जब सन 2007 में मैं आस्ट्रेलिया में था, मेरे व्यक्तिगत सत्र में एक और मज़ेदार प्रकरण सामने आया। एक 36 साल के व्यक्ति ने मुझे बताया कि एक महिला के साथ उसके पहले संसर्ग ने भविष्य में महिलाओं को लेकर उसकी वरीयताओं को प्रभावित किया और आज भी कर रही है!
वह मेरे पास आया और आते ही कहा कि उसकी समस्या वास्तव में उसके सम्बन्धों की शुरुआत से पहले से ही मौजूद थी। उसने आगे कहा कि इस मामले से उस महिला का कोई संबंध नहीं है, बल्कि खुद मुझसे है। महिलाओं की उम्र से ही उसे समस्या थी।
जब वह 18 साल का था तब पहले-पहल एक महिला के साथ सोया था। वह एक 44 साल की तलाक़शुदा महिला थी और इसलिए वह संसर्ग के तौर-तरीकों का प्रारम्भिक ज्ञान प्रदान करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र और सक्षम थी। वह एक आकस्मिक और अनौपचारिक संबंध था और उसने मुझे बताया कि वह एक "टॉय-बॉय" भर था, एक मामूली युवा प्रेमी, जिसे उस महिला ने कभी भी गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन उनके सम्बन्धों में आपसी भावनाओं का कोमल आदान-प्रदान भी होता था-लिहाजा संबंध लगभग पूरे एक साल तक चला!
उसके पश्चात उसका कई और महिलाओं के साथ संबंध रहा, मुझसे मिलने तक उसे महिलाओं के साथ रात गुजारने का काफी अनुभव हो चुका था लेकिन अब वह अपने से कम उम्र की महिलाओं में अधिक रुचि लेता था। अपने से अधिक उम्र की महिलाओं से वह बुरी तरह कतराता था और समवयस्क महिलाओं से भी वह दूर रहने की कोशिश करता था।
लेकिन इसी बीच उसकी मुलाक़ात इस महिला से हुई, जिसे वह बहुत पसंद करने लगा। उन्होंने काफी समय साथ गुज़ारा और लगता था कि इस बार उनके बीच कुछ गंभीर सी बात संभव हो सकेगी। लेकिन तभी उसे महिला की उम्र का पता चला: वह इस व्यक्ति से चार साल बड़ी थी!
हालांकि बाकी सब कुछ सहज सामान्य था, सिर्फ यह छोटी सी जानकारी ही अचानक उसके दिल का काँटा बन गई और उसके मन में इस चाहत के प्रति प्रतिरोध उत्पन्न होने लगा। उसे महसूस होता कि नहीं, इस महिला के साथ अधिक दिन तक संबंध नहीं रखना चाहिए, इसे और गहरा बनाने की ज़रूरत नहीं है!
स्पष्ट ही वह स्वयं ही इसका मनोवैज्ञानिक कारण जानता था: उस अधेड़ महिला के साथ हुए अपने पहले संसर्ग के कारण वह उम्र में अपने से अधिक किसी भी महिला से संबंध बनाने से कतराने लगा था, शायद इसलिए कि किसी और महिला द्वारा फिर से दुखी होने का खतरा वह नहीं उठाना चाहता था! अपनी इस प्रेमिका के सामने, जिसके साथ उसके सुमधुर संबंध स्थापित हो गए थे, ये भावनाएँ व्यक्त न हों इसकी वह पूरी कोशिश करता था। लेकिन उसे समझ नहीं आता था कि अब वह क्या करे!
मैंने उससे कहा कि शांत रहे। उसे पहले ही पता था कि उस महिला की उम्र से उसे समस्या क्यों है। जब तक उसने नहीं जाना था कि वह महिला उससे कितने साल पहले पैदा हुई है, सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। मैंने उससे कहा कि वह उम्र को एक पल के लिए भूल जाए और विचार करे कि कोई और बात तो नहीं है जो उसे परेशान कर रही है। जब मुझे उत्तर मिला कि और कोई बात नहीं है तो मैंने उससे कहा कि इसे ऐसा ही रहने दे।
यह स्पष्ट है कि आज भी आप अपने अतीत का बोझ अपने सिर पर उठाए हुए हैं। उसे उतार फेंकिए और बेहतर भविष्य की ओर नज़र दौड़ाइए! अतीत के सकारात्मक पहुलुओं को साथ लेकर चलिए और पिछले अनुभवों से सीखा हुआ सबक सदा याद रखिए। और उम्र? उम्र महज एक संख्या है, इससे ज़्यादा कुछ भी नहीं। उससे यह पता नहीं चलता कि आप कितने स्नेही और कोमल व्यक्ति हैं, कितने बुद्धिमान या समझदार हैं और उससे यह भी पता नहीं चलता कि आप कितने अनुराग से भरे हुए हैं या आपसे लोग कितना प्यार कर रहे हैं।
मुझे लगता है कि मेरी सलाह से उसे लाभ पहुँचा था-कुछ साल बाद मुझे पता चला, उसने उस महिला से विवाह कर लिया है!
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