अतीत में सगे संबंधियों द्वारा किए गए यौन शोषण से कैसे उबरें – 10 मार्च 13

मेरा जीवन

मैंने आपको बताया था कि सन 2005 में एक महिला मुझसे मिलने आई थी। जब वह छोटी बच्ची थी तब पिता उसका यौन शोषण किया करते थे। पिता के इस कुकृत्य का उसके मन पर ऐसा दुष्प्रभाव पड़ा कि वह अपने जीवन में कभी किसी पुरुष को स्वीकार नहीं कर पाई। यूं तो उसने कुछ पुरुषों से प्रेम भी किया मगर किसी को भी अपने दिल के नज़दीक नहीं आने दिया। उसकी कहानी बडी ह्रदयविदारक थी। अपने व्यक्तिगत काउंसलिंग सत्रों के दौरान इस तरह के कई मामले मेरे सामने आते रहते हैं। दुख के साथ कहना पड़ता है कि वास्तव में अनेकों लोगों के दुखद अतीत से मेरा परिचय हुआ।

बहुत सी महिलाओं ने मुझे बताया कि जिस पुरुष ने उनका यौन शोषण किया वह या तो उनका पिता, भाई, चाचा – ताऊ, पुरुष रिश्तेदार या अन्य कोई ऐसा था जिस पर उनके माता – पिता भरोसा करते थे। कुछ ने बताया कि उनके मां – बाप को यह बात पता थी लेकिन फिर भी उन्होंने इसके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया। कुछ इस डर से चुप रहीं कि मुंह खोलने पर कोई उन्हें प्यार नहीं करेगा या शर्म के मारे इस बात को अपने तक ही सीमित रखे रहीं। लेकिन आज जब वे पीछे मुड़कर देखती हैं तो खुद से सवाल करती हैं कि वे चुप क्यों रहीं।

एक अन्य महिला ने बताया कि वह जब दस साल की थी तो उसके दादा उसका यौन शोषण करते थे। वह अकसर उनसे मिलने जाया करती थी और उसके मां – बाप यह सोच खुश रहते थे कि बच्ची अपने दादा के साथ अच्छा समय बिताती है, बागवानी में उनका हाथ बंटाती है और उनके साथ बोर्ड गेम्स खेलती है। चौदह – पन्द्रह साल की उम्र तक वह दादा के घर जाती रही। क्यों? क्योंकि दादा उसे भरपूर जेबखर्च देते थे लेकिन इस शर्त पर कि वह ‘इस बात’ की भनक किसी को भी नहीं लगने देगी।

एक और महिला ने बताया कि उसे रात को अंधेरे में डर लगता है और इसकी वजह है उसका बड़ा भाई। जब वह बहुत छोटी थी तो वह रात में उसका यौन शोषण किया करता था। भाई और माता – पिता का प्यार खोने के डर से उसने इसके बारे में किसी को कुछ नहीं बताया। किशोरावस्था आने पर जब उसने यह बात मां – बाप को बताई तो उन्होंने इस पर यकीन ही नहीं किया।

किसी पुरुष रिश्तेदार का उनकी टांगों पर दबाव देते हुए हाथ रखना, धीरे धीरे हाथों को जांघों तक ले जाना या फिर उन्हें अपनी बाहों में लेकर छाती से चिपका लेना – ये कुछ ऐसी स्थितियां होती थीं जब वे बहुत असहज महसूस करती थीं और कई बार यह भी लगता था कि उनके शरीर पर अतिक्रमण हो रहा है। कई बार यह सब इतना दबे – ढके तरीके से होता था कि प्रतिकार करना ठीक नहीं लगता था और कई बार यह सब इतने आक्रामक तरीके से होता था कि दहशत और शर्म से उनकी ज़ुबान पर ताला पड़ जाता था। ऐसा नहीं कि केवल लड़कियों के साथ ऐसा होता है। लड़के, बच्चे और किशोर भी इसका शिकार होते हैं और ताउम्र इन गहरे ज़ख्मों के साथ जीते हैं।

यह तब भी होता था और आज भी हो रहा है। ऐसा सब जगह हो रहा है लेकिन इसकी चर्चा नहीं होती। जिसके साथ यह घिनौना काम होता है उसके लिए इस अनुभव से उबर पाना बहुत ही मुश्किल होता है। इसी कारण से यौन उत्पीड़न के शिकार ये लोग मेरे पास आते थे कि मैं इससे उबरने में उनकी मदद करूं।

जीवन में लगभग हर प्रकार की स्थिति से जूझ रहे व्यक्तियों की काउंसलिंग का खासा अनुभव मुझे है लेकिन मैंने पाया है कि यौन उत्पीड़न के मामलों में हमेशा ज़ख्म बहुत गहरे होते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि उन घटनाओं ने बच्चों के कोमल मन को इतना आहत किया होता है कि अब उन्हें किसी पर भरोसा नहीं होता। स्थिति तब और भी विकट हो जाती है जब अपराधी वह व्यक्ति होता है जिसे वे सबसे ज्यादा प्यार करते थे।

निश्चय ही ये निहायत व्यक्तिगत किस्म के मामले होते हैं और मैं हर मामले में परिस्थितियों के अनुरूप अलग अलग सलाह देता था। पीड़ित को चाहिए कि वह ऐसे व्यक्ति की तलाश करे जिस पर उसे पूरा भरोसा हो और जिसे वह अपने मन की बात बता सके। अपनी कहानी, इससे जुड़ी हुई अन्य बातें, आपके भय और इससे जुड़े हुए अन्य बुरे ख्यालात, जिन्हें आप बेझिझक उस व्यक्ति को बता सकें। ऐसे लोग भी होते हैं जो अपने उस बीते हुए जीवन के बारे में खुलकर नहीं बताते और उन यादों को इस उम्मीद में दिल के किसी गहरे कोने में छुपाए रखते हैं कि शायद समय के साथ ये बुरी स्मृतियां धुंधली पड़ जाएंगीं। लेकिन होता इससे ठीक उल्टा है। दिल के कोने में दबे हुए वे ज़ख्म रह – रहकर हरे होते रहते हैं।

एक अनुभवी थैरेपिस्ट या काउंसलर कुछ तकनीकों की मदद से इन यादों को भुलाने में आपकी मदद कर सकता है। वह आपकी मदद कर सकता है कि किस प्रकार इन्हें दुःस्वपनों की भांति भुलाकर नया जीवन शुरु किया जा सकता है। आपको इन बुरी यादों को भुलाना ही होगा। मैं इसी काम में लोगों की मदद कर रहा था।

Leave a Comment