नकारात्मक लोगों को नकारात्मकता फैलाने से कैसे रोकें? 23 जुलाई 2014

नकारात्मकता

अभी हाल ही में मेरा एक छोटा सा व्याख्यान हुआ था, जिसके साथ ध्यान योग का सत्र भी संलग्न था और मुझे ‘सकारात्मक रवैया’ शीर्षक विषय पर बोलना था। यानी दुनिया भर की नकारात्मक और निराशावादी खबरों के बीच और उससे भी अधिक हर तरफ निराशावादी लोगों से घिरे रहकर भी कैसे सकारात्मक रुख और आशावाद को बनाए रखा जा सकता है?

दरअसल, इस समस्या का पहला हल तो बहुत सरल है: किसी को भी इस बात कि इजाज़त न दें कि वह आपको प्रभावित कर सके, कोई आपको नीचा दिखा सके। मगर कैसे?

जहाँ तक दुनिया भर के बुरे समाचारों और खतरनाक और दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों का सम्बन्ध है, मेरे विचार से आपको यह बात समझनी चाहिए कि इस दुनिया में आपकी स्थिति एक अकिंचन की सी है और विभिन्न राष्ट्रों के आपसी युद्धों के लिए आप ज़िम्मेदार नहीं हैं। यह आपके प्रभाव-क्षेत्र से बाहर की बात है। वोट देकर और चैरिटी कार्यों में सहयोग करके अपना योगदान करें-सच्चाई के साथ अपना जीवन जिएँ और अपने आसपास की दुनिया को बेहतर बनाने का काम करें। इतना ही काफी है। आसपास के लोग कितने भी नकारात्मक हों, उनकी नकारात्मकता और उनके निराशावाद को अपने कामों के आड़े न आने दें!

यह अक्सर होता रहता है: आप अच्छे मूड में हैं और सामने वाले को अपने कार्यक्रमों के बारे में बताते हैं या फिर पूछते हैं कि क्या वह आपकी किसी योजना में सहभागी होना चाहेंगे। लेकिन ख़ुशी-ख़ुशी, उत्साहपूर्वक या प्रोत्साहित करते हुए आपकी बात का उत्तर देने की जगह वे अरुचिपूर्वक उसकी खामियाँ गिनाना शुरू कर देते हैं, यह बताने लगते हैं कि इस योजना में कैसे-कैसे खतरे, क्या-क्या समस्याएँ आएँगी। इसका नतीजा यह होता है कि आप अपने कार्यक्रम या योजना को लेकर हतोत्साहित हो जाते हैं, आपका मूड ख़राब हो जाता है और आप गमगीन हो उठते हैं और अब उनके बारे में, जो थोड़े समय पहले आपके लिए बहुत बहुमूल्य योजनाएँ थीं, सोचना ही छोड़ देते हैं!

मैं एक बात बताना चाहता हूँ: पूरी सम्भावना है कि सामने वाला आपके कार्यक्रम के उतना विरुद्ध भी नहीं है। वह सिर्फ आपका ज़्यादा से ज़्यादा ध्यान अपनी ओर खींचना चाहता है। सिर्फ आपका विरोध करके वह इसमें सफल हो जाता है। क्योंकि फिर आप उसे सहमत करने की कोशिश करने लगते हैं, आप उसके साथ अधिक से अधिक बात करते हैं, उसे समझाने की कोशिश करते हैं-अगर वह कह देता कि आपकी योजना से वह सहमत है या आपका विचार अच्छा है तो इतनी देर वह आपका ध्यान आकृष्ट नहीं कर सकता था!

स्वाभाविक ही, ऐसे भी कई लोग होंगे जिन्हें वाकई आपके विचार बहुत अच्छे न लगते हों और वे भी आपसे अपनी असहमति का इज़हार करते होंगे। लेकिन आप यह बात नोटिस करेंगे कि जब कोई व्यक्ति, चाहे आप कुछ भी कहें, आपकी हर बात के विरोध में ही बात करता है तो इसका अर्थ यह नहीं कि आपके सभी विचार बुरे हैं, आपकी हर बात गलत ही हो या आपकी सभी योजनाएँ किसी काम की न हों!

इसलिए उनकी बातों को ज़्यादा महत्व न देते हुए यह समझए कि उनके अपने अलग विचार हैं, जिसके अनुसार वे अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। इस बात का हमेशा ध्यान रखें और उनके प्रभाव में आकर आप खुद भी नकारात्मक रवैया अपनाने की जगह आशावादी बने रहें!

अगर ऐसा करने में आपको कोई दिक्कत पेश आ रही है या रात को बिस्तर पर पड़े-पड़े आप यही सोचते रहते हैं कि आज का दिन बड़ा खराब रहा और अब कल भी ऐसा ही बुरा गुज़रेगा तो मैं आपको एक टिप देता हूँ, उस पर अमल कीजिए: एक कागज़ लीजिए और उस पर पाँच ऐसी बातें लिखिए, जिनके कारण आपके चेहरे पर मुस्कान आ गई हो। सोने से ठीक पहले ऐसा कीजिए। जब भी आप नकारात्मक महसूस करें, अवसाद से घिर जाएँ, इस सूची को निकालकर पढ़ें, सोचें कि ऐसी अच्छी, मज़ेदार बातें भी आपके जीवन में होती रही हैं! साल भर बाद आपके पास ऐसी 1825 बातें होंगी, जिन पर आपको हँसी आई होगी-क्या आप अब भी यही सोचेंगे कि कि आपके जीवन में कभी खुशियाँ आई ही नहीं?

जब भी आपको लगे कि लोग आपके आसपास निराशा फैला रहे हैं, आपके मन में नकारात्मकता भर रहे हैं तब सकारात्मक और आशावादी बातों का ध्यान करें-वे दूसरे तब तक आपको निराश नहीं कर सकते, जब तक आप खुद उन्हें इसकी इजाज़त नहीं देते!

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