यह 16 साल की बच्ची इतनी पार्टियाँ क्यों करती रहती है! 2 फरवरी 2014

सन 2006 में जब मैं आस्ट्रेलिया में था, मेरे एक व्यक्तिगत सत्र में एक महिला अपनी सोलह साल की लड़की को लेकर आई। वह अपने लिए नहीं, अपनी बेटी के लिए सलाह चाहती थी। लेकिन चीजों को देखने का लड़की का नज़रिया कुछ अलग था। मैं आपके सामने पूरी कहानी खोलकर रखता हूँ:

जब वे कमरे में आईं तो माँ-बेटी नहीं, आपस में बहनें लग रही थीं। दोनों ने मेकअप किया हुआ था मगर एक-दूसरे से विपरीत असर डालता हुआ: जब कि सोलह वर्षीय किशोरी लगभग उन्नीस या बीस की लग रही थी, उसकी माँ, जो चालीस के ऊपर होगी, 35 की लग रही थी। दोनों के कपड़ों का भी यही हाल था: फैशनेबल और शरीर की गोलाइयों को रेखांकित करते हुए। लेकिन उनके चेहरों के हाव-भाव से दोनों के बीच के सम्बन्धों का पता चल जाता था: माँ अपनी अनिच्छुक बेटी को बात करने के लिए लगभग मजबूर कर रही थी।

वे कमरे के भीतर आईं और मैंने तुरंत तय कर लिया कि मैं पहले माँ से कहूँगा कि वह बात कर ले और फिर लड़की से पूछूंगा कि क्या वह मुझसे अकेले में बात करना चाहेगी-एक दबंग माँ का बेटी के साथ होने वाले सलाह सत्र में उपस्थित होना बेटी को खुलने नहीं दे सकता था, विशेषकर एक किशोर बेटी का उसके सामने अपने मन की बात खुलकर कहना संभव नहीं था!

माँ ने समस्या को विस्तार के साथ सामने रखा: उसकी लड़की रोज़ ही पार्टियों में जाना पसंद करती है। उन पार्टियों में अक्सर वह ज़्यादा पी लेती है और रात में देर से घर आती है और कई बार तो सुबह तक उसका पता नहीं होता! इसके अलावा हमेशा वह अकेले नहीं आती, अपने साथ लड़कों को भी साथ ले आती है और फिर वे सब रात भर उनके यहाँ रहते हैं! माँ के अनुसार एक सोलह साल की किशोरी को यह व्यवहार शोभा नहीं देता! उसने अपनी बेटी के साथ कई बार इस विषय पर गंभीरता के साथ बात की, डांटा-डपटा, मना किया लेकिन उसने माँ की एक नहीं सुनी, न अपना रवैया बदला और अपनी मर्ज़ी के अनुसार करती रही, इस तरह उसने माँ का अपमान भी किया।

मैंने किशोर बच्चों में यह समस्या अक्सर देखी है, विशेषकर पश्चिमी देशों में। उनकी जीवन पद्धति और उसके चलते उनके अभिभावकों को होने वाली परेशानियों को भी मैंने नजदीक से देखा है। जैसा कि मैंने तय किया था, माँ से बात करने के बाद मैंने उससे कहा कि अपनी लड़की को वहीं छोड़कर वह कुछ देर बाहर बैठे। जब वह बाहर चली गई, वही कहानी लड़की के नज़रिये से मेरे सामने आई।

कहानी बहुत साधारण थी: "मेरी माँ वही सब कुछ खुद भी करती है! जब वह करती है तब ठीक है और जब मैं करती हूँ तो उसे गलत लगता है, क्यों?"

तो यह बात है! उसकी बात मुझे अच्छी तरह समझ में आ गई और लगा कि सलाह की आवश्यकता इस किशोर बेटी को नहीं, उसकी माँ को है।

अगले सप्ताह मैं आपको बताऊंगा कि उसकी माँ से मैंने क्या कहा।

Related posts

जब पिता ज़िंदा होकर भी मेरे नहीं थे…

जब पिता ज़िंदा होकर भी मेरे नहीं थे…

पिता पुत्र का वो रिश्ता, जो जीते-जी मर गया मेरे पिता का देहांत हो गया। मुझे यह समाचार भारत में ...
पिता के साथ मेरा सम्बन्ध

पिता के साथ मेरा सम्बन्ध

जब पिता कह दे कि मैं मर गया तेरे लिए! कल्पना करें मेरी उस मानसिक दशा की जबकि मैं बाप ...
जीवन का नया अध्याय, चुनौतियाँ और सबक

जीवन का नया अध्याय, चुनौतियाँ और सबक

मैं भी उनमें से एक हूँ. 7 साल पहले भारत छोड़ के चला गया. वहाँ व्यापार करता था और टैक्स ...
11 साल की उम्र में यौन शोषण की शिकार मेरी बहन को न बचा पाने की ग्लानि 

11 साल की उम्र में यौन शोषण की शिकार मेरी बहन को न बचा पाने की ग्लानि 

मेरी एक ही छोटी बहन थी परा, आज से 17 साल पहले जर्मनी के लिए एयरपोर्ट आते हुए कार दुर्घटना ...
भारत में मेरे परिवार ने मेरी पीठ में छुरा घोंपा है

भारत में मेरे परिवार ने मेरी पीठ में छुरा घोंपा है

बालेंदु लिख रहे हैं कि उन्होंने चैरिटी संस्था से इस्तीफा क्यों दिया और उनके परिवार ने उन्हें पैसे और संपत्ति ...
Apra

दुनिया भर के राजाओं की एक सी रुचियाँ: पैसा, युद्ध और औरतें – 17 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु अपनी पारिवारिक जयपुर यात्रा के बारे में लिख रहे हैं, जहाँ उन्होंने प्राचीन राजा-महाराजाओं के महलों, किलों और ...
अपरा का चौथा जन्मदिन समारोह - 10 जनवरी 2016

अपरा का चौथा जन्मदिन समारोह – 10 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु अपरा के चौथे जन्मदिन के समारोह का वर्णन कर रहे हैं, जिसे उसके जन्मदिन यानी कल, 9 जनवरी ...
कैनेडियन योग दल

हमें घनिष्ट रूप से जुड़ना पसंद है – एक कैनेडियन योग दल का आश्रम आगमन – 13 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे सारे आश्रम ने एक कैनेडियन दल के साथ बेहद सुखद और व्यस्त समय ...
जर्मनी के खूबसूरत दौरे से भारत वापसी - 6 दिसंबर 2015

जर्मनी के खूबसूरत दौरे से भारत वापसी – 6 दिसंबर 2015

भारत लौटकर स्वामी बालेंदु पिछले हफ्ते की अपनी पारिवारिक जर्मनी यात्रा का संक्षिप्त ब्यौरा प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसमें उनकी ...
जर्मनी में हमारी मौज-मस्ती - 29 नवंबर 2015

जर्मनी में हमारी मौज-मस्ती – 29 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपनी पत्नी और बेटी के साथ जर्मनी में बिताए दूसरे सप्ताह का विवरण लिख रहे हैं। उनके रोमांचक ...

Leave a Reply