जब नकारात्मक लोग दूसरों की खुशियाँ छीन लेते हैं- 18 नवंबर 2013

नकारात्मकता

हम लोग अपने जीवन में हर तरह के इन्सानों से मिलते हैं. उनके चरित्र और जीवन के प्रति उनके दृष्टिकोण अलग-अलग होते हैं। उनमें कुछ संपूर्णतावादी होते हैं तो कुछ निराशावादी और कुछ बहुत प्रसन्नचित्त होते हैं। कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनका जीवन के प्रति और आसपास की हर चीज़ के प्रति दृष्टिकोण नकारात्मकता से परिपूर्ण होता है: मैं इन्हीं के विषय में आज लिखना चाहता हूँ।

जी हाँ, ऐसे लोग भी होते हैं, जो अपने द्वारा किए जा रहे किसी भी काम का या अपने आसपास होने वाली अच्छी से अच्छी घटनाओं का आनंद नहीं ले पाते। वे हर चीज़ के प्रति नकारात्मक रवैया अपनाते हैं और समस्याओं की खोज में ही लगे रहते हैं। मैं यह नहीं कहूँगा कि वे ऐसा सोच-समझकर करते हैं बल्कि उनकी फितरत होती है कि वे खुशियों की शुभ्र चादर में कोई काला धब्बा ढूंढ़ ही निकालें! और फिर वे आसपास उपस्थित सबका ध्यान उसी काले धब्बे की तरफ आकृष्ट करने की कोशिश करते हैं।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे दूसरे सभी लोगों पर असर डालते हैं। वे अपनी नकारात्मकता को दूसरों पर आरोपित करने में सफल हो जाते हैं और वे लोग भी उसी नकारात्मक नज़र से सारी बातों को देखना शुरू कर देते हैं!

आप जानते हैं कि हमारे आश्रम में साल भर बहुत से मेहमान आते रहते हैं। सैकड़ों लोग अब तक आ चुके हैं। एक ही परिस्थिति में, एक तरह की सुविधाओं के बीच, एक समान लोगों की देखरेख में 99 लोग ऐसे होते हैं, जो हर चीज़ से संतुष्ट होते हैं और यहाँ होने वाली हर गतिविधियों का मज़ा लेते रहते हैं और फिर एक ऐसा आता है, जो हर बात की शिकायत करता रहता है!

अब यह कोई खोजपूर्ण आंकड़ा नहीं है और हो सकता है कि दो-चार और लोग भी ऐसे होते हों मगर मुझे लगता है आप मेरी बात समझ रहे होंगे: उन्हें अपने परिवेश से कोई समस्या नहीं होती! दूसरे सभी ठीक उन्हीं परिस्थितियों में, ठीक उसी मौसम में, ठीक उसी ठंड या गर्मी में खुश और संतुष्ट होते हैं-बस ये नहीं होते! और जब ऐसा एक नकारात्मक व्यक्ति आपके समूह (ग्रुप) में होता है तो यह खतरा सदा मौजूद रहता है कि सारे समूह का माहौल खराब हो जाए।

जब आप अपने आपको ऐसी परिस्थिति में घिरा पाते हैं तो बड़ी परेशानी महसूस करते होंगे क्योंकि आपको सारे समूह को साथ लेकर चलना पड़ता है, जिससे सब कुछ ठीक-ठाक रहे और कोई अवांछनीय बात न होने पाए!

उस नकारात्मक व्यक्ति को लेकर आप कुछ ज्यादा नहीं कर सकते। आपको भी यह महसूस करना होगा कि ऐसी नकारात्मकता के पीछे बहुत सा दुख छिपा होता है और ऐसे लोगों को जीवन का आनंद उठाने के लिए अपने अंदर काफी बदलाव लाने की ज़रूरत है-मगर वे आपको अपने करीब भी आने नहीं देना चाहते कि आप कोशिश कर सकें। लेकिन आप आगे और क्षति न पहुंचे इसका ख्याल रख सकते हैं, उस नकारात्मकता के असर को दूर रख सकते हैं, कुछ संवेदनशील बातों को टाल सकते हैं और हंसी-खुशी में सबको (सारे समूह को) शामिल करने के तरीके ढूंढ़ सकते हैं।

जब भी आप ऐसा करें खुद सकारात्मक बने रहें! आपसे कोई गलती हुई है तो उसे तुरंत स्वीकार करें और खुद को और बेहतर बनाने की कोशिश करें क्योंकि ऐसे लोग आपकी छोटी से छोटी गलती की तरफ इशारा करके आपके सहायक भी सिद्ध हो सकते हैं। और यह भी कि गलती स्वीकार करते वक़्त यह एहसास भी दिलाएँ कि आप दरअसल अपनी गलती मान रहे हैं, न कि सिर्फ औपचारिकतावश सॉरी कह रहे हैं और ऐसा करते हुए भी पूरे समय सकारात्मक बने रहें! इस नकारात्मकता की खाई से बाहर निकलने के लिए लोगों को सिर्फ और सिर्फ थोड़ी सी सकारात्मकता की ज़रूरत है! वे नकारात्मकता में डूबे हुए हैं और आपकी यह सकारात्मकता उन्हें थामे रह सकती है!

और नकारात्मकता से भरे हुए लोगों से मैं यह विनती करूंगा कि वे देखेँ कि उनकी नकारात्मकता ने उन्हें कहाँ ला पटका है: आप न सिर्फ अपनी खुशी का खात्मा कर रहे हैं बल्कि अपने आसपास के लोगों की खुशियाँ भी नष्ट कर रहे हैं! आप उसका मज़ा नहीं ले पा रहे हैं-तो क्यों नहीं आप सोच-विचार करते, अपने मन को बदलने की कोशिश करते, मुस्कुराहट (सच्ची मुस्कराहट, वैसी नहीं जैसी आपके चेहरे पर अक्सर विराजमान रहती है) में सराबोर एक नए दिन की शुरुआत करते, और क्यों नहीं चीजों में त्रुटियाँ ढूढ़ने की जगह उनका आनंद उठाने की कोशिश करते?

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