जब स्वयं को प्रबुद्ध समझने वाले व्यक्ति असंवेदनशील बन जाते हैं! 2 नवम्बर 2014

मैंने आपको बताया था कि 2006 में मेरी बहन की मृत्यु के बाद मुझे अपने मित्रों की ओर से बड़ा संबल मिला था। हालाँकि आपका दुःख वास्तव में कोई कम नहीं कर सकता मगर इस दुःख में यदि कोई ढाढ़स बंधाने वाला हो, प्यार से गले लगाने वाला हो, कोई मित्र हो, जो आपके कंधे पर अपना सांत्वना भरा हाथ रख सके तो यह बड़े सौभाग्य की बात होती है। लेकिन ऐसे लोग भी थे, जिन्होंने हमसे संपर्क तो किया मगर उनका मकसद हमें ढाढ़स बंधाना नहीं था, जबकि मैं उन्हें अपना मित्र समझता था।

मुझे ऐसा ही एक ईमेल प्राप्त हुआ था। वह एक महिला की ओर से था, जिसे मैं अपना बहुत अच्छा मित्र समझता था, हालांकि उसके बारे में मुझे यह एहसास हो चुका था कि, वह बहुत ही ऐजोटेरिक भूत-प्रेत और हवा-हवाई बातों में विश्वास करने वाली महिला है। वह उन बातों पर भरोसा करती थी, जो मेरे हिसाब से अत्यंत अविश्वसनीय थीं और क्योंकि वह दूसरों को उन बातों पर सहमत करने के लिए उतावली भी रहती थी और जिसे अकसर लोग बिलकुल बर्दाश्त नहीं करते थे, मैंने भी उससे कुछ दूरी बना ली थी।

इस महिला के ईमेल में उसने शुरुआत तो बहन, परा की मृत्यु पर शोक-संवेदना से की थी मगर बाद में उसने लिखा था कि उसे एक सपना आया है। उसे यह सपना आया था कि परा अपने कथित कर्मों के चलते दो लोकों के बीच भटक रही है, कुछ पाप, जिनका प्रायश्चित वह, अपनी असामयिक मृत्यु के कारण, इस लोक में अपने जीवन में नहीं कर पाई है, उसकी आत्मा दो लोकों के बीच कहीं अटक गई है।

क्या आप इस पर विश्वास कर सकते हैं? इस पर कि किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसने अभी-अभी अपनी बहन को खोया है और गहन दुख में डूबा हुआ है, कोई इस प्रकार का ईमेल भेज सकता है? यह बात कौन सुन सकता है कि उसकी अभी-अभी मृत बहन जैसे शुद्धिकरण के लिए कहीं पड़ी हो और उसे यातना झेलनी पड़ रही हो, एक तरह की ब्लैकमेलिंग कि आप कोई कर्मकांड कर लें, जिससे मृत आत्मा को शांति मिल सके?

मैंने उसे उसे तुरंत जवाब भेजा, और मुझे ठीक-ठीक याद नहीं है कि मैंने क्या लिखा था, लेकिन लगता है कि मैंने उसे मेरी आत्मा या मेरे परिवार के किसी सदस्य की आत्मा के विषय में चिंतित न होने के लिए लिखा था। संभव है, उसका अर्थ अच्छा ही रहा हो, मगर उसने जो लिखा था वह किसी शोक-संतप्त व्यक्ति से कहने की बात नहीं थी!

कुछ लोगों को यह पता ही नहीं होता कि व्यावहारिकता, समझदारी और संवेदनशीलता किस चिड़िया का नाम है, कि उनके किस व्यवहार से दूसरों की भावनाएँ आहत हो सकती हैं। एक और महिला एक बार आश्रम आई। हम एक-दूसरे को बहुत समय से जानते थे। जब वह आश्रम से बिदा लेने लगी तो विमान-तल जाने के लिए टॅक्सी में बैठते ही उसने ड्राईवर से सीट-बेल्ट के बारे में तफतीश की। क्योंकि भारत में अक्सर कोई भी सीट बेल्ट नहीं बांधता, उसे सीट कवर के नीचे कुछ देर सीट-बेल्ट ढूँढ़ना पड़ा। और फिर सीट बेल्ट बांधते हुए उसने हमसे कहा, "मैंने आपके अनुभव से ही सीखा है!" और चल दी।

सीट-बेल्ट बांधने के बाद भी मेरी बहन या कोई भी कार में उस तरफ बैठा हुआ व्यक्ति बच नहीं सकता था। इस तथ्य के बावजूद कोई मित्र इस तरह की बात नहीं करता। कहने की ज़रूरत नहीं, हम लोग अब दोस्त नहीं रह गए हैं।

इस तरह मैंने जाना कि आपका बुरा समय भी आपको स्पष्ट बता देता है कि कौन आपका मित्र है और कौन नहीं।

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