नग्नता से अधिक नैसर्गिक और क्या हो सकता है? 7 सितम्बर 2014

मैं आपको पहले ही बता चुका हूँ कि सन 2006 में अपने स्वीडन प्रवास के दौरान आयोजित आध्यात्मिक उत्सव में मुझे कई लाजवाब दोस्तों से मुलाकात का मौका मिला। उनमें एक स्वीडिश दम्पति भी थे, जिन्होंने अपनी एक कार्यशाला आयोजित की थी और जो मेरी कई कार्यशालाओं में सहभागी हुआ करते थे। उस उत्सव के दर्मियान और बाद में भी उन्हें बेहतर ढंग से जानने का मुझे काफी मौका मिला। उस शानदार गर्मियों के बारे में आपको कुछ और विस्तार से बताना चाहता हूँ।

यह दम्पति मेरी तरह कार्यशालाएँ आयोजित करते थे मगर तरह-तरह के बहुत से विषयों पर। मैं उन्हें कभी बच्चों के साथ चित्रकारी करते देखता, कभी सहभागियों को नग्न शरीरों पर चित्रकारी करना सिखाते हुए और मुझे यह भी पता चला कि वे यौनिकता पर व्याख्यान भी दिया करते थे। मेरी कुछ कार्यशालाओं में आकर वे उनमें सक्रिय हिस्सा लेते और उनका पूरा लुत्फ़ उठाते।

कार्यक्रमों से अवकाश मिलने पर कभी-कभी हमें बात करने का मौका भी मिल जाता और कुछ समय बाद ही हम एक-दूसरे को बेहतर जानने लगे। वह फोटोग्राफर भी था और उसने मुझे बताया कि पिछले बीस सालों में एक भी दिन ऐसा नहीं गुज़रा जब उसने किसी न किसी चीज़ का कोई फोटो न लिया हो। अपनी कला के प्रति उसके समर्पण से मैं बहुत प्रभावित हुआ! उत्सव में भी वह फोटो लेता रहा था और बाद में मेरे भी कुछ फोटो लिए।

जब उन्होंने मुझसे पूछा कि उत्सव के समापन के बाद मेरा क्या कार्यक्रम है तो मैंने उन्हें बताया कि कुछ दिन मैं अवकाश पर हूँ और अगले हफ्ते तक यहीं रहूँगा और उसके बाद ही जर्मनी लौटूँगा। उन्होंने तुरंत मुझे अपने यहाँ, स्टॉकहोम आमंत्रित कर लिया, वह भी मेरे साथी संगीतज्ञ के साथ।

स्वाभाविक ही मैंने उनका आमंत्रण स्वीकार कर लिया और उत्सव समाप्त होते ही हम उनकी कार में बैठकर सीधे उनके घर, स्टॉकहोम की ओर रवाना हो गए।

उन्होंने मुझे घुमाया-फिराया, अपने कुछ दोस्तों से मिलवाया और इस देश को और करीब से जानने का मौका पाकर मैं बड़ा खुश हुआ! उत्सव के नैसर्गिक वातावरण के बाद मुझे अपेक्षा थी कि मैं फ्रैंकफर्ट जैसे किसी बड़े शहर जा रहा हूँ क्योंकि स्टॉकहोम स्वीडन की राजधानी है। लेकिन अपेक्षा के विपरीत मैं एक शांत मगर बहुत ही खूबसूरत जगह पर पहुँच गया था।

और सबसे बड़ी बात, यहाँ भी प्रकृति के इतना करीब! गर्मी के उस मौसम में मेरे मित्रों ने तैराकी का मज़ा लेने का कार्यक्रम तय किया। दस मिनट के भीतर हम सब बीच शहर से जंगल के प्राकृतिक वातावरण में पहुँच गए, जहाँ मेरे संगीतकार, मेरे मित्र दम्पति और उनके एक मित्र के सिवा कोई भी दिखाई नहीं देता था। हम जंगल के बीचोंबीच स्थित एक झील के किनारे पहुँच गए। हर तरफ चारों ओर हरियाली थी और सन्नाटा पसरा था।

मेरे मित्र तुरंत झील के बिल्कुल किनारे पहुँचे, अपने कपड़े उतारे और पानी में कूद पड़े। वहाँ पूरी तरह नंगे होकर तैरना उनके लिए इतनी सामान्य बात थी कि उसके बारे में उन्होंने दूसरी बार नहीं सोचा। बड़ी सहजता से सभी कपड़े उतारे और पानी में कूद पड़े! और उन्हें इतनी स्वाभाविकता से यह करते देख मुझे लगा कि यहाँ ज़्यादा संकोच करना या शर्म दिखाना हास्यास्पद होगा! तो मैंने भी जो कुछ भी मेरे शरीर पर था उतार फेंका और कूद पड़ा झील के साफ, शीतल जल में और बहुत देर तक उनके साथ नहाता रहा।

मेरा भारतीय संगीतज्ञ संकोच करता रहा और चड्डी पहने ही पानी में उतरा और ज़्यादा गहराई तक हमारे साथ नहीं आया क्योंकि वह तैरना नहीं जानता था।

पानी में तैरने का मेरे जीवन का वह सबसे अद्भुत अनुभव था! चारों तरफ निस्तब्धता व्याप्त थी और हम प्रकृति के साथ अठखेलियाँ कर रहे थे। दूसरा देखने-सुनने वाला लोई न था!

साधारणतया मैं उन लोगों में से नहीं हूँ जो न्यूडिस्ट बीचों पर सैर करना पसंद करते हैं। हालाँकि मैंने ऐसे बीच बहुत देखे हैं मगर वहाँ जाकर निःसंकोच अपने कपड़े उतारना मुझे रास नहीं आता। लेकिन यहाँ मामला कुछ दूसरा ही था! यहाँ ‘न्यूड बीच’ का कोई संकेतक नहीं लगा था और न ऐसी कोई हिदायत थी की आपको इस सीमा तक नंगा होना है या इस तरह नहाना या तैरना है और अगर कुछ पहनना ही है तो क्या पहनना है। सब कुछ प्राकृतिक था, पूरी तरह खुला और मुक्त!

डेनमार्क की इस यात्रा में मैंने जाना कि साधारणतया स्केण्डीनेवियन देशों के निवासी अधिक प्राकृतिक हैं और अपनी नग्नता को लेकर अधिक खुले और आज़ाद। मेरे लिए यह अनुभव चिर अविस्मरणीय रहेगा!

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