एक ‘टॉय-बॉय’ की कहानी – जब उम्र जीवन भर की परेशानी बन जाती है – 28 दिसंबर 2014

जब सन 2007 में मैं आस्ट्रेलिया में था, मेरे व्यक्तिगत सत्र में एक और मज़ेदार प्रकरण सामने आया। एक 36 साल के व्यक्ति ने मुझे बताया कि एक महिला के साथ उसके पहले संसर्ग ने भविष्य में महिलाओं को लेकर उसकी वरीयताओं को प्रभावित किया और आज भी कर रही है!

वह मेरे पास आया और आते ही कहा कि उसकी समस्या वास्तव में उसके सम्बन्धों की शुरुआत से पहले से ही मौजूद थी। उसने आगे कहा कि इस मामले से उस महिला का कोई संबंध नहीं है, बल्कि खुद मुझसे है। महिलाओं की उम्र से ही उसे समस्या थी।

जब वह 18 साल का था तब पहले-पहल एक महिला के साथ सोया था। वह एक 44 साल की तलाक़शुदा महिला थी और इसलिए वह संसर्ग के तौर-तरीकों का प्रारम्भिक ज्ञान प्रदान करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र और सक्षम थी। वह एक आकस्मिक और अनौपचारिक संबंध था और उसने मुझे बताया कि वह एक "टॉय-बॉय" भर था, एक मामूली युवा प्रेमी, जिसे उस महिला ने कभी भी गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन उनके सम्बन्धों में आपसी भावनाओं का कोमल आदान-प्रदान भी होता था-लिहाजा संबंध लगभग पूरे एक साल तक चला!

उसके पश्चात उसका कई और महिलाओं के साथ संबंध रहा, मुझसे मिलने तक उसे महिलाओं के साथ रात गुजारने का काफी अनुभव हो चुका था लेकिन अब वह अपने से कम उम्र की महिलाओं में अधिक रुचि लेता था। अपने से अधिक उम्र की महिलाओं से वह बुरी तरह कतराता था और समवयस्क महिलाओं से भी वह दूर रहने की कोशिश करता था।

लेकिन इसी बीच उसकी मुलाक़ात इस महिला से हुई, जिसे वह बहुत पसंद करने लगा। उन्होंने काफी समय साथ गुज़ारा और लगता था कि इस बार उनके बीच कुछ गंभीर सी बात संभव हो सकेगी। लेकिन तभी उसे महिला की उम्र का पता चला: वह इस व्यक्ति से चार साल बड़ी थी!

हालांकि बाकी सब कुछ सहज सामान्य था, सिर्फ यह छोटी सी जानकारी ही अचानक उसके दिल का काँटा बन गई और उसके मन में इस चाहत के प्रति प्रतिरोध उत्पन्न होने लगा। उसे महसूस होता कि नहीं, इस महिला के साथ अधिक दिन तक संबंध नहीं रखना चाहिए, इसे और गहरा बनाने की ज़रूरत नहीं है!

स्पष्ट ही वह स्वयं ही इसका मनोवैज्ञानिक कारण जानता था: उस अधेड़ महिला के साथ हुए अपने पहले संसर्ग के कारण वह उम्र में अपने से अधिक किसी भी महिला से संबंध बनाने से कतराने लगा था, शायद इसलिए कि किसी और महिला द्वारा फिर से दुखी होने का खतरा वह नहीं उठाना चाहता था! अपनी इस प्रेमिका के सामने, जिसके साथ उसके सुमधुर संबंध स्थापित हो गए थे, ये भावनाएँ व्यक्त न हों इसकी वह पूरी कोशिश करता था। लेकिन उसे समझ नहीं आता था कि अब वह क्या करे!

मैंने उससे कहा कि शांत रहे। उसे पहले ही पता था कि उस महिला की उम्र से उसे समस्या क्यों है। जब तक उसने नहीं जाना था कि वह महिला उससे कितने साल पहले पैदा हुई है, सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। मैंने उससे कहा कि वह उम्र को एक पल के लिए भूल जाए और विचार करे कि कोई और बात तो नहीं है जो उसे परेशान कर रही है। जब मुझे उत्तर मिला कि और कोई बात नहीं है तो मैंने उससे कहा कि इसे ऐसा ही रहने दे।

यह स्पष्ट है कि आज भी आप अपने अतीत का बोझ अपने सिर पर उठाए हुए हैं। उसे उतार फेंकिए और बेहतर भविष्य की ओर नज़र दौड़ाइए! अतीत के सकारात्मक पहुलुओं को साथ लेकर चलिए और पिछले अनुभवों से सीखा हुआ सबक सदा याद रखिए। और उम्र? उम्र महज एक संख्या है, इससे ज़्यादा कुछ भी नहीं। उससे यह पता नहीं चलता कि आप कितने स्नेही और कोमल व्यक्ति हैं, कितने बुद्धिमान या समझदार हैं और उससे यह भी पता नहीं चलता कि आप कितने अनुराग से भरे हुए हैं या आपसे लोग कितना प्यार कर रहे हैं।

मुझे लगता है कि मेरी सलाह से उसे लाभ पहुँचा था-कुछ साल बाद मुझे पता चला, उसने उस महिला से विवाह कर लिया है!

Related posts

जब पिता ज़िंदा होकर भी मेरे नहीं थे…

जब पिता ज़िंदा होकर भी मेरे नहीं थे…

पिता पुत्र का वो रिश्ता, जो जीते-जी मर गया मेरे पिता का देहांत हो गया। मुझे यह समाचार भारत में ...
पिता के साथ मेरा सम्बन्ध

पिता के साथ मेरा सम्बन्ध

जब पिता कह दे कि मैं मर गया तेरे लिए! कल्पना करें मेरी उस मानसिक दशा की जबकि मैं बाप ...
जीवन का नया अध्याय, चुनौतियाँ और सबक

जीवन का नया अध्याय, चुनौतियाँ और सबक

मैं भी उनमें से एक हूँ. 7 साल पहले भारत छोड़ के चला गया. वहाँ व्यापार करता था और टैक्स ...
11 साल की उम्र में यौन शोषण की शिकार मेरी बहन को न बचा पाने की ग्लानि 

11 साल की उम्र में यौन शोषण की शिकार मेरी बहन को न बचा पाने की ग्लानि 

मेरी एक ही छोटी बहन थी परा, आज से 17 साल पहले जर्मनी के लिए एयरपोर्ट आते हुए कार दुर्घटना ...
भारत में मेरे परिवार ने मेरी पीठ में छुरा घोंपा है

भारत में मेरे परिवार ने मेरी पीठ में छुरा घोंपा है

बालेंदु लिख रहे हैं कि उन्होंने चैरिटी संस्था से इस्तीफा क्यों दिया और उनके परिवार ने उन्हें पैसे और संपत्ति ...
Apra

दुनिया भर के राजाओं की एक सी रुचियाँ: पैसा, युद्ध और औरतें – 17 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु अपनी पारिवारिक जयपुर यात्रा के बारे में लिख रहे हैं, जहाँ उन्होंने प्राचीन राजा-महाराजाओं के महलों, किलों और ...
अपरा का चौथा जन्मदिन समारोह - 10 जनवरी 2016

अपरा का चौथा जन्मदिन समारोह – 10 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु अपरा के चौथे जन्मदिन के समारोह का वर्णन कर रहे हैं, जिसे उसके जन्मदिन यानी कल, 9 जनवरी ...
कैनेडियन योग दल

हमें घनिष्ट रूप से जुड़ना पसंद है – एक कैनेडियन योग दल का आश्रम आगमन – 13 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे सारे आश्रम ने एक कैनेडियन दल के साथ बेहद सुखद और व्यस्त समय ...
जर्मनी के खूबसूरत दौरे से भारत वापसी - 6 दिसंबर 2015

जर्मनी के खूबसूरत दौरे से भारत वापसी – 6 दिसंबर 2015

भारत लौटकर स्वामी बालेंदु पिछले हफ्ते की अपनी पारिवारिक जर्मनी यात्रा का संक्षिप्त ब्यौरा प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसमें उनकी ...
जर्मनी में हमारी मौज-मस्ती - 29 नवंबर 2015

जर्मनी में हमारी मौज-मस्ती – 29 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपनी पत्नी और बेटी के साथ जर्मनी में बिताए दूसरे सप्ताह का विवरण लिख रहे हैं। उनके रोमांचक ...

Leave a Reply