भविष्य की योजनाओं को लेकर मैं परेशान क्यों नहीं होता: मुझे भरोसा है, मगर ईश्वर पर नहीं – 14 जून 2015

मेरा जीवन

मेरे जीवन में बातचीत के सर्वश्रेष्ठ साथी मेरी पत्नी और दोनों भाई हैं। इन तीन लोगों के साथ मैं दुनिया भर के हर विषय पर चर्चा करता हूँ, चाहे व्यक्तिगत बातें हों, चाहे सामाजिक या व्यावसायिक। हाल ही में जब मैं अपनी पत्नी के साथ बात कर रहा था तो हमने दोनों के बारे में और भविष्य की अपनी योजनाओं और निर्णयों पर अपने रवैयों के बारे में बात की- और मैंने उसे बताया कि क्यों मैं भविष्य को लेकर न तो उद्विग्न होता हूँ, न परेशान होता हूँ, न चिंता करता हूँ।

अधिकांश निर्णय हम लोग आपस में चर्चा करके लेते हैं, साथ मिलकर प्लान करते हैं और नए, रोमांचक उपक्रम शुरू करते हैं- व्यापार और व्यक्तिगत जीवन संबंधी, दोनों! इन सबके बीच रमोना मुझसे कभी-कभी पूछती है, 'तुम्हें डर नहीं लगता कि यह काम सुचारू रूप से हो भी पाएगा या नहीं?' या कहती है कि वह हमारे द्वारा शुरू की गई किसी ख़ास परियोजना के नतीजों को लेकर कुछ परेशान है। सचाई यह है कि मैं बिल्कुल परेशान नहीं होता। मैं उस पर एकाग्र हो जाऊँगा, अपना पूरा ध्यान उसी काम पर केन्द्रित कर दूंगा लेकिन मुझे किसी तरह की कोई घबराहट या चिंता या परेशानी नहीं घेरती!

ऐसा क्यों होता है? हमने आज इसी विषय पर बात की।

मैंने कहा, "मुझे विश्वास होता है कि इस बारे में सब ठीक होगा।" और रमोना ने पूछा, "लेकिन तुम किस पर विश्वास करते हो?" निश्चित ही किसी दैवी शक्ति पर नहीं! मैं ईश्वर पर विश्वास नहीं रखता इसलिए मुझे सब कुछ उस पर छोड़ देने की इच्छा नहीं होती- मुझे लगता है कि लोग सिर्फ मानसिक रूप से आश्वस्त होने के लिए या मानसिक शक्ति प्राप्त करने के लिए ऐसा करते हैं, क्योंकि ऐसा कोई सर्वशक्तिमान मौजूद नहीं है जो "सब कुछ ठीक" कर दे। इसी तरह, मेरा इस पर भी विश्वास नहीं है कि ईश्वर जैसी कोई आसमानी ताकत है, जो हर चीज़ को सुचारू रूप से चलाती है या चला सकती है।

क्या मैं खुद पर भरोसा करता हूँ? बिल्कुल। जी हाँ, क्योंकि मैं जानता हूँ कि मैं क्या कर रहा हूँ। जब मैं कोई निर्णय लेता हूँ तो मैं कोशिश करता हूँ कि उसके सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर अच्छी तरह विचार कर लूँ और किसी खास परिस्थिति में अपनी सहज प्रवृति या सहज बुद्धि पर भरोसा करूँ। लेकिन मैं जानता हूँ कि मैं सब कुछ नहीं जानता। उन क्षेत्रों में, जिनके बारे में मुझे अधिक जानकारी नहीं है, मैं किसी जानकार या विशेषज्ञ की सलाह ले सकता हूँ! मैं जीवन भर सीखता रहूँगा और ज़्यादा से ज़्यादा ज्ञान हासिल करना कितना अच्छा है!

सामान्यतया मैं हर बात के प्रति सकारात्मक रवैया रखता हूँ, चीजों को देखने का मेरा नज़रिया सकारात्मक होता है और मैं हमेशा आशा से भरा रहता हूँ कि भविष्य में अच्छी बातें ही होंगी। उन बातों को लेकर व्यर्थ परेशान रहने की मेरी आदत नहीं है, जिन्हें मैं बदल नहीं सकता या जिन पर मेरा कोई ज़ोर नहीं है। कोई भी काम मैं पूरी शक्ति लगाकर करूँगा और जो बातें मेरे हाथ में नहीं हैं, उन पर गहरी नज़र भी रखूँगा लेकिन उन्हें लेकर व्यर्थ परेशान नहीं होऊँगा!

अंत में, यह प्रश्न हमेशा बना रहता है कि ज़्यादा से ज़्यादा बुरा क्या हो सकता है। कामों और उनके नतीजों पर यथार्थवादी रवैया रखें तो पता चलेगा कि ज़्यादातर नतीजे उतने बुरे नहीं होते, जितना आप उनके बारे में सोच-सोचकर डरे हुए होते हैं। आप मर नहीं जाएँगे। और अगर मरना सबसे बुरी बात है, जो आपके साथ हो सकती है-तो क्या? उस पर तो आपका कोई बस ही नहीं है!

और बाकी सब तो ऐसी बातें हैं, जो हो भी जाएँ तो उनसे हम निपट सकते हैं। तब तक मैं और हम किसी भी काम को हर संभव अच्छे से अच्छा करने की कोशिश करते हैं। डर और चिंताएँ तो काम में व्यवधान ही उपस्थित करते हैं!

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