कल मैंने यह तथ्य आपके सामने रखा था कि कई नकारात्मक लोग स्वयं को पीड़ित मानकर खुश होते हैं। उसके एक दिन पहले मैंने स्पष्ट किया था कि कैसे उनकी नकारात्मकता दूसरों को भी आसानी के साथ अपनी गिरफ्त में ले लेती है। आज मैं उन्हीं नकारात्मक लोगों के लिए कुछ लिखना चाहता हूँ-क्योंकि कई लोग ऐसे हैं, जो अंदर से बहुत खूबसूरत इंसान हैं मगर आसपास की सभी चीजों को नकारात्मक नज़रिये से देखने की आदत के चलते वे अपने जीवन को दुखदाई बना लेते हैं।
चलिए, मान लें कि आप ही ऐसे एक व्यक्ति हैं और आपको अचानक पता चला कि आप बहुत ज़्यादा नकारात्मक हो चुके हैं। बिना इस अनुभूति के आप उसी नकारात्मकता में लिप्त रहे आते और वही करते रहते, जो आज तक करते रहे, मगर अब आपको इसका एहसास हो गया है। सिर्फ इतने भर से आपके विचारों में और आपकी संवेदनशीलता में एक हलचल सी मच जाएगी। अगर अपने में परिवर्तन की नीयत से आप इस वक़्त अपनी इच्छाशक्ति को एकत्रित कर सकें तो पूरी संभावना है कि आप अपने आप में तब्दीली ला पाएंगे, अपनी नकारात्मकता से बाहर निकल आएंगे और सकारात्मक ऊर्जा से भरे हुए, पूरे नए इंसान बनकर सामने आएंगे!
लेकिन इस मरहले तक पहुँचने से पहले निश्चय ही आपको अपने भीतर ही कई कठिन बातों से जूझना होगा! सबसे पहले, जब इस बात का एहसास आपको होगा तो आप सोचेंगे कि अतीत में ऐसी कौन सी परिस्थितियाँ थीं, जब आप आवश्यकता से अधिक नकारात्मक हो गए थे। आप उन चर्चाओं के बारे में विचार करेंगे, जब सामने वाला अचानक अस्तव्यस्त और नाराज़ होकर आपसे दूर हो गया या जिससे आप बात कर रहे थे वह पहले तो बड़े उत्साह से आपसे बात कर रहा था मगर आपका उत्तर सुनकर अचानक बहुत दुखी हो गया। उस वक़्त भी आपने सामने वाले पर पड़ने वाले असर को नोटिस किया था मगर तब आपने सोचा था कि जो आपने कहा उसे कहा जाना अत्यंत आवश्यक था। अब आपको एहसास हो रहा है कि आपके द्वारा कही गई वह बात व्यर्थ और नकारात्मक थी! कितनी बार आप अपने मित्र की योजनाओं पर तुषारापात कर चुके हैं? कितनी बार आप अपने आप पर इतने दयार्द्र हुए हैं कि लोग आप से नाराज़ होकर बिदकने लगे?
आपको पछतावा है। आप बहुत पछतावा करते हैं। बहुत से दृश्य आपकी आँखों के सामने तैरने लगते हैं और आप पहले से भी ज़्यादा बुरा महसूस करते हैं। आप अपने नकारात्मक मूड में भी इतना बुरा महसूस नहीं करते थे क्योंकि तब आपको पता ही नहीं था कि आप इस नकारात्मकता की बीमारी से ग्रस्त हैं। बल्कि आप अपने पीड़ित होने के एहसास का मज़ा लेते थे! लेकिन अब आप उससे बाहर निकलने के लिए कटिबद्ध हैं और उसके असर को भी महसूस कर पा रहे हैं। यह गरल अब आपको पीना होगा। आपको उसे ध्यान से देखना होगा, याद रखना होगा-लेकिन तुरंत ही उससे भी बाहर निकलना होगा! आज नए तरीके से चीजों को ग्रहण करने की आपको शुरुआत करनी है और आपको सकारात्मक रहने के अपने निर्णय पर मजबूती के साथ डटे रहना होगा।
बस, इसी पल सकारात्मक तरीके से सोचना शुरू कर दीजिए: आज दिन भर के लिए और कल की योजनाओं के बारे में भी। उन लोगों के बारे में सकारात्मक सोचिए, जिनसे आप मिल चुके हैं और भविष्य में मिलने वाले हैं। अपनी सामान्य दिनचर्या को जारी रखिए, अपने कामों को त्यागने की ज़रूरत नहीं है, उन पर सिर्फ अपना नज़रिया बदलिये! अपने विचार बदलिये, मुंह से निकलने वाले अपने शब्दों में परिवर्तन लाइये!
इसमें कुछ वक़्त लगेगा क्योंकि यह एक ढीठ और जिद्दी आदत है लेकिन उसके विरुद्ध संघर्ष करके आप उसे बदल सकते हैं! कोई बात कहने से पहले अपने सकारात्मक सोच का दामन न छोड़ें, भले ही प्रतिक्रिया व्यक्त करने में आपको देर लगे। अपने सारे संदेह तुरत-फुरत व्यक्त करने की जगह समय लें और विचार करें कि हो सकता है, सामने वाले की कही हुए बात में या आपके सामने आए प्रस्ताव में कई सकारात्मक संभावनाएं मौजूद हो हों!
सबसे अधिक महत्वपूर्ण है सकारात्मक रवैया अपनाने के अपने निर्णय से पीछे न हटें। आपकी नकारात्मकता के आगे भी कई अवसर आ सकते हैं लेकिन अब आप, उनका एहसास होते ही, तुरंत क्षमा-याचना करने के काबिल हो गए हैं। इसे जारी रखें और परिवर्तन आपको नज़र आएगा, आपके मित्र भी इसे नोटिस करेंगे! सकारात्मक व्यवहार पर लोगों की प्रतिक्रिया बिल्कुल अलग होती है। वे भी सकारात्मक व्यवहार करते हैं। सकारात्मकता का पूरा नया संसार आपके सामने खुल जाता है! उसका स्वागत कीजिए! उसका मज़ा लीजिए!
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