पुरुषों के साथ अनुभव लेने के बाद बहुत सी महिलाएँ समलैंगिक क्यों हो जाती हैं! 11 मई 2014

पिछले हफ्ते मैंने आपको सन 2006 में समलैंगिकों के लिए आयोजित कार्यशाला के बारे में बताया था। जिस महिला ने वह कार्यशाला आयोजित की थी, वह समलैंगिक थी। उसने मुझे बताया कि पहले वह शादीशुदा थी मगर अपने पति से तलाक हो जाने के बाद अब वह सिर्फ महिला साथियों के साथ हमबिस्तर होती है। वह अकेली महिला नहीं थी, जिसने मुझे ऐसी कहानी सुनाई थी या जिसने मुझपर यह तथ्य उजागर किया था। लेकिन तुलनात्मक रूप से बहुत कम समलैंगिक पुरुषों ने अपने इस तरह के अनुभवों का ज़िक्र किया। आज मैं इस विषय पर महिलाओं के सन्दर्भ में बात करूंगा- पुरुषों के साथ सम्बन्ध कायम हो जाने के बाद भी क्यों महिलाएँ दूसरी महिलाओं के प्रति आकर्षित होती हैं जबकि पुरुषों के मामले में यह बहुत कम सुनाई पड़ता है?

जैसा कि मैं पहले ज़िक्र कर चुका हूँ, उस समय तक बड़ी संख्या में समलैंगिकों के साथ मेरी मुलाकातें हो चुकी थीं। मैं हजारों की तादात में व्यक्तिगत-सत्र ले चुका था और मैं मानता हूँ कि अधिकांश समलैंगिक आध्यात्मिक विषयों में काफी रूचि रखते हैं-शायद इसलिए कि सिर्फ समलैंगिक होने के कारण पहले ही वे वैचारिक रूप से मुख्यधारा के लोगों से 'अलग' होते हैं। तो, मेरे बहुत से व्यक्तिगत-सत्रों में से कई इन समलैंगिक पुरुषों और महिलाओं के साथ हुआ करते थे। और इन महिला समलैंगिकों में से बहुतों ने मुझसे कहा कि पहले उनके सम्बन्ध पुरुषों के साथ भी रह चुके हैं।

इस तरह मुझे बहुत सी समलैंगिक महिलाओं से मिलने का मौका मिला, खासकर उम्र की चौथी दहाई में प्रवेश कर चुकी महिलाओं से, जिनके वयस्क बच्चे भी थे। जर्मनी, आयरलैंड, आस्ट्रेलिया और बहुत से दूसरे देशों में। उनमें से कुछ उभयलिंगी (बायसेक्सुअल) थे और कहते थे कि इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता था कि उनका साबका किसी पुरुष से है या महिला से! चाहे एक रात का सम्बन्ध हो या दीर्घकालीन, वह पुरुष या महिला किसी से भी हो सकता था।

क्या महिलाओं का यह व्यवहार पूरी तरह समझ में आने वाला है क्योंकि एक खास उम्र के बाद उन्हें सिर्फ प्रेम और स्नेह की आवश्यकता होती है, जो उन्हें पुरुषों से प्राप्त नहीं हो पाता और वे समलैंगिक महिलाओं की ओर रुख कर लेती हैं? क्या वे जानती हैं कि पुरुषों के साथ हुए कटु अनुभव के बाद कोई महिला ही यह ज़्यादा अच्छी तरह समझ सकती हैं कि इस दौरान उन्हें क्या-क्या भुगतना पड़ा है और किसी पुरुष के मुकाबले एक महिला ही उनके प्रति ज़्यादा संवेदनशील हो सकती है? या क्या महिलाओं में बड़ी संख्या में समलैंगिकता का रुझान उनका जन्मजात गुण है?

मेरा विश्वास है- और कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों के परिणामों के बारे में मैंने पढ़ा है, जो मेरे इस विश्वास को सत्य सिद्ध करती हैं- कि समलैंगिकता मनुष्य के जींस में ही मौजूद होती है। मैं वैज्ञानिक नहीं हूँ और इसका विस्तृत विवरण प्रस्तुत नहीं कर पाऊँगा मगर उस अध्ययन का निष्कर्ष यह था कि यह किसी महिला की व्यक्तिगत इच्छा पर निर्भर नहीं है कि वह एक महिला को पुरुष से ज़्यादा आकर्षक पाती है। या इसके विपरीत, कोई पुरुष किसी दूसरे पुरुष को महिला से ज़्यादा आकर्षक पाता है तो वह भी उस पुरुष की व्यक्तिगत इच्छा का प्रश्न नहीं है।

मुझे लगता है कि इसका कारण महिलाओं की सामान्य अनुभूतियों और उनकी प्रतिक्रियाओं और उनके प्रति समाज के आम व्यवहार और उसकी कार्यप्रणाली में निहित है। महिलाएँ अपने वातावरण, माहौल और परिस्थितियों के चलते विवाह करके स्थापित होने और बच्चे पैदा करने का दबाव महसूस करती हैं। और अनजाने ही वे इस दबाव के सामने समर्पण कर देती हैं। इस तरह वे अपनी भावनाओं का दमन करते हुए वही करती हैं, जिसकी समाज को उनसे अपेक्षा होती है।

और यह भी नहीं है कि अचानक एक विशेष दिन कोई किशोर लड़की सोकर उठे और अनुभव करे कि वह समलैंगिक है। यह संभव है कि वह अपनी सहेलियों की तरफ आकृष्ट हो मगर यह न समझ पाए कि यह पूरी तरह सामान्य बात है। यह संभव है कि वह यह न समझ पाए कि क्यों नहीं वह दूसरी महिलाओं की तरह अपने पति की ओर आकृष्ट नहीं है। लेकिन जब वे समाज के दबावों से मुक्त होती हैं तब वे वाकई बंधन-मुक्त हो जाती हैं। और तभी अपनी वास्तविक यौन संबंधी प्राथमिकताओं (orientation) के अनुसार वे अपना निर्णय ले पाती हैं।

कितनी समलैंगिक महिलाओं के पुरुषों के साथ वर्षों यौन सम्बन्ध रहे, इसे जानने के बाद 2006 में मैं इस नतीजे पर पहुंचा था। अगले सप्ताह मैं पुरुष समलैंगिकों और उनके द्वारा अपनी यौन प्राथमिकताओं या पसंद-नापसंद को कार्यरूप में परिणत करने के तरीकों पर अपने विचार रखूँगा।

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