पार्टी, बीच और शराब – जब आपको महसूस होता है कि जीवन में यही सब कुछ नहीं है – 14 दिसंबर 2014

सन् 2007 में जब मैं आस्ट्रेलिया प्रवास पर था तब कई बार समुद्र किनारे बसे शहरों में भी रहा और कई बार बीचों पर घूमने भी गया। ऐसे ही किसी शहर में एक महिला के साथ संपन्न व्यक्तिगत सत्र आज भी मुझे अच्छी तरह याद है। वह महिला अपने पति और अपने दूसरे दोस्तों के 'बीच बॉय एटीट्यूड' से ऊब गई थी।

जब वह महिला मेरे पास आई तो उसने सबसे पहले बताया कि वह वास्तव में आस्ट्रेलियन नहीं है बल्कि आस्ट्रियन है। जब वह आस्ट्रिया से यहाँ आई थी तब बीस साल की थी। आस्ट्रेलिया घूमते हुए उसकी मुलाक़ात एक आस्ट्रेलियन से हुई, दोनों में प्रेम हो गया और जल्द ही उन्होंने एक साथ रहने का मन बना लिया। फिर उन्होंने विवाह किया और बहुत से सुखद वर्ष साथ गुज़ारे। मुझसे मिलने से कुछ समय पहले तक आस्ट्रेलिया में रहते हुए वह वाकई बहुत खुश थी। उस वक़्त उसकी उम्र 40 साल से कुछ ज़्यादा थी।

उसकी असंतुष्टि का कारण कोई विशेष घटना या कोई हादसा नहीं थे। यह नहीं कहा जा सकता था कि किसी ख़ास बात से उसकी शुरुआत हुई थी लेकिन उसने यह ज़रूर कहा कि शायद इसका सम्बन्ध बढ़ती हुई उम्र से है। जब वह युवा थी तब वह और उसका पति लगभग रोज़ ही बीच पर जाते थे। उनके बहुत से मित्र थे और सभी वहाँ मिल जाते थे और कभी-कभी सर्फिंग करने चले जाते थे या वहीं बीच पर पार्टी शुरू हो जाती थी, बार्बिक्यू लगा लिया जाता था और स्वाभाविक ही शराब और नाच-गाना तो होता ही था। यह शानदार और सुखद जीवन कई साल तक चलता रहा।

लेकिन अब, इस तरीके से 20 साल जीवन गुज़ारने के बाद, उसे लगा कि वह अपने जीवन से इसके अतिरिक्त कुछ और भी चाहती है। पार्टियों और बीचों के अलावा कुछ और! न सिर्फ उसके पति बल्कि अपने मित्रों के बीच भी ऐसा कोई नही था, जो यह समझ सके कि भीतर ही भीतर वह क्या महसूस कर रही है। जब भी वह अपनी इस 'अतिरिक्त इच्छा' का ज़िक्र करती तो लोग उससे पूछते कि कहीं वह बच्चा तो नहीं चाहती। लोग उसे बच्चा पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करते, कहते कि अभी कुछ खास देर नहीं हुई है और शायद इससे उसे वह सब मिल जाए, जो वह चाहती है। लेकिन माँ बनने की उसे कोई अभिलाषा नहीं थी। वह कुछ और गहरे उतरना चाहती थी।

इस मरहले पर आकर वह रोने लगी और मुझसे कहा कि उसका कोई नहीं है जिसके सामने वह अपनी भावनाएँ व्यक्त कर सके या जिसके साथ वह इस विषय पर विस्तार से और गहराई के साथ बात कर सके, यह नहीं कि हर वक़्त सिर्फ बीचों पर मस्ती की जाए और उस मौज-मस्ती की ही हर वक़्त चर्चा होती रहे! जीवन की गहरी अनुभूतियों के बारे में भी चर्चा हो!

मैं उसकी बातें सुनता रहा और मैं ही था जो वह सब सिर्फ सुनता रहा, जो वह मेरे साथ साझा करना चाहती थी। जो भी उसके दिल में था उसने सब का सब मेरे सामने उगल दिया। अंत में मैंने उससे कहा कि मैं उसकी बात समझ सकता हूँ कि वह क्या चाहती है। वह किसी से बात करना चाहती थी। आस्ट्रेलिया में घूमते हुए मैं कई ऐसे लोगों से मिल चुका था और उसे निश्चित रूप से बता सकता था कि वहाँ कई ऐसे लोग हैं जो बातचीत में गहरे उतरते हैं और जो सिर्फ सतही चर्चा नहीं करते। मैंने उसे योग शुरू करने की सलाह दी और कहा कि वह योग स्टुडियो जा सकती है। योगिक दिनचर्या अपनाकर वह योग करने वाले लोगों के साथ, उनके विभिन्न समूहों के साथ जुड़ सकती है, जो अपने जीवनों में यही ‘अतिरिक्त’ चाहते हैं-और यदि उसे लगता है कि कोई एक समूह ठीक नहीं है तो वह किसी दूसरे समूह को भी आजमा सकती है! क्योंकि ऐसे बहुत से समूह हैं- तुम्हें साहचर्य प्राप्त होगा, तुम्हारे कई मित्र बनेंगे! जहाँ तक तुम्हारे विवाह का प्रश्न है: बातचीत करो और बातचीत करते रहो!

मुझे आशा ही नहीं बल्कि विश्वास है कि मैं उसकी मदद कर पाया हालांकि मैं बाद में उससे न कभी मिला और न उसके बारे में मुझे कोई जानकारी प्राप्त हो पाई।

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