स का अपमान न करें। वहाँ एकमात्र यह फासिस्ट विचार प्रचलित है कि सभी लोग उनकी तरह क्रूर, भयंकर और डरावने हो जाएँ। लेकिन हम आशा करते हैं कि वे कभी भी इस उद्देश्य में सफल नहीं होंगे।"

पहली बात तो यह कि भले ही मुझे जर्मनी सबसे ज़्यादा अच्छा देश लगता हो और मैंने वहाँ अधिक से अधिक समय बिताने का फैसला किया हो लेकिन यह अकेला देश नहीं है जहाँ मैंने इतना समय अधिक बिताया है! यूरोप की अपनी विदेश यात्राओं के पहले कुछ वर्ष मैं अधिकांश समय यू के (ब्रिटेन) में गुज़ारा करता था। मैं कई-कई हफ्ते स्पेन में रहा हूँ और कम से कम एक सप्ताह के कई दौरे वहाँ के कर चुका हूँ। मैं स्विट्ज़रलैंड, ऑस्ट्रिया, लक्सेम्बर्ग, आयरलैंड, बेल्जियम, फ़्रांस, लुथिआनिया, लातविया, डेनमार्क, स्वीडन, नीदरलैंड आदि देशों में भी कई बार आ-जा चुका हूँ। सम्भव है, कुछ देशों के नाम, जहाँ मैं रह चुका हूँ, भूल भी रहा होऊँ, जिसके लिए मैं आपसे माफ़ी चाहता हूँ। तो यह तो रहा इस बात का जवाब कि जर्मनी के अलावा मैंने कहीं कुछ नहीं देखा है।

लेकिन जर्मन्स के बारे में जैसे विचार आपके हैं वैसे विचार मैंने किसी अन्य देशवासियों में नहीं पाए! आप उन्हें क्रूर, खौफ़नाक, फासिस्ट और न जाने क्या-क्या कह रहे हैं। आपके मुताबिक जर्मनी में जीवन बहुत मनहूस है, वहाँ आपका जीवन बरबाद हो सकता है! और आप यह दावा करते हैं कि सभी विदेशी आपकी तरह सोचते हैं। मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मैं आज तक किसी गैर-जर्मन से नहीं मिला हूँ जो उनके बारे में इतने बुरे और नकारात्मक विचार रखता हो! और मैंने आज तक जर्मन्स के बारे में जो भी सुना है आपकी राय उनमें सबसे अधिक फासीवादी राय है! आप ही बताइए आपके शब्दों के प्रकाश में कौन यहाँ अधिक क्रूर नज़र आता है?

जबकि मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि मैं जर्मन्स की बात करते हुए यूरोपियन्स की बात नहीं लिख रहा होता हूँ, मैं अक्सर जर्मन्स, उनकी प्रवृत्तियों और उनकी संस्कृति के बारे में पर्याप्त बातें लिखता ही रहता हूँ लेकिन मैं किसी भी देश के बारे में कभी भी वैसी बात नहीं लिखूँगा जैसी आपने जर्मन्स के बारे में लिखी है। हो सकता है आप कुछ गलत लोगों से मिले हों, लेकिन दुनिया का कोई भी जन-समूह इस तरह सामान्य रूप से बुरा नहीं कहा जा सकता।

स्वाभाविक ही लिखते समय कोई भी लेखक अपनी बात को थोड़ा-बहुत व्यापक बनाता ही है और हमेशा किसी भी जन-समूह में ऐसे लोग मौजूद होते हैं जो किसी भी घिसे-पिटे सामान्यीकरण में फिट नहीं होते लेकिन सचमुच बड़ी ईमानदारी से यह कहना चाहता हूँ कि जहाँ भी मैं गया हूँ, सभी सामान्यीकरणों (generalization) के बावजूद मैंने हमेशा कुछ बड़े शानदार और खूबसूरत लोग भी पाए हैं।

शायद मुझसे अधिक आपको और अधिक घूमने-फिरने की ज़रूरत है, जिससे आप भी कुछ सकारात्मक लोगों से मिल पाएँ!

Related posts

क्या करें जब आपको नकारात्मक लोगों की संगत में रहना पड़े? 4 नवंबर 2015

क्या करें जब आपको नकारात्मक लोगों की संगत में रहना पड़े? 4 नवंबर 2015

*स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि उस परिस्थिति से कैसे निपटें जब आपको किसी नकारात्मक व्यक्ति के साथ रहना पड़े। ...
जहाँ तक हो सके, नकारात्मक लोगों से दूर रहें - 3 नवंबर 2015

जहाँ तक हो सके, नकारात्मक लोगों से दूर रहें – 3 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु पाठकों को आगाह कर रहे हैं कि जो लोग हर समय नकारात्मक बने रहते हैं, उनसे दूर ही ...
जब कभी भी कुछ भी ठीक होता नज़र नहीं आता क्योंकि संतुष्टि भीतर से आती है - 2 नवंबर 2015

जब कभी भी कुछ भी ठीक होता नज़र नहीं आता क्योंकि संतुष्टि भीतर से आती है – 2 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु उनके बारे में अपने विचार लिख रहे हैं जो कभी संतुष्ट या खुश नहीं होते। बालेंदु जी के ...
आपका आसपास आपका आईना नहीं बल्कि परस्पर प्रभाव के साथ दोनों का अनुकूलन है - 12 अक्टूबर 2015

आपका आसपास आपका आईना नहीं बल्कि परस्पर प्रभाव के साथ दोनों का अनुकूलन है – 12 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि हम अपने आस-पड़ोस द्वारा प्रभावित होते हैं और बदले में हमारा आस-पड़ोस भी हमसे ...
क्या आपके 'जीवन का सबसे खराब समय' चल रहा है? उससे बाहर निकलिए! 9 सितंबर 2015

क्या आपके ‘जीवन का सबसे खराब समय’ चल रहा है? उससे बाहर निकलिए! 9 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे आप उन परिस्थितियों से बाहर निकल सकते हैं, जिसके कारण आपको वह समय ...
नकारात्मकता पर ध्यान केन्द्रित करना आशावादी बने रहने में मदद करता है? मैं इससे सहमत नहीं! 24 जुलाई 2014

नकारात्मकता पर ध्यान केन्द्रित करना आशावादी बने रहने में मदद करता है? मैं इससे सहमत नहीं! 24 जुलाई 2014

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि क्यों वे नहीं सोचते कि रात को नकारात्मक बातों को लिखना आपको आशावादी बना ...
नकारात्मक लोगों को नकारात्मकता फैलाने से कैसे रोकें? 23 जुलाई 2014

नकारात्मक लोगों को नकारात्मकता फैलाने से कैसे रोकें? 23 जुलाई 2014

स्वामी बालेंदु अपने पाठकों को बता रहे हैं कि कैसे बहुत सारे नकारात्मक (निराशावादी) लोगों के बीच वे अपने आपको ...
नकारात्मक लोगों से घिरे होने पर क्या किया जाये? 21 नवंबर 2013

नकारात्मक लोगों से घिरे होने पर क्या किया जाये? 21 नवंबर 2013

स्वामी बालेंदु उन लोगों को कुछ सलाहें दे रहे हैं, जो समझते हैं कि वे बहुत सारे नकारात्मक लोगों से ...
क्या करें, जब आपको पता चले कि आपमें नकारात्मकता कूट-कूटकर भर गई है? 20 नवंबर 2013

क्या करें, जब आपको पता चले कि आपमें नकारात्मकता कूट-कूटकर भर गई है? 20 नवंबर 2013

स्वामी बालेंदु उन लोगों के लिए कुछ गुर बता रहे हैं, जो अपने अंदर मौजूद नकारात्मकता को पहचान गए हैं ...
सारी बुरी बातें मेरे साथ ही होती हैं! नकारात्मक लोग और पीड़ित होने का मज़ा- 19 नवंबर 2013

सारी बुरी बातें मेरे साथ ही होती हैं! नकारात्मक लोग और पीड़ित होने का मज़ा- 19 नवंबर 2013

स्वामी बालेन्दु नकारात्मक लोगों के बारे में बताते हुए समझा रहे हैं कि कैसे ये लोग अपने आपको पीड़ित (उत्पीड़ित) ...

Leave a Reply