मैं पुनः कभी दक्षिण अफ्रीका क्यों नहीं जाऊँगा? 19 अक्टूबर 2014

सन 2006 में अपनी बहन के विछोह और दुःख के साए में हमारा समय कटता रहा। एक सीमा के बाद लगने लगा कि हमारे सारे आँसू बहकर निकल चुके हैं। मैं और यशेंदु उसके बाद एक माह या शायद उससे कुछ अधिक भारत में ही रहे और उसके बाद अपनी-अपनी हवाई यात्राओं पर निकल पड़े। वह जर्मनी चला गया और मैं वापस दक्षिण अफ्रीका की ओर निकल पड़ा।

बहन के अपघात से पहले दक्षिण अफ्रीका में मैं सिर्फ कुछ दिनों के लिए ही रहा था। वह दक्षिण अफ्रीका का बल्कि अफ्रीका का ही मेरा पहला दौरा था-और आज तक का वह पहला दौरा ही बना हुआ है। मैं नहीं कह सकता कि मैंने उसे ज़्यादा पसंद किया था।

जोहंसबर्ग में मैं अपने व्यक्तिगत-सत्र आयोजित करता रहा, व्याख्यान भी दिए और कुछ कार्यशालाएँ भी आयोजित कीं। इस कारण मैं भारतीयों के यहाँ तो रहता ही रहा लेकिन कुछ गैर भारतीय दक्षिण अफ्रीकियों से भी मेरा संपर्क हुआ। स्वाभाविक ही मेरे बाकी के कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए थे लेकिन मेरे आरक्षित टिकिटों के कारण, जो दक्षिण अफ्रीका से भारत और भारत से वापसी के टिकिट थे, मुझे उस देश में दो दिन और रुकना था।

मुझे बहुत अच्छा कतई नहीं लग रहा था। मैं अशांत और असुरक्षित महसूस कर रहा था। हर जगह, जहाँ मैं रुका हुआ था और जहाँ भी मैं गया, बिना किसी अपवाद के सभी मकानों में तारों की बड़ी-बड़ी बाड़ें या दीवारें खड़ी की गई थीं और उनके ऊपर सुरक्षा हेतु काँटेदार तार बिछाए गए थे और मुझे बताया गया कि अधिकतर इन तारों में बिजली का करंट भी प्रवाहित कर दिया जाता था, जिससे अनधिकृत प्रवेश करने वालों को बिजली का झटका लगे।

मैंने अपने प्रायोजकों से पूछा कि क्या वहाँ बहुत अधिक अपराध होते हैं तो उन्होंने बताया- और जिसकी बहुत से दूसरे लोगों ने भी ताईद की- कि वहाँ अपराधों की संख्या खतरनाक रूप से बहुत ज़्यादा है! एक परिवार ने, जिसने मुझे भोजन के लिए आमंत्रित किया था, बताया कि सिर्फ दो-तीन माह पहले ही सारे सुरक्षा इंतजामों के बाद भी अपराधियों ने उनका ऑफिस लूट लिया था।

स्वाभाविक ही, ऐसी बातों का बखान करते वक़्त लोग कुछ बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं लेकिन जब भी मैं बाहर निकलता, यह बात मेरे दिमाग में बनी रहती। सिर्फ मोबाइल के लिए कोई आपकी जान भी ले सकता है। या पाँच डॉलर जेब में रखकर बाहर निकलना भी खतरे से खाली नहीं है।

मुझसे कहा गया कि शाम के वक़्त, बाहर अँधेरे में पैदल घूमने न निकलूँ। सिर्फ दिन में और वह भी सिर्फ सुरक्षित इलाकों में ही आप पैदल घूम सकते हैं- और बेहतर हो, अगर कार का उपयोग करें। मुझे याद आया मेरे दो दोस्तों ने बताया था कि वे वहाँ छुट्टियाँ बिताने गए थे और इसी तरह उन्हें लूट लिया गया था। मैं जानता था कि बहुत से लोगों को दक्षिण अफ्रीका बहुत पसंद आता है और वे पर्यटन के लिए यहाँ जाते हैं।

लेकिन मुझे वहाँ बिल्कुल अच्छा नहीं लगा। एक ऐसी जगह, जहाँ हर वक़्त खतरा आपके दिमाग पर हावी हो और आपका बाहर निकलकर पैदल घूमना-फिरना भी मुहाल हो। तो फिर ऐसी जगह दोबारा क्यों जाया जाए, जहाँ आप सुरक्षित महसूस नहीं करते? जहाँ आपको लगे कि अपनी सुरक्षा को लेकर हर वक़्त चौकन्ना रहना होगा?

किसी तरह दो दिन और गुज़ारकर मैंने उस जगह से बिदा ली और जर्मनी के लिए हवाई जहाज़ पकड़ा!

मुझे दक्षिण अफ्रीका आने का निमंत्रण बाद में फिर मिला मगर मैंने इंकार कर दिया। मेरे लिए एक बार का अनुभव ही बहुत था।

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