इस वेश्या से मिलने के बाद वेश्यावृत्ति के बारे में मेरे खयालात आमूलचूल बदल गए – 3 अगस्त 2014

मुझे याद है कि कैसे सन 2006 में मेरा एक व्यक्तिगत सत्र बड़ा दिलचस्प रहा था। वह एक वेश्या के साथ मेरी मुलाक़ात थी-और वास्तव में उसने उस व्यवसाय के बारे में मेरी धारणा को पूरी तरह बदलकर रख दिया! उसने मेरे विचारों को साफ़ किया और इस धंधे में लगी औरतों की ओर मेरे दिमाग के दरवाजों को खोल दिया! संभव है उसके बारे में आपको बताने पर आपके साथ भी ऐसा ही हो!

उस महिला के साथ मुलाक़ात से पहले मैं वेश्याओं के बारे में सोचकर उनके प्रति दया से भर जाता था। मैंने गरीब महिलाओं को अपना शरीर बेचने के लिए मजबूर करने वाले माफिया संगठनों के बारे में पढ़ और सुन रखा था। मानव तस्करी में मुब्तिला लोगों के बारे में, जो गरीब मुल्कों की महिलाओं का अपहरण करके उन्हें अमीर मुल्कों को निर्यात कर देते हैं, जहाँ बहुत बुरी स्थिति में रहते हुए उन्हें किसी दलाल के लिए यह घृणित काम करना पड़ता है। उन महिलाओं के बारे में, जिन्हें नशीली दवाएँ खिलाई जाती हैं, उन पर बलात्कार किया जाता है, मारा-पीटा और डराया-धमकाया जाता है और पैसे के लिए एक साथ कई पुरुषों के साथ सम्भोग करने पर मजबूर किया जाता है। खुद को समर्पित करने को मजबूर, शारीरिक शोषण और वेश्या कहलाने की गहरी प्रताड़ना के बाद गहरे क्लेश और अवसाद में डूबी हुई इन महिलाओं को समाज द्वारा बेहद नीची नज़र से देखा जाता है।

तो वेश्यावृत्ति के बारे में मेरी यह धारणा थी और मुझे लगता है कि ऐसा सोचने वाला मैं अकेला व्यक्ति नहीं हूँ। भारत में मैंने अनगिनत महिलाओं को, और पुरुषों को भी, यह कहते सुना है कि "कोई भी महिला स्वेच्छा से अपना शरीर नहीं बेच सकती!" मैंने लोगों को यह भी कहते सुना है कि अगर कोई दूसरा विकल्प मौजूद हो तो पैसे के लिए कोई महिला यौन सम्बन्ध बनाने के लिए तैयार नहीं होगी। मजबूरी की पराकाष्ठा होने पर, अपने बच्चों या खुद अपने अस्तित्व का संकट उपस्थित होने पर ही कोई महिला ऐसा कर सकती है।

तो जब इस महिला से मैं मिला और जब उसने कहा कि वह एक वेश्या है तो मेरी यह धारणा तहस-नहस हो गई!

उसके साथ बातचीत बड़ी अच्छी रही, उसके साथ बिताया गया समय अच्छा रहा, जैसा कि हजारों लोगों से मिलते हुए हमेशा ही होता रहा है। हमारे बीच बहुत सामान्य सी बातचीत हुई और उसने अपने धंधे के बारे में बड़े खुले मन से बात की। स्वाभाविक ही मुझे कुतूहल हो रहा था क्योंकि, जैसा कि मैं एक वेश्या के बारे में कल्पना किया करता था, उसके विपरीत यह महिला किसी प्रताड़ित महिला जैसी नहीं लग रही थी!

उसने कहा कि यह उसका काम है, उसका व्यवसाय है और पैसा कमाने के उद्देश्य से ही उसने इस व्यवसाय का चुनाव किया है। उसके साथ किसी ने जबरदस्ती नहीं की थी और न ही वह किसी दलाल के लिए काम करती थी। कुछ साल पहले उसने अपना प्रशिक्षण पूरा किया था और एक सामान्य क्लर्क के रूप में काम करना प्रारभ किया था। शौक के रूप में उसे नाचना पसंद था और कुछ अतिरिक्त कमाई के उद्देश्य से उसने क्लबों में नाचना शुरू कर दिया। उस क्लब में काम कर रही दूसरी लड़कियों से बात करने पर उसे इस विकल्प की जानकारी प्राप्त हुई, जिसके ज़रिये उसे कुछ और ज़्यादा आमदनी हो सकती थी। और इस तरह एक व्यवसाय के रूप में उसने वेश्यावृत्ति चुना।

अब वह सिर्फ यही काम करती है और इस विषय में मुझे अचंभित देखकर वह हँसने लगी। 'मेरे अपने कुछ अवकाश के दिन होते हैं, कुछ त्योहारों की छुट्टियाँ, जैसे दूसरे सब लोगों की होती हैं। मैं टैक्स भरती हूँ और मेरा स्वास्थ्य-बीमा भी है। यह मेरा व्यवसाय है, मैं शारीरिक श्रम करके पैसा कमाती हूँ, जैसा की एक नृत्यांगना कमाती है, बल्कि जैसे निर्माण कार्य में लगा कोई मजदूर कमाता है! और सबसे अच्छी बात यह है कि मैं खुद अपनी मर्ज़ी की मालिक हूँ!

उस वेश्या ने सोच-समझकर अपना व्यवसाय चुना था। मैं दंग रह गया। इस मुलाक़ात ने वेश्यावृत्ति के बारे में मेरी धारणाओं को बदल दिया। हालांकि मैं जानता हूँ कि ऐसी बहुत सी बुरी बातें हो रही हैं, जिनकी पहले मैंने कल्पना की थी- खासकर भारत जैसे देशों में, जहाँ वेश्यावृत्ति गैरकानूनी है-अब मैं वेश्यावृत्ति के बारे में अलग नज़रिया रखता हूँ और यह जानकर खुश हूँ कि दुनिया में ऐसी भी महिलाएँ हैं जो इस व्यवसाय को अपनाकर प्रसन्न हैं।

दरअसल, हमारे बीच बहुत अच्छी बातचीत हुई, जिसके बारे में मैं अगले हफ्ते आपको बताऊँगा।

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