नकारात्मकता पर ध्यान केन्द्रित करना आशावादी बने रहने में मदद करता है? मैं इससे सहमत नहीं! 24 जुलाई 2014

नकारात्मकता

कल मैंने संक्षेप में एक गुर बताया था कि कैसे आप लगातार सकारात्मक और आशावादी बने रह सकते हैं। आप रोज़ रात, सोने से पहले पाँच ऐसी बातें लिखिए, जिन्होंने उस दिन आपको हँसने पर मजबूर कर दिया हो। मेरे एक व्याख्यान के दौरान एक महिला ने मुझसे कहा कि इस गुर के बारे में उसने भी कहीं सुना था मगर उसमें दिन भर की पाँच नकारात्मक बातों को लिखने के लिए कहा गया था। उस महिला ने पूछा कि क्या मैं इस विचार को भी उतना ही कारगर समझता हूँ।

मैं सहमत नहीं था। लोगों का अवसाद दूर करने, उन्हें ख़ुशी प्रदान करने के लिए लोग बहुत से उपाय सुझाते हैं और इस बात से इनकार नहीं है कि उनमें से बहुत से कारगर भी होते होंगे। फिर भी मैं खुद तो नकारात्मक बातों की जगह सकारात्मक बातों को ही नोट करने की सलाह दूँगा। क्यों? जानने के लिए आगे पढ़िए।

दिन भर की नकारात्मक बातों को लिखने के पीछे मकसद यह है कि आप रात को उन पर अच्छी तरह गौर करने के बाद उन्हें भूल जाएँ, उन नकारात्मक बातों छुटकारा पा लें। लेकिन मुझसे जो पूछा गया था वह यह था कि सकारात्मक कैसे बने रहा जाए। सिर्फ नकारात्मक बातों को देखते रहने से तो आप इसका ठीक उल्टा कर रहे होते हैं: आप नकारात्मकता पर अपना ध्यान केन्द्रित कर रहे होते हैं। ऐसा करने पर आप उन्हीं बुरी बातों को जीने लगते हैं, आप ढूँढ़-ढूँढ़ कर उन लिखी हुई नकारात्मक बातों को, जिन्हें आप भूल भी चुके होते हैं, याद करने लगते हैं। एक बार जब आप यह शुरु करते हैं तो आपको अपनी गलतियाँ याद आती हैं, आप सोचने लगते हैं कि काश उस गलती की जगह कुछ अलग कर पाते, आदि आदि। बहुत ज़्यादा अफ़सोस, बहुत अधिक निराशा और खुद के बारे में एक तरह की अह्सासे कमतरी। आप ही बताइए, जब आप पूरे समय यही सब सोचेंगे तो फिर उन चीज़ों को भूलेंगे कैसे?

इसके विपरीत, मेरा दावा है कि इस तरह आप कभी भी उन बातों को भूल नहीं पाएँगे क्योंकि आप तो भूलने की जगह उन बातों का रट्टा लगा रहे हैं! समय हर ज़ख्म को भर देता है क्योंकि आपका मस्तिष्क धीरे-धीरे उन निराशाजनक अनुभवों को भुलाकर उनसे आपको सुरक्षा प्रदान करता है। लेकिन अगर आप उन बातों की खोज में ही लगे रहेंगे तो फिर वे अनुभव। आपके मन-मस्तिष्क में घर कर जाएँगे। जब आप उसी रात उन बातों को खोजने की कोशिश करेंगे तो वे निश्चय ही आपको तुरंत, आसानी के साथ मिल जाएँगी। फिर ऊपर से आप उन्हें नोट भी करेंगे कि आप उस दिन घटित उन सभी नकारात्मक बातों को हमेशा याद रखें! कि उन बुरी, अपमानजनक बातों को कभी न भूल पाएँ जो उस दिन दूसरों ने आपसे कहीं। कभी न भूलें कि आप गुस्सा क्यों हुए थे, दुखी क्यों हुए थे और किन बातों ने आपको अवसाद से भर दिया था!

क्या आप वाकई सोचते हैं कि इससे आप प्रसन्न रह सकते हैं?

मेरे ख्याल से कतई नहीं! और यही विचार उन सकारात्मक और आशाजनक बातों पर भी लागू होता है, जिन्हें आप नोट करते हैं। आप अच्छी बातों को ढूँढ़ते हैं, याद करते हैं कि आप किन बातों पर खुश हुए थे, आप हँसे क्यों थे, किन अनुभवों पर पुलक-प्रेम से भर उठे थे, आह्लादित हो उठे थे। जब आप दुखी होंगे और आपके पास मुस्कुराने का कोई कारण नहीं होगा तब वह लिखा हुआ आपको बार-बार उन सकारात्मक अनुभवों तक ले जाएगा, उन बातों की याद दिलाएगा।

जी हाँ, निश्चय ही मैं निराशा और अवसाद को दूर रखने की इस तकनीक का समर्थन करूँगा। नकारात्मक बातों पर अपने मस्तिष्क को केन्द्रित रखकर आप किसी भी तरह से आशावादी बने नहीं रह सकते-आपको जीवन की अच्छी बातों पर ध्यान केन्द्रित करना होगा!

Leave a Comment