घायल अथवा बीमार के साथ नका्रात्मक बातें न करें – 6 मार्च 13

सोमवार को मैं आपसे कह रहा था कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों मैं सकारात्मकता का साथ नहीं छोड़ता हूं, जैसे कि पिछले हफ्ते अपने दोस्त गोविंद के साथ घटी दुर्घटना के बाद भी सकारात्मक बना रहा। मैं इस बात में पूरा विश्वास करता हूं कि सकारात्मक विचार हमारी मदद करते हैं – खासकर ऐसी विकट परिस्थितियों में जब नकारात्मकता की गहरी खोह में गिरने की प्रबल संभावना रहती है। दुर्भाग्य से सभी लोग इस बात से सहमत नहीं होते या इस विचार को समझते नहीं हैं। पिछले सप्ताह गोविंद के साथ अस्पताल में बिताए दिनों के दौरान मैंने इसका साक्षात प्रमाण देखा।

बहुत सारे लोग गोविंद की मिजाज़पुर्सी के लिए आते हैं लेकिन मेरा मक़सद केवल एक ही रहता है उसे प्रसन्नचित्त रखना और उसके साथ समय बिताना। एक रिश्तेदार आया, दुर्घटना की कहानी सुनी और सिर हिलाते हुए दुखी स्वर में बोला, "अब तो तुम कभी दौड़ भाग नहीं कर पाओगे, कूद भी नहीं सकोगे", मैंने तुरंत इसका विरोध किया और बताया कि डॉक्टर ने ऐसा कुछ नहीं कहा है। उल्टे सर्जरी के बाद तो कुछ हफ्तों की फीजियोथैरेपी की मदद से वह बिल्कुल ठीक हो जाएगा। अगले दिन एक दूसरे सज्जन ने पूछा, "क्या तुम अब चल पाओगे?" एक महाशय तो कल भी अपनी राय प्रकट करते हुए कह रहे थे कि "अगर आपरेशन सफल न हो तो तुम्हारी टांग सीधी नहीं हो पाएगी। ऐसा भी हो सकता है कि यह हमेशा टेढ़ी ही रहे।"

एक महिला रिश्तेदार तो जितनी देर वहां रहती, उतनी देर बिसूरती ही रहती थी। आखिरकार मुझे कहना पड़ा कि ये नाटक कब तक चलता रहेगा? ऐसे मामलों मे मैं कोई संकोच नहीं करता / बड़ा मुंहफट हूं। इस तरह रोने का कोई कारण भी तो नहीं है। जो होना था वह हो गया और अगर यहां बैठकर आप इस तरह आंसू बहाते रहेंगें तो इससे गोविंद की कोई मदद नहीं होने वाली है। हां, इससे यहां बैठे सभी लोग दुखी और हो जाएंगें।

इन छोटी मोटी टिप्पणियों का मेरे दोस्त की मनःस्थिति पर कितना बुरा असर हुआ यह तब स्पष्ट नज़र आया जब उसने अगले दिन अपनी सूजी हुई टांग की तरफ देखते हुए अपने एक सहकर्मी से वेदनापूर्वक कहा, "पता नहीं अब मैं वापिस अपने काम पर जा पाऊंगा या नहीं।" मैंने उसे समझाया, "अरे, तुम ऐसे क्यों सोच रहे हो? तुम ठीक हो जाओगे। सब कुछ ठीक होगा और एक दिन ऐसा आयेगा जब तुम यह भी भूल जाओगे कि तुम्हारे साथ क्या हुआ था। यह सब भी तुम्हें तब याद आयेगा जब तुम किसी की टूटी हुई टांग के बारे में सुनोगे। तब तुम अपने आप से कहोगे, हां, मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ था!"

यह सब देखकर मुझे लगा कि अपने मित्र के पास रोज अस्पताल आने का मेरा निर्णय बिल्कुल सही रहा। उसके साथ समय बिताना अच्छा लगता है और इसके अलावा मैं उसे प्रसन्नचित्त और सकारात्मक रखने की कोशिश करता रहता हूं। मैं उसे उसे समझाता रहता हूं कि एक टांग ही तो टूटी है, यह मुश्किल भी खत्म हो जाएगी और वह वापिस भला चंगा हो जाएगा।

मैं आप सभी से अनुरोध करना चाहता हूं: अगली बार जब कभी भी आप किसी बीमार या घायल का हाल पूछने के लिए जाएं तो वहां बैठकर नकारात्मक बातें न करें। मुस्कराते रहें, मरीज़ को हौंसला दें, सकारात्मक रहें और बीमार को उम्मीद बंधाएं। यदि आप अपनी चिंताएं मरीज़ को बताने लगेंगें तो ऐसा करके आप पहले से ही पीड़ा भुगत रहे व्यक्ति की परेशानियों में इज़ाफा ही करेंगें।

यदि आप सकारत्मक रहेंगें तो मेरी तरह आप भी यह कह पाएंगें, "घबराओ मत, तुम बिल्कुल ठीक हो जाओगे।" कल गोविंद की सर्जरी हो गई और सब कुछ ठीकठाक निपट गया। अब उसकी टांग ठीक होने में बस थोड़ा सा समय और लगेगा और उसके बाद वह फिर से चलने का अभ्यास करने लगेगा।

Related posts

क्या करें जब आपको नकारात्मक लोगों की संगत में रहना पड़े? 4 नवंबर 2015

क्या करें जब आपको नकारात्मक लोगों की संगत में रहना पड़े? 4 नवंबर 2015

*स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि उस परिस्थिति से कैसे निपटें जब आपको किसी नकारात्मक व्यक्ति के साथ रहना पड़े। ...
जहाँ तक हो सके, नकारात्मक लोगों से दूर रहें - 3 नवंबर 2015

जहाँ तक हो सके, नकारात्मक लोगों से दूर रहें – 3 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु पाठकों को आगाह कर रहे हैं कि जो लोग हर समय नकारात्मक बने रहते हैं, उनसे दूर ही ...
जब कभी भी कुछ भी ठीक होता नज़र नहीं आता क्योंकि संतुष्टि भीतर से आती है - 2 नवंबर 2015

जब कभी भी कुछ भी ठीक होता नज़र नहीं आता क्योंकि संतुष्टि भीतर से आती है – 2 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु उनके बारे में अपने विचार लिख रहे हैं जो कभी संतुष्ट या खुश नहीं होते। बालेंदु जी के ...
आपका आसपास आपका आईना नहीं बल्कि परस्पर प्रभाव के साथ दोनों का अनुकूलन है - 12 अक्टूबर 2015

आपका आसपास आपका आईना नहीं बल्कि परस्पर प्रभाव के साथ दोनों का अनुकूलन है – 12 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि हम अपने आस-पड़ोस द्वारा प्रभावित होते हैं और बदले में हमारा आस-पड़ोस भी हमसे ...
क्या आपके 'जीवन का सबसे खराब समय' चल रहा है? उससे बाहर निकलिए! 9 सितंबर 2015

क्या आपके ‘जीवन का सबसे खराब समय’ चल रहा है? उससे बाहर निकलिए! 9 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे आप उन परिस्थितियों से बाहर निकल सकते हैं, जिसके कारण आपको वह समय ...
जब एक टिप्पणी आपको आश्चर्यचकित कर देती है क्योंकि वह घृणा से लबरेज है - 15 जनवरी 2015

जब एक टिप्पणी आपको आश्चर्यचकित कर देती है क्योंकि वह घृणा से लबरेज है – 15 जनवरी 2015

स्वामी बालेंदु अपने ब्लॉग पर आई एक टिप्पणी की चर्चा कर रहे हैं। टिप्पणी क्या कहती है और उस पर ...
नकारात्मकता पर ध्यान केन्द्रित करना आशावादी बने रहने में मदद करता है? मैं इससे सहमत नहीं! 24 जुलाई 2014

नकारात्मकता पर ध्यान केन्द्रित करना आशावादी बने रहने में मदद करता है? मैं इससे सहमत नहीं! 24 जुलाई 2014

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि क्यों वे नहीं सोचते कि रात को नकारात्मक बातों को लिखना आपको आशावादी बना ...
नकारात्मक लोगों को नकारात्मकता फैलाने से कैसे रोकें? 23 जुलाई 2014

नकारात्मक लोगों को नकारात्मकता फैलाने से कैसे रोकें? 23 जुलाई 2014

स्वामी बालेंदु अपने पाठकों को बता रहे हैं कि कैसे बहुत सारे नकारात्मक (निराशावादी) लोगों के बीच वे अपने आपको ...
नकारात्मक लोगों से घिरे होने पर क्या किया जाये? 21 नवंबर 2013

नकारात्मक लोगों से घिरे होने पर क्या किया जाये? 21 नवंबर 2013

स्वामी बालेंदु उन लोगों को कुछ सलाहें दे रहे हैं, जो समझते हैं कि वे बहुत सारे नकारात्मक लोगों से ...
क्या करें, जब आपको पता चले कि आपमें नकारात्मकता कूट-कूटकर भर गई है? 20 नवंबर 2013

क्या करें, जब आपको पता चले कि आपमें नकारात्मकता कूट-कूटकर भर गई है? 20 नवंबर 2013

स्वामी बालेंदु उन लोगों के लिए कुछ गुर बता रहे हैं, जो अपने अंदर मौजूद नकारात्मकता को पहचान गए हैं ...

Leave a Reply