मैंने आपको बताया था कि गूढ और रहस्यमय बातों और पश्चिमी गुरुवाद के बारे में मैं 2005 के अपने दौरे के दरमियान जान पाया। इसी वर्ष मैं पुनर्जन्म के विचार के प्रति लोगों के मोह, जो अब भी वहाँ व्याप्त है, को देखकर बहुत विचलित हुआ था।
उस वक़्त मैं स्वयं भी पुनर्जन्म पर विश्वास करता था। उसी विश्वास के बीच मैं बड़ा हुआ था। यह उस धर्म का हिस्सा था जिसका मैं प्रचार करता था, धर्मोपदेशक था। गुरु की भूमिका छोडने का अर्थ यह नहीं था कि मैंने अपने सारे विश्वासों को तिलांजलि दे दी थी। ऐसे में मैं तब तक यह विश्वास करता था कि जीवों का मृत्यु के बाद पुनर्जन्म होता है। भारत में तो इस बात पर भरोसा करना एक बहुत सामान्य सी बात है लेकिन उसे लोग बहुत महत्व भी नहीं देते। वे न तो अपने पिछले जन्म के बारे में बहुत सोचते हैं न ही उसके काल्पनिक विचारों में खोए रहते हैं। वे यह स्वीकार करते हैं कि हो सकता है कि हमारे बहुत से जन्म हुए हों और आगे भी होने वाले हों मगर हम उनके बारे में ठीक-ठीक कुछ भी जान नहीं सकते कि उन जन्मों में क्या हुआ था।
लेकिन जब इस दर्शन ने पश्चिम में प्रवेश किया और उसने रहस्यवादी तबकों में स्थान बनाया तो बहुत से अतींद्रियदर्शी पैदा हो गए जिन्होंने इस विचार को खुशी-खुशी अपना लिया। फिर वे यह दावा करने लगे कि वे भूत और भविष्य देख सकते हैं और सोचा कि क्यों न इस बात को भी एक नए 'प्रॉडक्ट' की तरह पेश किया जाए। अपने पिछले जन्म को देखें! पिछले जन्म को सुधारें! पिछले जन्म को देखकर आज की अपनी समस्याओं से निपटने का उपाय करें! भारत में इस तरह का 'बिजनेस' करते हुए मैंने किसी को नहीं देखा लेकिन पश्चिम में बहुत से ऐसे धंधेबाज मिल जाएंगे। पिछले जीवन का विश्लेषण करके 'कस्टमर्स' को आकृष्ट करने वाली एक ऐसी ही 'बिजनेस-वूमन' को जब मैंने करीब से देखा तो वह एक सुखद अनुभव बिल्कुल नहीं था।
एक जगह मैं व्यक्तिगत सत्र और कार्यशाला ले रहा था और बहुत व्यस्त था क्योंकि बहुत से लोग मुझसे मिलने आ रहे थे। जैसा कि नियम था, आयोजनकर्ता लोगों से मिलते, स्वागत करते और अगर मैं किसी दूसरे व्यक्ति के साथ व्यस्त होता तो उन्हें बाहर बैठने के लिए कहते और स्वाभाविक ही उनके बीच कुछ बातें भी होतीं। मुझे जल्दी ही पता चल गया कि यह महिला उनसे न सिर्फ बात करती थी और उनकी समस्याओं के बारे में पूछती थी बल्कि उन्हें उनकी समस्याओं का कारण भी बताती: उनका पिछला जन्म। वह काल्पनिक किस्सों से उन्हें बहलाती और उनके पिछले जीवन के किस्सों को दिव्यदृष्टि से जान लेने का दावा करती।
मज़ेदार बात यह थी कि इन सभी कहानियों में एक पात्र मैं भी होता था। वह उन्हें ऐसी कहानियाँ सुनाती जिसमें वे प्राचीन रोम में रहा करते थे और मैं वहाँ एक धनी और दबदबेवाला व्यक्ति था जिसने उनकी दयनीय हालत पर तरस खाकर मदद की थी। वह मिस्र के फ़िरौन, इंग्लैंड के राजा-रानी और पुरोहितों और दावा-दारू करने वालों के बारे में काल्पनिक किस्से उन्हें सुनाती थी। अगर वह अपनी बातों को लेकर इतना गंभीर न होती तो उसकी इन काल्पनिक कहानियों को, जिनमें हम सब किसी न किसी तरह एक-दूसरे से जुड़े होते थे, सुनना मनोरंजक हो सकता था लेकिन मामला यह था कि लोग यह शक करने लगे कि कहीं मैं भी तो इन सब बातों पर यकीन नहीं करता!
इससे बड़ी बात यह कि वह महिला उन दूसरे आयोजकों से ईर्ष्या करती थी जिनसे मेरा करीबी संबंध था। अपनी कथाओं में वह उन आयोजकों के प्रसंग में शांति, प्रेम और भाईचारे की बात नहीं करती थी बल्कि मेरे एक आयोजक के बारे में तो उसकी कहानी काफी हिंसक भी हो गई थी। उस कहानी में हम सब अमरीका के मूल निवासियों के रूप में सामने आते थे और पिछले जन्म में एक आयोजक ने मेरी हत्या तक कर दी थी। और अब उस कर्म के समाधान के लिए उस महिला को मेरी सहायता करना आवश्यक था। मेरे लिए अपने कानों पर भरोसा करना असंभव था!
फिर उसने ऐसा ही एक काल्पनिक किस्सा मेरे एक नजदीकी मित्र को सुनाया जो उसकी इसी ईर्ष्या से उद्भूत था। मेरी उस मित्र की एक छोटी बच्ची थी जो अभी घुटनों के बल चलना सीख रही थी और उसे चलते हुए देखना बड़ा मज़ेदार होता था, वह एक पैर कुछ ज़्यादा आगे बढ़ा देती और दूसरा अपने आप ही खिंचा चला आता। यह चलना सीखने की एक स्वाभाविक प्रक्रिया थी और सभी बच्चे अपने पूरे शरीर का उपयोग करते हुए इसी तरह चलना सीखते हैं। लेकिन इस अतींद्रियदर्शी महिला ने उससे कहा कि आपकी बच्ची पिछले जन्म में विकलांग थी! कौन सी माँ होगी जो ऐसी बात सुनना पसंद करेगी? ऐसी कटु बात कहना अपने आप में बहुत ही नासमझी का काम था और मेरी मित्र स्वाभाविक ही उसकी बात सुनकर बहुत नाराज़ हुई।
इस आयोजक के साथ मेरे रिश्ते अधिक दिन नहीं चल पाए और बाद में लोगों ने अपने और मेरे पिछले जन्मों के बहुत से किस्से बताए जो उस महिला ने उन्हें सुनाए थे। अनगिनत कल्पनाएँ और फंतासियाँ इन कहानियों में होती हैं जिनसे ये लोग दूसरों को डराते और बेवकूफ बनाते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसे लोग भी बहुतायत से पाए जाते हैं जो उन पर भरोसा कर लेते हैं।
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