मेरी पत्नी सजीली महिला नहीं है-और मैं इसीलिए उससे प्रेम करता हूँ – 1 मार्च 2015

कुछ दिन पहले हम अस्पताल में मोनिका को देखने गए थे। दिल्ली से वापस लौटते हुए कार में रमोना मेरे साथ बैठी थी। कुछ देर हम खामोश रहे, फिर रमोना मेरी ओर मुड़ी और कहा: ‘अस्पताल में मैंने एक महिला को देखा, शानदार पैंट और शर्ट पहने थी और बहुत रमणीय सुंदर (एलीगेंट) लग रही थी, जबकि वह डॉक्टर को दिखाने आई थी। वह अत्यंत सुघड़ और व्यवस्थित लग रही थी-और मुझे लगा कि मैं बिल्कुल सुघड़ और व्यवस्थित नहीं हूँ! कई बार मुझे लगता है मैं औरत ही नहीं हूँ!’

मैंने उसकी ओर सिर उठाकर देखा और मुस्कुराया। वह जींस पहनकर बैठी थी और उसका एक पैर सामने वाली खाली सीट पर पड़ा था और दूसरा दूर दाहिनी ओर, सामने वाली चालक और सहचालक की सीटों के बीच पसरा हुआ था और अपरा उसकी गोद में लेटी हुई थी।

नहीं, मेरी पत्नी सामान्यतया सजी संवरी नहीं रहती। वह बहुत कुछ है मगर अपने दैनिक जीवन में उसे सजीली या एलीगेंट नहीं कहा जा सकता।

अगर आप कभी उसे विकल्प चुनने का मौका दें तो वह शायद स्कर्ट की जगह जींस का चुनाव करेगी। व्यावहारिक, आसानी से गन्दी नहीं होती, आराम से स्कूटर की सवारी कर सकते हैं और बैठते हुए इस बात की चिंता नहीं करनी पड़ती कि कहीं अंडरवीअर तो नहीं दिख रही है। उसका दावा है कि उसकी सबसे पुरानी जींस आज भी सबसे अच्छी हैं।

उसके पास साड़ियाँ भी हैं-और गज़ब! वह साड़ियों में बहुत सुंदर भी लगती है- लेकिन वह उन्हें साल में एक या दो बार, शादियों या दीवाली जैसे कुछ ख़ास अवसरों को छोड़कर कभी नहीं पहनती। उसका रोज़मर्रा का दैनिक पहरावा सहज, सुविधाजनक और व्यावहारिक और आरामदेह होता है। जब वह सलवार-कमीज़ जैसे भारतीय वस्त्र भी पहनती है तो दुपट्टा नहीं लेती, जिसे कंधे और छातियाँ ढँकने के लिए भारतीय स्त्रियाँ अनिवार्य रूप से ओढ़ती हैं। सलवार-कमीज़ पर दुपट्टा अधिक मनोहर लगता है और भारतीय उसे गरिमामय, शालीन और अनिवार्य समझते हैं। मेरी पत्नी उसे असुविधाजनक और अनावश्यक मानती है। उसके कारण उसकी क्रियाशीलता बाधित होती है, उसे संभालना मुश्किल होता है और वह बार-बार गिर पड़ता है। पहले कई बार दुकानों, रेस्तराओं और दूसरी जगहों में वह उन्हें वहाँ रखकर भूल चुकी है और आखिर उसने उन्हें पहनना ही छोड़ दिया।

उसके बाल बड़े लम्बे और सुन्दर हैं। बार-बार चेहरे पर न आएँ इसलिए उन्हें वह एक गुच्छे में बांधकर पीछे लटका लेती है क्योंकि पोनीटेल बनाना बहुत आसान होता है और उसे बनाने में समय भी बहुत कम लगता है। हमारे शादी के दिन भी वह ब्यूटी पार्लर नहीं गई थी और खुद अपने हाथ से बहुत साधारण सी चोटी भर कर ली थी।

लेकिन भले ही कभी-कभी मेरी पत्नी अफ़सोस करती है कि वह कुछ अधिक सुघड़, कुछ व्यवस्थित और अप-टू-डेट क्यों नही है, मैं जानता हूँ कि वह उसके स्वभाव में ही नहीं है और मैं उसी रूप में उसे पसंद करता हूँ। बल्कि इस विशेषता के कारण ही उससे बेहद प्रेम करता हूँ!

वह बाथरूम में या आईने के सामने घन्टों खड़ी होकर बाल नहीं सँवारती, न ही मेकअप में समय बरबाद करती है और वह सहज, स्वाभाविक लगती है, उसका नैसर्गिक सौंदर्य उभर आता है और वैसे ही वह मुझे बहुत सुंदर लगती है! आज तक मैंने उसे मेकअप में नहीं देखा और उसने मुझे बताया है कि मुझसे मुलाक़ात से पहले भी मेकअप और सजने-सँवरने में उसकी कभी रूचि नहीं रही थी। अपनी जींस और शर्ट में वह हमारे निर्माण-स्थलों पर जाकर आराम से सीढ़ियाँ चढ़ जाती है और बच्चों के साथ बगीचे में दौड़ती-भागती और खेलती रहती है। स्वभाव से वह बहुत सुघड़ भले न हो लेकिन इसी कारण वह घुटनों तक जींस चढ़ाए, बाहों में रोटियों और नाश्ते के पैकेट्स थामे निडर और निःसंकोच नाव चढ़ जाती है और उन्हें बाढ़ग्रस्त परिवारों में वितरित कर पाती है। जहाँ नावें नहीं जा पातीं वहाँ वह पानी में खुद उतर जाती है कि पीड़ितों को कुछ खाने को मिल सके। हमारे शहर की गरीब बस्तियों में उबड़-खाबड़ सड़कों पर चलना उसके लिए बहुत आसान है और हमारे स्कूली बच्चों के घरों में मज़े में बैठकर घंटों बातें कर सकती है। उसे डर नहीं होता कि कपड़े गंदे हो जाएँगे।

मानता हूँ कि मेरी पत्नी वैसी सजी संवरी नहीं रहती जिसे आम तौर पर स्त्रियॉं का भूषण कहा जाता है-लेकिन वह मेरी अर्धांगिनी है, वह बहुत सुंदर है, शानदार है, भव्य है और मैं उससे दुनिया की किसी भी चीज़ से अधिक प्रेम करता हूँ!

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