सन 2006 में जब मैं आस्ट्रेलिया में था, मेरे एक व्यक्तिगत सत्र में एक महिला अपनी सोलह साल की लड़की को लेकर आई। वह अपने लिए नहीं, अपनी बेटी के लिए सलाह चाहती थी। लेकिन चीजों को देखने का लड़की का नज़रिया कुछ अलग था। मैं आपके सामने पूरी कहानी खोलकर रखता हूँ:
जब वे कमरे में आईं तो माँ-बेटी नहीं, आपस में बहनें लग रही थीं। दोनों ने मेकअप किया हुआ था मगर एक-दूसरे से विपरीत असर डालता हुआ: जब कि सोलह वर्षीय किशोरी लगभग उन्नीस या बीस की लग रही थी, उसकी माँ, जो चालीस के ऊपर होगी, 35 की लग रही थी। दोनों के कपड़ों का भी यही हाल था: फैशनेबल और शरीर की गोलाइयों को रेखांकित करते हुए। लेकिन उनके चेहरों के हाव-भाव से दोनों के बीच के सम्बन्धों का पता चल जाता था: माँ अपनी अनिच्छुक बेटी को बात करने के लिए लगभग मजबूर कर रही थी।
वे कमरे के भीतर आईं और मैंने तुरंत तय कर लिया कि मैं पहले माँ से कहूँगा कि वह बात कर ले और फिर लड़की से पूछूंगा कि क्या वह मुझसे अकेले में बात करना चाहेगी-एक दबंग माँ का बेटी के साथ होने वाले सलाह सत्र में उपस्थित होना बेटी को खुलने नहीं दे सकता था, विशेषकर एक किशोर बेटी का उसके सामने अपने मन की बात खुलकर कहना संभव नहीं था!
माँ ने समस्या को विस्तार के साथ सामने रखा: उसकी लड़की रोज़ ही पार्टियों में जाना पसंद करती है। उन पार्टियों में अक्सर वह ज़्यादा पी लेती है और रात में देर से घर आती है और कई बार तो सुबह तक उसका पता नहीं होता! इसके अलावा हमेशा वह अकेले नहीं आती, अपने साथ लड़कों को भी साथ ले आती है और फिर वे सब रात भर उनके यहाँ रहते हैं! माँ के अनुसार एक सोलह साल की किशोरी को यह व्यवहार शोभा नहीं देता! उसने अपनी बेटी के साथ कई बार इस विषय पर गंभीरता के साथ बात की, डांटा-डपटा, मना किया लेकिन उसने माँ की एक नहीं सुनी, न अपना रवैया बदला और अपनी मर्ज़ी के अनुसार करती रही, इस तरह उसने माँ का अपमान भी किया।
मैंने किशोर बच्चों में यह समस्या अक्सर देखी है, विशेषकर पश्चिमी देशों में। उनकी जीवन पद्धति और उसके चलते उनके अभिभावकों को होने वाली परेशानियों को भी मैंने नजदीक से देखा है। जैसा कि मैंने तय किया था, माँ से बात करने के बाद मैंने उससे कहा कि अपनी लड़की को वहीं छोड़कर वह कुछ देर बाहर बैठे। जब वह बाहर चली गई, वही कहानी लड़की के नज़रिये से मेरे सामने आई।
कहानी बहुत साधारण थी: "मेरी माँ वही सब कुछ खुद भी करती है! जब वह करती है तब ठीक है और जब मैं करती हूँ तो उसे गलत लगता है, क्यों?"
तो यह बात है! उसकी बात मुझे अच्छी तरह समझ में आ गई और लगा कि सलाह की आवश्यकता इस किशोर बेटी को नहीं, उसकी माँ को है।
अगले सप्ताह मैं आपको बताऊंगा कि उसकी माँ से मैंने क्या कहा।
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