नकारात्मक लोगों से घिरे होने पर क्या किया जाये? 21 नवंबर 2013

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

पिछले कुछ दिनों से मैं नकारात्मकता के बारे में लगातार लिख रहा हूँ और मुझे प्रतीत हो रहा है कि यह एक ऐसा रोग है, जिससे बहुत से लोग परेशान हैं-या तो इसलिए कि वे समझ गए हैं कि वे स्वयं इस बीमारी से ग्रसित हैं या वे तो सकारात्मक हैं मगर बहुत सारे नकारात्मक लोगों से घिरे हुए हैं। आप क्या करेंगे, जब अक्सर आपको यह अनुभव होता रहता है कि अकेले आप ही हैं जो जीवन के प्रति सकारात्मक रवैया रखे हुए हैं?

यह अच्छी स्थिति नहीं है। आप लंबी मुसकुराहट के साथ अपने सहकर्मी का अभिवादन करते हैं और बदले में आपको एक उदासीन बुदबुदाहट प्राप्त होती है। आप उत्साह के साथ मित्र के साथ छुट्टियाँ बिताने का प्लान बनाते हैं और मित्र कोई न कोई कारण बताकर आपके द्वारा प्रस्तावित तीन जगहों में से किसी पर भी सहमत नहीं होता। आप अपने परिवार को अपनी पसंद का नया सजावटी सामान दिखा रहे हैं, जिन्हें आप खरीदना चाहते हैं मगर परिवार वाले उसमें कोई रुचि प्रदर्शित नहीं करते, बल्कि जोरदार शब्दों में अपनी नापसंदी व्यक्त करते हैं। जब भी आप अपने साथी से कोई विचार साझा करना चाहते हैं, वह उसे अवास्तविक करार देते हैं और ऊपर से यह भी कहते हैं कि आपके विचार अब अप्रासंगिक हो चुके है।

यह आपको निराश कर सकता है। जहां भी आप जाते हैं, नकारात्मकता सामने खड़ी होती है। धीरे-धीरे आप महसूस करते हैं कि आपकी सकारात्मकता आपके हाथों से फिसलती चली जा रही है। आईने में आप अपनी मुस्कुराहट को क्रमशः फीका होता हुआ देखते हैं और अपनी भावनाओं और विचारों को दूसरों के साथ साझा करने में झिझकने लगते हैं और फिर पैर खींच लेते है; अपनी खोल को हटाकर एक ठंडी, नकारात्मकता ओढ़ लेते हैं, जिससे आपका बच्चों जैसा सरल, खुशदिल मिजाज आसपास के लोगों की नकारात्मकता से चोट न खाए।

अपने साथ ऐसा न होने दें! बाहरी, दूसरों से परावर्तित होकर आती हुई नकारात्मकता को अपनी सकारात्मकता नष्ट करने की इजाज़त देकर खुद दुखी न हों। लेकिन, सवाल यह है कि आप ऐसी हालत में क्या कर सकते हैं।

आप दूसरों की भावनाओं, कार्यों और प्रतिक्रियाओं पर नियंत्रण नहीं रख सकते। आप खुद अपने आपको देख सकते हैं, अपने कामों और भावनाओं पर नियंत्रण रख सकते हैं। यह मुश्किल लगता है लेकिन हर हाल में जैसे आप हैं, वैसे ही सकारात्मक बने रहें। साथ ही दूसरों को बार-बार इशारा करते रहें कि वे आपके साथ कैसा व्यवहार कर रहे हैं! नम्र और शांत बने रहें लेकिन जब आपको बार-बार यह बताया जाए कि हर वक़्त आपकी खुशी और सकारात्मकता उनकी समझ से बाहर है तो फिर उन्हें अवश्य साफ शब्दों में बताएं कि वे बार-बार आपको नीचा दिखा रहे हैं और आपकी सकारात्मकता उन्हें कभी भी पसंद नहीं आती। उनसे कहें कि क्या नकारात्मकता हर बात का जवाब हो सकता है। उन्हें एहसास दिलाएँ कि दो या अधिक का समूह किसी काम में एक साथ जुट जाएँ तो वह काम बेहतर ढंग से आगे बढ़ सकता है!

अपने कार्यालय में आपको कई बार नकारात्मक लोगों से व्यवहार करना पड़ता है और ऐसे शब्द उन पर कारगर होंगे, यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता लेकिन परिवार वाले और दोस्त अवश्य ही आपकी बातों पर गौर करेंगे। जो आपसे प्रेम करते हैं वे आपकी इन बातों को गंभीरता के साथ सुनेंगे और इस बात को समझेंगे कि उनके व्यवहार के कारण आप अवसाद-ग्रस्त हैं और इसीलिए आपने उनसे दूरी कायम कर ली है!

कोशिश करें कि उनके साथ ज़्यादा समय बिता सकें, जो समझ सकते हैं और स्वयं को बदलने के लिए तैयार हैं। अपने आपको ऐसे लोगों से जोड़ें, जो सकारात्मक रवैया अपनाते हैं और जो सकारात्मक लोगों के साहचर्य की आपकी ज़रूरत को समझते हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि आपको ऐसे कुछ लोगों से पीछा छुड़ाना ही होगा, जो पक्के नकारात्मक हैं-लेकिन आपकी चिंता करने वाले बहुत से लोग होंगे, जो आपका साथ पाकर न सिर्फ खुश होंगे बल्कि एक न एक दिन आपका शुक्रिया अदा करेंगे कि आपने उन्हें उनकी नकारात्मकता के अंधकार से बाहर निकाला!