अपने वास्तविक मित्रों के साथ मिलकर बदलावों को अनुभव करने का सुखद एहसास – 29 मार्च 2015

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

कल थॉमस और आयरिस आश्रम आ गए! उनका आना हमेशा ही बड़ा सुखद होता है और इस बार भी उनके आने से सिर्फ अपरा ही खुश नहीं हुई!

हमारे पिछले कुछ माह न सिर्फ बहुत से मेहमानों की आमद से रोशन रहे बल्कि रेस्तराँ के काम की व्यस्तता के चलते हम सब आम दिनों से ज़्यादा अस्तव्यस्त हो गए थे। पिछले दो माह तो कुछ ज़्यादा ही व्यस्त रहे-और बड़े आनंददायक भी, क्योंकि हेयर ड्रेसर्स का एक दल यहाँ आया हुआ था, जिनमें से कुछ लोग पिछले साल भी यहाँ आ चुके थे। वे कुछ कार्यशालाओं में और व्यक्तिगत सत्रों में सम्मिलित हुए, योग और आयुर्वेद शिविरों में भाग लिया और निश्चित ही बहुत सी मस्ती भी की।

अब हम हिमालय यात्रा की तैयारी कर रहे हैं लेकिन अपने यात्री-समूह को लेकर यशेंदु के रवाना होने से पहले हमारे पास कुछ ही दिन हैं, जिनमें हम सब यार-दोस्त एक साथ होंगे और हमें पता है कि ये थोड़े से दिन कितनी मस्ती भरे और सुखद होंगे!

इस बार एक साल से ज़्यादा समय के बाद थॉमस और आयरिस आश्रम आए हैं। पिछले साल सितंबर में उनके साथ मेरी रूबरू मुलाक़ात हुई थी और जबकि स्काइप और फोन पर हम लोगों का सम्पर्क बना हुआ था फिर भी आमने-सामने बैठकर आपस में गपशप करना, उससे कई गुना सुखद है!

उनके जीवन में परिवर्तन आया है, हमारे जीवनों में भी भारी परिवर्तन हुए हैं और क्योंकि पिछले सप्ताह से, जैसा कि, अगर आप मेरे ब्लॉग पढ़ते हों तो जानते होंगे, मेरे दिमाग में परिवर्तन संबंधी यह विषय लगातार घूम रहा है, और इन परिवर्तनों के बीच से गुज़रते हुए मैं एक बार फिर अपनी मित्रता के महत्व को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता। परिवर्तन बाहर से हुए हैं, भीतर से हुए हैं और चारों ओर से, हर तरफ से हुए हैं।

और हम सबने परिवर्तन की उस धारा के साथ बहने के लिए अपने आप को खुला छोड़ दिया है। इन परिवर्तनों के बीचोंबीच दोस्तों के साथ शाना-ब-शाना मौजूद होना कितना खुशगवार है। आप बीते दिनों के विषय में बातें करते हैं, अपने कुछ पुराने विचारों पर हँसते हैं, याद करते हैं कि तब आप कैसे दिखते थे, अपने कामों पर मंद-मंद मुस्कुराते हैं और भावुक बातों पर गले लगकर आँखें गीली कर लेते हैं। आप एक-दूसरे को अपने-अपने वर्तमान के बारे में बताते हैं और फिर एक-दूसरे की ख़ुशियों, उल्लास, प्रेम और सुख-शांति और संतोष में खुद भी हर्षोल्लास से भर उठते हैं।

स्वाभाविक ही, भविष्य के बारे में भी सोचा जाता है-और आपस में मिलकर भविष्य की योजनाएँ बनाने से बढ़कर क्या हो सकता है? अपने दिलोदिमाग में भविष्य का खाका खींचना, सपने देखना और उन सपनों को साकार करने का संकल्प लेना! इससे अधिक उज्ज्वल भविष्य नहीं हो सकता और मैं जानता हूँ कि हम सब कदम से कदम मिलाकर उस भविष्य की ओर रवाना होंगे, भले ही हज़ारों किलोमीटर की भौगोलिक दूरी हमारे बीच हो!

अगर आपको मित्रता का ऐसा एहसास हो रहा है तभी आप जान सकते हैं कि आपके पास सच्चे मित्र हैं!

पूरी शिद्दत के साथ प्रेम का आनंद लीजिए!

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