तुम्हारी पेशकदमी को नज़रअंदाज़ करता हूँ, इसका मतलब यह नहीं कि मैं समलैंगिक हूँ! 25 अगस्त 2013

मेरा जीवन

पिछले सप्ताह मैंने आपको बताया था कि 2005 में मेरे आस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान मेरी आयोजक ने मेरे लिए एक व्यक्तिगत नृत्य प्रदर्शन किया था। इस अश्लील नृत्य से मेरे अंदर उसके प्रति कोई रुचि तो जागृत नहीं हो पाई मगर मैं एक अजीबोगरीब स्थिति में फंस ज़रूर गया। वह जो काम कर रही थी उसे वह तंत्र कहती थी और कार्यशिविरों और मसाज-सत्रों का, जो, उसके अनुसार, यौन-तंत्र को उत्तेजित करते थे, आयोजन करती थी। पहले ही मैं उसके केंद्र में अपने कार्यक्रम के आयोजन को लेकर शंकित था और अब मैं यह भी जानता था कि मेरे इंकार पर वह मुझसे खफा भी है। यह कोई अच्छी स्थिति नहीं थी लेकिन रात में अपने बिस्तर पर यह सोचते हुए कि अब किया क्या जाए, मैंने तय किया कि इस स्थिति को ऐसा मोड़ दिया जाए कि कम से कम नुकसान हो। दुर्भाग्य से यह भी मेरी योजना के अनुरूप नहीं हो पाया!

मैंने अपने दिन की शुरुआत इस तरह की, जैसे रात में कुछ हुआ ही न हो। मुझे खुशी हुई, जब मैंने देखा कि वह भी अपनी निराशा से उबर चुकी है। उसने मुझसे हमारे कार्यक्रमों के बारे में बातचीत की और बताया कि शाम को सामूहिक योग-सत्र भी चलाया जाएगा। मैंने अपना काम शुरू कर दिया।

उस केंद्र में मेरी आयोजक का एक सहयोगी भी था जो सबेरे आया और जो लोग मुझसे मिलने आ रहे थे, उनके स्वागत के दौरान मेरी सहायता करता रहा और फिर समयानुसार कार्यक्रम के संचालन में भी लगा रहा। मेरे कुछ व्यक्तिगत-सत्र भी थे और स्वाभाविक ही, अपनी आयोजिका के साथ मेरी कुछ बातें भी हुईं। फिर दोपहर में, यह उत्सुक, खुशमिजाज़ सी दिखने वाली महिला फिर मेरे पास आई और साफ शब्दों में यह व्यक्तिगत प्रश्न पूछा- "मैंने सुना है आप महिलाओं से ज़्यादा पुरुषों में रुचि रखते हैं! क्या यह सच है?" मैं सन्न रह गया। पल भर रुककर मैंने उससे कहा कि मैं पुरुषों के प्रति बिल्कुल आकर्षित नहीं हूँ। लेकिन मैं समझ गया कि मेरी आयोजक क्यों इस तरह की अफवाहें फैला रही है। मैंने उसके स्पष्ट प्रलोभन को ठुकरा दिया था और उसकी नज़र में उसका तार्किक अर्थ यही था कि मैं समलैंगिक हूँ!

इस वार्तालाप ने मुझे एक ईमेल का पुनः स्मरण करा दिया, जो कुछ देर पहले ही मुझे मिला था: यह एक पुरुष का ईमेल था, जो, ईमेल के अनुसार, मेरे प्रति आकर्षण महसूस करता था; लेकिन उसकी स्वच्छंद भाषा ऐसी थी कि अगर उसे पुस्तकाकार में छपवा दिया जाए तो उसे पढ़ना किसी समलैंगिक अश्लील (पॉर्न) साहित्य को पढ़ने जैसा होगा। यह पता चलने के बाद कि मेरे बारे में किस तरह की अफवाहें फैली हुई हैं, मैं समझ गया कि यह ईमेल मेरे इनबॉक्स में कैसे पहुंचा!

मैं जिस स्थिति में फंस गया था वह दिलचस्प थी लेकिन मैंने सोचा कि यह बात कि मैं समलैंगिक हूँ, मुझे किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंचा रही है और न ही इससे सीधे-सीधे मेरा कोई अपमान ही हो रहा है-लिहाजा, मैंने इसे भी तूल न देने का निश्चय किया।

लेकिन शाम को मेरा एक ऐसी बात से सामना हुआ, जो मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आई: जब लोग ध्यान के लिए आते हैं तो आयोजक मेरी फ्लायर-शीट्स और ब्रोशर्स एक टेबल पर प्रदर्शित कर देते हैं। मैंने देखा कि मेरे ब्रोशर्स पर संपर्क-सूत्र वाली जगह पर, जिसमें मेरी वैबसाइट, ईमेल, फोन नंबर आदि की जानकारियाँ होती हैं, उसे मिटाकर, एक दूसरा कागज़ स्टेपल कर दिया गया था और जिससे मेरे संपर्क की जानकारी कोई पढ़ नहीं सकता था। मैं इस बात से बहुत विचलित हुआ क्योंकि अब कोई भी सीधे मुझसे संपर्क नहीं कर सकता था, न ही मेरी वैबसाइट पर जा सकता था!

ध्यान से पहले हमारे पास ज़्यादा वक़्त नहीं था और जब मैंने अपनी आयोजक से इस बारे में पूछा तो उसने उड़ता सा जवाब दिया- "मैं आपके आस्ट्रेलियाई कार्यक्रमों के स्वत्वाधिकार (exclusive rights) प्राप्त करना चाहती हूँ! मैं सारे देश में आपकी बुकिंग आदि किया करूंगी-हम इस बारे में बाद में बात करते हैं…!" अब तो ये कुछ जादा ही हो गया था और यह मुझे किसी कदर मंजूर नहीं था, मगर मैं शांत और सामान्य बना रहा। मैंने अपना प्रवचन सत्र बहुत से लोगों के साथ, सुचारू रूप से सम्पन्न किया।

लोग उसके संपर्क-विवरण वाली मेरी फ्लायर-शीट्स ले गए थे और लोगों के वापस चले जाने के बाद भी बार-बार उसका फोन बज उठता था। लोग धड़ाधड़ बुकिंग किए जा रहे थे। मैं बैठा रहता था और फोन आने पर वह बाहर निकलकर बात करती थी। एक बार मैं ज़रा-सी झपकी ले रहा था कि मैंने बाहर उसकी आवाज़ सुनी। वह किसी से बात कर रही थी और इसी बात को सुनकर अंततः मैंने उससे संबंध विच्छेद करने का निर्णय किया।

फोन पर दूसरी तरफ कोई पुरुष था और स्वाभाविक ही, व्यक्तिगत सत्र का इच्छुक था। मेरी आयोजक उससे कह रही थी- "उनके साथ आपको यह सत्र अवश्य करना चाहिए। जो लोग उनके साथ ऐसे सत्रों में शामिल हुए हैं, उनसे मैंने सुना है कि वे हवा में तैरता महसूस कर रहे थे और उनमें अद्भुत तांत्रिक शक्ति का संचार हो गया था! उन्हें ऐसा अद्भुत और आनंददायक अनुभव जीवन में पहले कभी नहीं हुआ था! मैंने सुना है कि वे पुरुषों को तरजीह देते हैं, इसलिए उनके साथ खास तौर से आपका व्यक्तिगत-सत्र बहुत आनंददायक होगा!"

इस वक़्त तक मेरे सामने यह बात पूरी तरह स्पष्ट हो चुकी थी कि वह किस तरह का काम करती है और जब वह ये बातें कर ही रही थी, मैंने तय कर लिया कि अब किसी भी सूरत में इस महिला के साथ काम नहीं करना है! वह मेरे कार्य-शिविरों को यौन संबंधी तांत्रिक-शिविर की तरह बेचना चाहती थी, जब कि मैं सिर्फ ध्यान और योग के कार्यक्रम करता हूँ! इसके अलावा और भी बहुत सी ऊलजलूल बातें वह मेरे बारे में फैला सकती थी!

निर्णय तो ले लिया गया-मगर अब मैं करूँ क्या? इस बात को उसे कैसे समझाया जाए और अगर बात करने के बाद मैं वहाँ न रहना चाहूँ तो जाऊंगा कहाँ? मुझे परेशान करने वाले ये सवाल अंततः हल कैसे हुए, इसके बारे में मैं आपको अगले सप्ताह बताऊंगा!

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