स्वामी बालेन्दु का उपयोग करने के लिए यूजर गाइड, दूसरा अध्याय- 27 अक्तूबर 2013

मेरा जीवन

पिछले सप्ताह मैंने बताया था कि कैसे एक मित्र ने मज़ाक में कहा कि मुझे एक यूजर गाइड लिखकर रखना चाहिए ताकि लोग जान सकें कि मेरे साथ कैसे पेश आया जाए। मेरी और सामान्य पश्चिमी व्यक्ति की जीवन-चर्या के बीच अंतर को लेकर हम बहुत देर तक हंसी-मज़ाक करते रहे लेकिन जब मैंने उन बातों पर गंभीरता पूर्वक सोचा तो मुझे लगा कि निश्चय ही मेरे अंदर ऐसी कुछ बातें मौजूद हैं, जिन्हें मुझसे मिले बगैर और उन बातों पर मेरे रवैयों, विचारों और मेरी जीवन पद्धति के बारे में जाने बगैर लोग भ्रम की स्थिति में रहते होंगे।

भले ही मैंने जीवन का बड़ा हिस्सा पश्चिम में रहकर गुज़ारा है मगर पश्चिमी रहन-सहन के प्रभाव में मेरे मन में कभी सामिष होने का खयाल नहीं आया और बहुत सोच-समझकर आज भी मैं निरामिष (शाकाहारी) ही बना हुआ हूँ। शुरू से मेरा विचार रहा है और आज भी है कि शाकाहार आपके शरीर के लिए अच्छा है और आज भी मेरी धारणा है कि मनुष्य के लिए नैसर्गिक रूप से यही सबसे उचित आहार है। अगर हम इन नकारात्मक बातों को फिलहाल नज़रअंदाज़ भी कर दें कि मीट के लिए पाले जाने वाले पशुओं को बहुत बुरी हालत में रखा जाता है, पशु-हत्या का पर्यावरण पर बहुत विपरीत प्रभाव पड़ता है और पशुओं को दिये जाने वाले अन्न का उपयोग भूखे मनुष्यों को भोजन कराने में किया जा सकता है, तो भी ज़िंदा रहने के लिए हमें पशुओं की हत्या करने की आवश्यकता नहीं है और भोजन (मीट) के लिए हर तरह के पशुओं की हत्या करना मैं एक क्रूर कर्म मानता हूँ।

मैं एक शाकाहारी कस्बे में पला-बढ़ा व्यक्ति हूँ और बाद में भी अपने काम के सिलसिले में ज़्यादातर शाकाहारी लोगों के सानिध्य में ही रहा। ऐसी परिस्थिति में युवावस्था में मांस खाने वालों को लेकर मेरी राय अच्छी नहीं थी। मैं उन्हें क्रूर समझता था और सोचता था कि कोई भी भला आदमी मांस भक्षण नहीं कर सकता। लेकिन मेरा यह विचार पश्चिम के संपर्क में आने के बाद परिवर्तित होता गया।

थोड़े समय में ही मुझे एहसास हुआ कि मतभेद सिर्फ दोनों की संस्कृति में अंतर और बचपन के माहौल के चलते है और यह कि मांस खाने वाले बहुत से लोग बहुत भले भी होते हैं! किसी की धारणाएँ पूरी तरह कभी भी नहीं बदल पातीं: मैं आज भी मांस खाने वालों के साथ एक ही टेबल पर बैठकर भोजन नहीं कर सकता। जब मेरे सामने कोई मांस खा रहा होता है तो मैं शारीरिक रूप से अस्वस्थ महसूस करता हूँ। मैं सामान्य रूप से भोजन नहीं कर पाता-मेरी भूख ही मर जाती है, जब मेरे सामने किसी मरे हुए जानवर का मांस रखा होता है! उसकी गंध भी मुझे सख्त नापसंद है, वह मुझे अस्वस्थ कर देती है! मेरे साथ ऐसा हो चुका है कि शांति पूर्वक खाना खाने की नीयत से या तो मैं किसी दूसरे टेबल पर भोजन करने चला गया या मांस खाने वाले का भोजन हो जाने के उपरांत मैंने भोजन किया। अधिकतर होता यह है कि सामने वाला मेरी इस कमजोरी का खयाल रखते हुए और साथ भोजन कर सकें इसलिए शाकाहारी खाना खाने के लिए राज़ी हो जाता है-वैसे भी मैं खुद बहुत अच्छा और पौष्टिक भारतीय शाकाहारी खाना बना लेता हूँ और वे अपना मांसाहारी खाना भूल जाते हैं!

जब कोई मुझे भोजन के लिए निमंत्रित करता है या मैं किसी नई जगह में होता हूँ, जहां लोग मुझे अच्छी तरह नहीं जानते, तो मैं उन्हें अपनी खाने की आदतों के बारे में साफ-साफ बता देता हूँ। यह सुनकर कई लोग समझते हैं कि जब वे शराब पी रहे होंगे, मैं उनके साथ बैठ नहीं पाऊँगा। लेकिन वह एकदम अलग बात होती है! स्वाभाविक ही मैं नशे में चूर किसी मदहोश शराबी को देखना पसंद नहीं करूंगा-और मैंने आज तक किसी परिचित को शराब के नशे में मतवाला होते हुए नहीं देखा है। साथ बैठे मित्रों में से कोई खाने के पहले या बाद में एकाध गिलास वाइन या बीयर पी लेता है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं होती। मैंने जीवन में कभी मद्यपान नहीं किया है और मेरा ऐसा करने का कोई इरादा भी नहीं है मगर मुझे मालूम है कि एकाध गिलास शराब पीने से विशेष नशा नहीं होता और इतनी शराब से उसके नशेड़ी होने का भी कोई इमकान नहीं होता! इतनी सी बात से मैं आपको शराबी नहीं समझता और जब कि मैं आपके साथ शराब नहीं पी सकता और न ही अपने घर में आपको शराब पेश कर पाऊँगा, लेकिन अगर आप शेम्पेन की बोतल खोलने का इरादा रखते हैं तब भी मैं आपके घर में आपके साथ शाम की मस्ती में शामिल होना पसंद करूंगा।

इस विषय का समापन करने के लिए एक और पहलू पर बात करना ज़रूरी है: और वह है धूम्रपान! यह कि उस कमरे में मैं बैठ ही नहीं सकता, जहां सिगरेट का धुआँ भरा हुआ हो और जहां से बाहर निकलने पर उस भयंकर दुर्गंध से आपके कपड़े तक गँधाते रहें। मैं चाहूँगा कि उस व्यक्ति के बगल में खड़ा न रहूँ जो सिगरेट पी रहा है क्योंकि जब वह अपनी सिगरेट का धुआँ उड़ाएगा, तो मेरे नथुनों में खुजली शुरू हो जाएगी। लेकिन नहीं, भले ही सिगरेट पीना आपके लिए हानिकारक है और आपको नहीं पीना चाहिए, मैं नहीं समझता कि सिर्फ सिगरेट पीने के कारण आप बुरे व्यक्ति हैं। आप उसके आदी हो चुके हैं, बस इतना ही।

तो ये मुख्य बातें हैं-लेकिन इसके अलावा मैं पहले भी एक मिलनसार व्यक्ति था और अब भी हूँ!

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