हवाई जहाज़ में मुख-मैथुन – 6 अप्रैल 2014

पिछले हफ्ते मैंने आपको बताया था कि भारत के बाहर की अपनी यात्राओं में मैं हमेशा लोगों से खुलकर बातें करता हूँ और इस तरह दूसरे देशों के लोगों को जानने का प्रयास करता रहता हूँ। 2006 के बसंत में जब मैं जर्मनी गया था तब हवाई जहाज़ में ही मैं एक रोचक घटना का गवाह बना, जिसे मैं आज आपको बताना चाहता हूँ।

यशेंदु और मैंने अपने अलग-अलग टिकिट बुक किए थे और मैं एक बार फिर अकेले ही यात्रा कर रहा था। जर्मनी पहुँचकर हम आपस में मिलने वाले थे। पूर्णेन्दु ने मुझे विमानतल पर छोड़ा और मैं अंदर प्रवेश कर गया।

गेट के पास ही एक ओर बैठे हुए मैं अपनी फ्लाइट का इंतज़ार कर रहा था और आसपास मौजूद दूसरे यात्रियों को गौर से देख रहा था। वे सामान्य यात्री थे: बच्चों को लिए भारतीय परिवार, एलेक्ट्रोनिक सामानों के साथ किशोर-वय बच्चे, लैपटाप लिए भारतीय व्यापारी और स्वाभाविक ही, पश्चिमी पर्यटक, जिन्हें उनके ताज़े झुलसे हुए चेहरों, योग-वस्त्रों, कसकर चोटी किए बालों, ॐ-अंकित टीशर्टों और गले में झूलती चन्दन या तुलसी की मालाओं से साफ पहचाना जा सकता था। मैंने देखा, ऐसी ही एक महिला मेरे बगल वाली खाली सीट की तरफ लपक रही है।

उसने मुझसे पूछा कि क्या सीट खाली है और मेरे ‘हाँ’ में सिर हिलाते ही बैठ गई। सामान्य बातचीत होने लगी: मैं काम के सिलसिले में जर्मनी जा रहा था, वह भारत में छुट्टियाँ मनाकर वापस लौट रही थी, मैं योग-शिविर आयोजित करता था, वह योग और ध्यान पसंद करती थी, वह कोलोन के आसपास कहीं रहती थी और मैं वहाँ योग प्रशिक्षण देता था। वह एक युवा महिला थी और उसने आरामदेह योग-वस्त्र धारण किए हुए थे। स्वाभाविक ही वह नए संपर्क बनाने के लिए उत्सुक थी, आध्यात्मिकता में उसकी रुचि थी और उससे बात करना भला लग रहा था। उससे बात करते हुए समय का पता ही नहीं चला और फ्लाइट का समय हो गया। मैंने उसे अपनी गतिविधियों से संबन्धित परिचय पुस्तिका दी और उठ खड़ा हुआ। उसने गुडबाय कहते हुए अपनी राह ली।

जहाज़ के काफी पीछे, आखिरी पंक्ति में, अपनी सीट खोजकर मैं बैठ गया। हमेशा की तरह गलियारे वाली सीट। जहाज़ के उड़ान भरने के बाद ही मेरा ध्यान उसकी तरफ गया: वह युवती मेरी पंक्ति में ही बैठी हुई थी। गलियारे के उस ओर एक और भारतीय बैठा हुआ था और वह युवती उसके साथ बड़ी घनिष्ठता के साथ बातों में लगी हुई थी। पल भर को मेरे मन में आया कि उसे हाथ हिलाकर बताऊँ कि मैं भी उसी पंक्ति में हूँ मगर फिर मुझे व्यवधान खड़ा करना उचित नहीं जान पड़ा क्योंकि लग रहा था कि अपनी अत्यंत उत्तेजक और मज़ेदार बातचीत में दोनों ही बिलकुल मगन हो गए हैं! जल्द ही लाइट बंद हो गई और आसपास सभी यात्री सोने का उपक्रम करने लगे। जहाज़ लगभग खाली था इसलिए हर तरफ शांति पसरी हुई थी। मैं तनावमुक्त था और सुकून महसूस कर रहा था।

कुछ देर बाद मैंने देखा कि वह युवती पास की दो खाली सीटों पर पसर गई है और एक कंबल उसके दुबले-पतले शरीर को पूरी तरह ढंके हुए है। मैंने और नजदीक से देखा तो आश्चर्य से मेरे आँखें फटी की फटी रह गईं: उस युवती का सिर उस भारतीय पुरुष की गोद में था। फिर कुछ देर बाद मैंने देखा कि उसका सिर उसकी गोद में पड़ा हिल रहा है। ऊपर-नीचे, एक खास गति और लय के साथ! पुरुष की आंखे बंद हो चुकी थीं और स्वाभाविक ही, उसे मज़ा आ रहा था।

मैं दंग रह गया, सार्वजनिक स्थान पर, एक हवाई जहाज़ में, अपने इतने पास, बगल में होने वाली गतिविधि पर मंत्रमुग्ध! वह युवती, जिसके साथ मैं अभी कुछ देर पहले बात करके खुश हो रहा था, इस व्यक्ति के साथ, जो उसके लिए बिल्कुल अपरिचित है, मुख-मैथुन कर रही है! हवाई जहाज़ में!

विभिन्न देशों की अपनी यात्राओं में मुझे जो यौन-संबंधी अनुभव हुए है, उनमें यह सर्वोपरि था! अपने जीवन में मैंने सैकड़ों उड़ानें भरीं मगर ऐसा दृश्य न तो पहले कभी देखा न ही उसके बाद आज तक देख पाया हूँ। मैं सोच भी नहीं सकता था कि ऐसा कुछ संभव भी हो सकता है लेकिन फिर मैंने सोचा: क्यों नहीं? उससे किसी ने ज़बरदस्ती नहीं की थी, वह अपनी मर्ज़ी से यह सब कर रही थी। उसे मज़ा आ रहा था। और वह व्यक्ति भी मज़ा ले रहा था। इससे आसपास किसी को कोई असुविधा नहीं पहुँच रही थी-यहाँ तक कि मैं भी, जो शायद वहाँ अकेला व्यक्ति था, जिसने इस घटना का नोटिस लिया था, कुछ कह नहीं सकता था कि मैंने वहाँ ऐसा कुछ देखा था!

कुछ देर बाद महिला की हलचल रुक गई। कार्य सम्पन्न हो चुका था। निश्चित ही इस उड़ान को जीवन भर याद रखने वाला मैं अकेला व्यक्ति नहीं था!

Related posts

जब पिता ज़िंदा होकर भी मेरे नहीं थे…

जब पिता ज़िंदा होकर भी मेरे नहीं थे…

पिता पुत्र का वो रिश्ता, जो जीते-जी मर गया मेरे पिता का देहांत हो गया। मुझे यह समाचार भारत में ...
पिता के साथ मेरा सम्बन्ध

पिता के साथ मेरा सम्बन्ध

जब पिता कह दे कि मैं मर गया तेरे लिए! कल्पना करें मेरी उस मानसिक दशा की जबकि मैं बाप ...
जीवन का नया अध्याय, चुनौतियाँ और सबक

जीवन का नया अध्याय, चुनौतियाँ और सबक

मैं भी उनमें से एक हूँ. 7 साल पहले भारत छोड़ के चला गया. वहाँ व्यापार करता था और टैक्स ...
11 साल की उम्र में यौन शोषण की शिकार मेरी बहन को न बचा पाने की ग्लानि 

11 साल की उम्र में यौन शोषण की शिकार मेरी बहन को न बचा पाने की ग्लानि 

मेरी एक ही छोटी बहन थी परा, आज से 17 साल पहले जर्मनी के लिए एयरपोर्ट आते हुए कार दुर्घटना ...
भारत में मेरे परिवार ने मेरी पीठ में छुरा घोंपा है

भारत में मेरे परिवार ने मेरी पीठ में छुरा घोंपा है

बालेंदु लिख रहे हैं कि उन्होंने चैरिटी संस्था से इस्तीफा क्यों दिया और उनके परिवार ने उन्हें पैसे और संपत्ति ...
Apra

दुनिया भर के राजाओं की एक सी रुचियाँ: पैसा, युद्ध और औरतें – 17 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु अपनी पारिवारिक जयपुर यात्रा के बारे में लिख रहे हैं, जहाँ उन्होंने प्राचीन राजा-महाराजाओं के महलों, किलों और ...
अपरा का चौथा जन्मदिन समारोह - 10 जनवरी 2016

अपरा का चौथा जन्मदिन समारोह – 10 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु अपरा के चौथे जन्मदिन के समारोह का वर्णन कर रहे हैं, जिसे उसके जन्मदिन यानी कल, 9 जनवरी ...
कैनेडियन योग दल

हमें घनिष्ट रूप से जुड़ना पसंद है – एक कैनेडियन योग दल का आश्रम आगमन – 13 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे सारे आश्रम ने एक कैनेडियन दल के साथ बेहद सुखद और व्यस्त समय ...
जर्मनी के खूबसूरत दौरे से भारत वापसी - 6 दिसंबर 2015

जर्मनी के खूबसूरत दौरे से भारत वापसी – 6 दिसंबर 2015

भारत लौटकर स्वामी बालेंदु पिछले हफ्ते की अपनी पारिवारिक जर्मनी यात्रा का संक्षिप्त ब्यौरा प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसमें उनकी ...
जर्मनी में हमारी मौज-मस्ती - 29 नवंबर 2015

जर्मनी में हमारी मौज-मस्ती – 29 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपनी पत्नी और बेटी के साथ जर्मनी में बिताए दूसरे सप्ताह का विवरण लिख रहे हैं। उनके रोमांचक ...

Leave a Reply