मेरे पिछले जीवन की कथा – राजा, फिरौन और दवा-दारू करने वाला – 3 फरवरी 2013

मैंने आपको बताया था कि गूढ और रहस्यमय बातों और पश्चिमी गुरुवाद के बारे में मैं 2005 के अपने दौरे के दरमियान जान पाया। इसी वर्ष मैं पुनर्जन्म के विचार के प्रति लोगों के मोह, जो अब भी वहाँ व्याप्त है, को देखकर बहुत विचलित हुआ था।

उस वक़्त मैं स्वयं भी पुनर्जन्म पर विश्वास करता था। उसी विश्वास के बीच मैं बड़ा हुआ था। यह उस धर्म का हिस्सा था जिसका मैं प्रचार करता था, धर्मोपदेशक था। गुरु की भूमिका छोडने का अर्थ यह नहीं था कि मैंने अपने सारे विश्वासों को तिलांजलि दे दी थी। ऐसे में मैं तब तक यह विश्वास करता था कि जीवों का मृत्यु के बाद पुनर्जन्म होता है। भारत में तो इस बात पर भरोसा करना एक बहुत सामान्य सी बात है लेकिन उसे लोग बहुत महत्व भी नहीं देते। वे न तो अपने पिछले जन्म के बारे में बहुत सोचते हैं न ही उसके काल्पनिक विचारों में खोए रहते हैं। वे यह स्वीकार करते हैं कि हो सकता है कि हमारे बहुत से जन्म हुए हों और आगे भी होने वाले हों मगर हम उनके बारे में ठीक-ठीक कुछ भी जान नहीं सकते कि उन जन्मों में क्या हुआ था।

लेकिन जब इस दर्शन ने पश्चिम में प्रवेश किया और उसने रहस्यवादी तबकों में स्थान बनाया तो बहुत से अतींद्रियदर्शी पैदा हो गए जिन्होंने इस विचार को खुशी-खुशी अपना लिया। फिर वे यह दावा करने लगे कि वे भूत और भविष्य देख सकते हैं और सोचा कि क्यों न इस बात को भी एक नए 'प्रॉडक्ट' की तरह पेश किया जाए। अपने पिछले जन्म को देखें! पिछले जन्म को सुधारें! पिछले जन्म को देखकर आज की अपनी समस्याओं से निपटने का उपाय करें! भारत में इस तरह का 'बिजनेस' करते हुए मैंने किसी को नहीं देखा लेकिन पश्चिम में बहुत से ऐसे धंधेबाज मिल जाएंगे। पिछले जीवन का विश्लेषण करके 'कस्टमर्स' को आकृष्ट करने वाली एक ऐसी ही 'बिजनेस-वूमन' को जब मैंने करीब से देखा तो वह एक सुखद अनुभव बिल्कुल नहीं था।

एक जगह मैं व्यक्तिगत सत्र और कार्यशाला ले रहा था और बहुत व्यस्त था क्योंकि बहुत से लोग मुझसे मिलने आ रहे थे। जैसा कि नियम था, आयोजनकर्ता लोगों से मिलते, स्वागत करते और अगर मैं किसी दूसरे व्यक्ति के साथ व्यस्त होता तो उन्हें बाहर बैठने के लिए कहते और स्वाभाविक ही उनके बीच कुछ बातें भी होतीं। मुझे जल्दी ही पता चल गया कि यह महिला उनसे न सिर्फ बात करती थी और उनकी समस्याओं के बारे में पूछती थी बल्कि उन्हें उनकी समस्याओं का कारण भी बताती: उनका पिछला जन्म। वह काल्पनिक किस्सों से उन्हें बहलाती और उनके पिछले जीवन के किस्सों को दिव्यदृष्टि से जान लेने का दावा करती।

मज़ेदार बात यह थी कि इन सभी कहानियों में एक पात्र मैं भी होता था। वह उन्हें ऐसी कहानियाँ सुनाती जिसमें वे प्राचीन रोम में रहा करते थे और मैं वहाँ एक धनी और दबदबेवाला व्यक्ति था जिसने उनकी दयनीय हालत पर तरस खाकर मदद की थी। वह मिस्र के फ़िरौन, इंग्लैंड के राजा-रानी और पुरोहितों और दावा-दारू करने वालों के बारे में काल्पनिक किस्से उन्हें सुनाती थी। अगर वह अपनी बातों को लेकर इतना गंभीर न होती तो उसकी इन काल्पनिक कहानियों को, जिनमें हम सब किसी न किसी तरह एक-दूसरे से जुड़े होते थे, सुनना मनोरंजक हो सकता था लेकिन मामला यह था कि लोग यह शक करने लगे कि कहीं मैं भी तो इन सब बातों पर यकीन नहीं करता!

इससे बड़ी बात यह कि वह महिला उन दूसरे आयोजकों से ईर्ष्या करती थी जिनसे मेरा करीबी संबंध था। अपनी कथाओं में वह उन आयोजकों के प्रसंग में शांति, प्रेम और भाईचारे की बात नहीं करती थी बल्कि मेरे एक आयोजक के बारे में तो उसकी कहानी काफी हिंसक भी हो गई थी। उस कहानी में हम सब अमरीका के मूल निवासियों के रूप में सामने आते थे और पिछले जन्म में एक आयोजक ने मेरी हत्या तक कर दी थी। और अब उस कर्म के समाधान के लिए उस महिला को मेरी सहायता करना आवश्यक था। मेरे लिए अपने कानों पर भरोसा करना असंभव था!

फिर उसने ऐसा ही एक काल्पनिक किस्सा मेरे एक नजदीकी मित्र को सुनाया जो उसकी इसी ईर्ष्या से उद्भूत था। मेरी उस मित्र की एक छोटी बच्ची थी जो अभी घुटनों के बल चलना सीख रही थी और उसे चलते हुए देखना बड़ा मज़ेदार होता था, वह एक पैर कुछ ज़्यादा आगे बढ़ा देती और दूसरा अपने आप ही खिंचा चला आता। यह चलना सीखने की एक स्वाभाविक प्रक्रिया थी और सभी बच्चे अपने पूरे शरीर का उपयोग करते हुए इसी तरह चलना सीखते हैं। लेकिन इस अतींद्रियदर्शी महिला ने उससे कहा कि आपकी बच्ची पिछले जन्म में विकलांग थी! कौन सी माँ होगी जो ऐसी बात सुनना पसंद करेगी? ऐसी कटु बात कहना अपने आप में बहुत ही नासमझी का काम था और मेरी मित्र स्वाभाविक ही उसकी बात सुनकर बहुत नाराज़ हुई।

इस आयोजक के साथ मेरे रिश्ते अधिक दिन नहीं चल पाए और बाद में लोगों ने अपने और मेरे पिछले जन्मों के बहुत से किस्से बताए जो उस महिला ने उन्हें सुनाए थे। अनगिनत कल्पनाएँ और फंतासियाँ इन कहानियों में होती हैं जिनसे ये लोग दूसरों को डराते और बेवकूफ बनाते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसे लोग भी बहुतायत से पाए जाते हैं जो उन पर भरोसा कर लेते हैं।

Related posts

जब पिता ज़िंदा होकर भी मेरे नहीं थे…

जब पिता ज़िंदा होकर भी मेरे नहीं थे…

पिता पुत्र का वो रिश्ता, जो जीते-जी मर गया मेरे पिता का देहांत हो गया। मुझे यह समाचार भारत में ...
पिता के साथ मेरा सम्बन्ध

पिता के साथ मेरा सम्बन्ध

जब पिता कह दे कि मैं मर गया तेरे लिए! कल्पना करें मेरी उस मानसिक दशा की जबकि मैं बाप ...
जीवन का नया अध्याय, चुनौतियाँ और सबक

जीवन का नया अध्याय, चुनौतियाँ और सबक

मैं भी उनमें से एक हूँ. 7 साल पहले भारत छोड़ के चला गया. वहाँ व्यापार करता था और टैक्स ...
11 साल की उम्र में यौन शोषण की शिकार मेरी बहन को न बचा पाने की ग्लानि 

11 साल की उम्र में यौन शोषण की शिकार मेरी बहन को न बचा पाने की ग्लानि 

मेरी एक ही छोटी बहन थी परा, आज से 17 साल पहले जर्मनी के लिए एयरपोर्ट आते हुए कार दुर्घटना ...
भारत में मेरे परिवार ने मेरी पीठ में छुरा घोंपा है

भारत में मेरे परिवार ने मेरी पीठ में छुरा घोंपा है

बालेंदु लिख रहे हैं कि उन्होंने चैरिटी संस्था से इस्तीफा क्यों दिया और उनके परिवार ने उन्हें पैसे और संपत्ति ...
Apra

दुनिया भर के राजाओं की एक सी रुचियाँ: पैसा, युद्ध और औरतें – 17 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु अपनी पारिवारिक जयपुर यात्रा के बारे में लिख रहे हैं, जहाँ उन्होंने प्राचीन राजा-महाराजाओं के महलों, किलों और ...
अपरा का चौथा जन्मदिन समारोह - 10 जनवरी 2016

अपरा का चौथा जन्मदिन समारोह – 10 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु अपरा के चौथे जन्मदिन के समारोह का वर्णन कर रहे हैं, जिसे उसके जन्मदिन यानी कल, 9 जनवरी ...
कैनेडियन योग दल

हमें घनिष्ट रूप से जुड़ना पसंद है – एक कैनेडियन योग दल का आश्रम आगमन – 13 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे सारे आश्रम ने एक कैनेडियन दल के साथ बेहद सुखद और व्यस्त समय ...
जर्मनी के खूबसूरत दौरे से भारत वापसी - 6 दिसंबर 2015

जर्मनी के खूबसूरत दौरे से भारत वापसी – 6 दिसंबर 2015

भारत लौटकर स्वामी बालेंदु पिछले हफ्ते की अपनी पारिवारिक जर्मनी यात्रा का संक्षिप्त ब्यौरा प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसमें उनकी ...
जर्मनी में हमारी मौज-मस्ती - 29 नवंबर 2015

जर्मनी में हमारी मौज-मस्ती – 29 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपनी पत्नी और बेटी के साथ जर्मनी में बिताए दूसरे सप्ताह का विवरण लिख रहे हैं। उनके रोमांचक ...

Leave a Reply