आश्रम में धूम्रपान पर पाबंदी है लेकिन धूम्रपान करने वालों पर न तो पाबंदी है, न ही उनकी निंदा की जाती है! 26 अप्रैल 2015

मैंने आदत बना ली है कि रविवार के दिन अपने जीवन की ताज़ा घटनाओं के बारे में आपको बताता हूँ। आज बारी है, अपने मेहमानों के साथ कल हुई बातचीत से उद्भूत कुछ विचारों की। आश्रम की एक मेहमान सकारात्मक रूप से अचंभित रह गई, जब हमने कहा कि अगर वह धूम्रपान करती है या कॉफी पीती है, तो हमें कोई एतराज़ नहीं होगा!

हमारा आश्रम पूरी तरह अपारंपरिक, अपरंपरागत काफी हद तक स्वच्छंद और अधार्मिक आश्रम है। हमारे यहाँ आपके आम व्यवहार को लेकर कोई खास नियम नहीं है और न ही इस बात का कोई नियम है कि आप किस समय क्या करते हैं। हमारे यहाँ सिर्फ शराब और ड्रग्स पर पाबंदी है और कमरों में या बगीचे में धूम्रपान करने की मनाही है। अगर आप धूम्रपान करते हैं तो उससे हमें कोई दिक्कत नहीं हैं, बस, आश्रम से बाहर निकलिए और चाहें तो गेट के सामने ही खड़े होकर सिगरेट पीजिए। वास्तव में बहुत से मेहमान ऐसा करते भी हैं और हमें उससे कोई परेशानी नहीं होती!

कई बार लोग इस तनाव के साथ यहाँ आते हैं कि भारत आने का और हमारे आश्रम में रुकने का निर्णय तो कर लिया लेकिन अब यहाँ आकर धूम्रपान कहाँ करेंगे-क्योंकि इन लोगों को निकोटीन की लत होती है! जब उन्हें इस बारे में हमारे रवैये का पता चलता है तो आप कल्पना कर सकते हैं कि उन्हें कितनी राहत मिलती होगी-और अक्सर वे आश्चर्यचकित रह जाते हैं।

इसका कारण यह है कि बहुत से आश्रम हैं, जहाँ आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इस बारे में बहुत सख्त नियम और बहुत संकीर्ण नजरिया होता है। स्वाभाविक ही, इसकी जड़ में उनकी आस्था, अक्सर उनके गुरुओं के नज़रिए और उनकी शिक्षाओं से प्रभावित हिन्दू धर्म होता है! अगर उनके संगठन का उपदेश या आदेश है कि चॉकलेट नुकसानदेह है तो उस आश्रम में किसी को भी चॉकलेट खाने की इजाज़त नहीं होती!

यही बात कॉफी पर भी लागू होती है और हमारे आश्रम में यह एक आश्चर्य का विषय होता है, जब हम पूछते हैं, "कॉफी लेंगे या चाय"! वास्तव में हम अक्सर कुछ आयुर्वेदिक मसालों के साथ उबालकर चाय बनाते हैं और वही पेश करते हैं।

मैं आपका आकलन इन छोटी-छोटी सी सामान्य बातों से क्यों करूँगा? मैं धूम्रपान न करने की सिफारिश ज़रूर करूँगा क्योंकि वह आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकर है, जब आप धूम्रपान कर रहे होंगे, मैं आपके पास खड़ा रहना पसन्द नहीं करूँगा क्योंकि मैं अपने लिए कोई नुकसान नहीं चाहता और वैसे भी तम्बाकू का धुआँ मैं बर्दाश्त नहीं कर पाता। लेकिन इसके बावजूद, सिर्फ धूम्रपान करने के कारण आपको बुरा व्यक्ति नहीं समझूँगा!

यह आपका निर्णय है और अपने शरीर के साथ आप जो भी करते हैं, अपनी ज़िम्मेदारी पर करते हैं। जब तक आप दूसरों को नुकसान नहीं पहुँचाते और अपने आसपास के लोगों के साथ आपका व्यवहार प्यार भरा और शालीन है, आपका आश्रम में हार्दिक स्वागत है। आप जो हैं, वैसे ही बने रहिए और जीवन के मज़े लीजिए-मेरा वादा है, इन आदतों के आधार पर मैं आपका आकलन नहीं करूँगा!

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