2006 के स्वीडन प्रवास के दौरान आध्यात्मिक उत्सव – 17 अगस्त 2014

मेरा जीवन

सन 2006 में मुझे स्वीडन के एक कस्बे, ऐंग्सबका में आयोजित होने वाले एक विशाल उत्सव के आयोजन से संबन्धित ईमेल मिला, जिसमें आयोजकों ने जानना चाहा था कि क्या मैं उस वर्ष उनके "नो माइंड फेस्टिवल" में अपनी कोई कार्यशाला आयोजित करना पसंद करूँगा। जहाँ तक मुझे याद पड़ता है, उसे आयोजित करते हुए उन्हें दस वर्ष हो चुके थे अर्थात वह उत्सव की दसवीं वर्षगांठ थी।

एक साल पहले डेनमार्क निवासी मेरे एक मित्र ने उस उत्सव का ज़िक्र किया था। उसने कहा था कि कितना अच्छा हो अगर मैं वहाँ आऊँ-बल्कि अगर मैं वहाँ कोई अपनी कार्यशाला भी प्रस्तुत करूँ। मैंने उससे कहा था कि अगर मुझे वहाँ आमंत्रित किया जाता है तो मैं इस पर विचार करूँगा। मुझे लगता है कि उसी ने उत्सव के आयोजकों से संपर्क करके मेरा नाम प्रस्तावित किया होगा और उन्होंने उसकी बात मानकर मुझे निमंत्रण भेजा होगा।

कुछ कामकाजी बातों पर चर्चा के बाद-यानी उत्सव कहाँ और कब होगा, हमारे रहने और भोजन की व्यवस्था उनकी ओर से होगी, हमें आने-जाने का खर्च दिया जाएगा आदि, आदि-मैं, अपने भाई यशेंदु और एक भारतीय और एक पश्चिमी संगीतज्ञ के साथ वहाँ जाने के लिए तैयार हो गया। उत्सव दो सप्ताह होना था और जबकि यशेंदु हमारे अंतर्राष्ट्रीय योग-शिक्षक-प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यशालाएँ आयोजित करने एक सप्ताह बाद आने वाला था, मेरा कार्यक्रम पूरे दो सप्ताह चलने वाला था, जिसमें मुझे व्याख्यान भी देने थे और अपनी कार्यशालाएँ भी आयोजित करनी थीं।

इस तरह जीवन में पहली बार हम स्वीडन पहुंचे। उत्सव एक विशाल खुले मैदान में आयोजित किया गया था। मेरे ख्याल से वह विभिन्न वर्कशॉप आयोजित करने की जगह थी, जहाँ उनके कार्यालय थे और कार्यशाला-नायकों के लिए व्यक्तिगत आवास भी। इमारत के सामने थोड़ी सी खुली जगह थी और मुख्य इमारत के आसपास भी, जहाँ खुली जगह में टेंट लगाकर उन्होंने कार्यशालाओं की और आग जलाकर खाना पकाने और मेहमानों के भोजन के स्थान की व्यवस्था की थी। उसी स्थान पर उन आगंतुकों के लिए भी व्यवस्था की गई थी कि वे अपने साथ लाए हुए टेंट लगाकर ठहर सकते थे।

वाकई वह एक अद्भुत आयोजन था। वहाँ लगभग आठ सौ से एक हजार आगंतुक और मेहमान आए हुए थे, जिन्होंने कई दिनों की सहभागिता के लिए और साथ ही वहाँ ठहरने और भोजनादि तथा कार्यशालाओं में शामिल होने के लिए पंजीयन करवाया था। क्योंकि वह एक आध्यात्मिक उत्सव था, आए हुए युवा और बुजुर्ग लोगों की उपस्थिति वहाँ के वातावरण में एक रंग-बिरंगे और खुशनुमा माहौल की रचना कर रहे थी। पुराने हिप्पी, जिन्होंने आज भी अपनी वेषभूषा बदली नहीं थी या जो उनके पुराने अच्छे दिनों की याद दिला रहे थे, यूरोप भर से आए हुए सैकड़ों युवा, जो व्यस्त और थका देने वाले आधुनिक और व्यावसायिक जीवन के स्थान पर एक अलग तरह का जीवन जीने की चाह रखते थे, जो प्राकृतिक जीवन में रुचि रखते थे, जो अपने जीवन में मामूली परिवर्तन करते हुए दुनिया को बेहतर जगह बनाने के अपने स्वप्नों की दुनिया में रहना चाहते थे।

वहाँ हम इस तरह के लोगों से मिले और मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि ये लोग वास्तव में जीवन का लुत्फ उठाने में पूरी तरह सक्षम थे! मैं पूरे दो हफ्ते बहुत व्यस्त रहा लेकिन अपने व्याख्यानों, कार्यशालाओं और व्यक्तिगत-सत्रों के बाद मुझे जब भी समय मिलता, हम सब आग के चारों ओर बैठकर चर्चा करते, नाचते-गाते, वहाँ आए हुए संगीतज्ञों का संगीत सुनते, हँसते-खेलते और हर तरह का आनंद मनाते हुए अपना समय व्यतीत करते।

मैंने उस समय का पूरा आनंद उठाया और बहुत सी नई चीज़ें देखीं, असंख्य नए लोगों से मिला और बहुत से नए मित्र बनाए!

अगले सप्ताह मैं आपको वहाँ के बारे में और भी बहुत कुछ बताऊँगा!

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