सन 2007 की शुरुआत में जब मैं आस्ट्रेलिया पहुँचा तो स्वाभाविक ही वहाँ मुझे कई जगहों की यात्राएँ करनी थी क्योंकि मेरे पास कई लोगों के निमंत्रण थे जो अपने यहाँ मेरा कार्यक्रम दोबारा आयोजित करना चाहते थे। इसी तरह कुछ नए आयोजक भी थे, जिनसे मैं पहली बार मिला और कुछ ऐसे भी, जिनसे मैं एक साल के अंतराल के बाद पुनः मिल रहा था। इनमें से एक मित्र ऐसा भी था जो इस बीच एक बार हमसे मिलने भारत भी आ चुका था। और जब हमें बातचीत करने की फुरसत मिली तो जो उसने बताया उस पर मैं विश्वास नहीं कर सका!
मेरा मित्र बहन के साथ हुई दुर्घटना से कुछ पहले आश्रम आ चुका था इसलिए उसे जानता था। लिहाजा कुछ समय हम उसे याद करते रहे। लेकिन फिर उसने बताया कि उसे एक सुनहरा मौका मिला है और उसे लेकर वह बहुत खुश और उत्साहित है: उसने किसी से सुना कि निवेश की कोई स्कीम है, जिसमें निवेश करने पर थोड़े समय में ही निवेशित धन का कई गुना वापस प्राप्त मिलने की पूरी उम्मीद है! वह एक व्यक्ति को जानता था, जिसने उस स्कीम में अपना धन लगाया था और वह इस निवेश की बदौलत बहुत जल्द अमीर हो जाने वाला था!
मुझे याद नहीं है कि ठीक-ठीक वह स्कीम क्या थी मगर मुझे लगता है कि वह एक कोश था जिसका संबंध साउथ अफ्रीका में सोने के खनन से था। किसी ने उसे बताया था कि सिर्फ पैसा लगाने वालों की ज़रूरत है और जैसे ही सोना निकलेगा, सब मालामाल हो जाएँगे!
उसकी बात सुनकर मैं अचंभित रह गया था: हमारे यहाँ, भारत में, ऐसे कई घोटाले हो चुके हैं और आज भी हो रहे हैं। मैंने उनके बारे में इतनी बार सुना है और अखबारों में विस्तार से पढ़ता रहता हूँ कि इन कपटपूर्ण स्कीमों की कार्य प्रणाली को पूरी तरह समझ चुका हूँ: लोगों को उनके पैसे का जल्द से जल्द कई गुना वापस करने का वादा करके, झाँसा देकर पैसा इकट्ठा करना। मुझे घोटाले का सुनकर इतना आश्चर्य नहीं हुआ जितना यह तथ्य जानकर हुआ कि यह सब आस्ट्रेलिया में भी होता है और स्वाभाविक ही वहाँ भी ऐसे लोग पाए जाते हैं, जो इन स्कीमों के झाँसे में आ जाते हैं!
उनमें से एक मेरा यह मित्र भी था। मैंने उससे पूछा, "तुमने तो उस स्कीम में पैसा नहीं लगाया होगा?" मुझे शक था कि उसने ज़रूर लगाया होगा। और यही हुआ था। "तुम्हें तो पता है कि मेरे पास ज़्यादा पैसे नहीं होते लेकिन जो भी मेरे पास जमा था, वह मैंने उसमें निवेश कर दिया है।" उसने मुझे आगे बताया कि करोड़पति होने के बाद वह क्या-क्या करेगा और मुझे भी उस अचूक और सुनिश्चित स्कीम में सहभागी होने के लिए सहमत करने की कोशिश करने लगा।
स्वाभाविक ही मैं धोखेबाज़ों के चंगुल में फँसकर अपना पैसा खोना नहीं चाहता था। मैंने अपना शक उस पर भी ज़ाहिर कर दिया था लेकिन स्पष्ट ही वह स्कीम के विरुद्ध कुछ भी सुनना नहीं चाहता था।
लेकिन इससे मुझे यह बात समझ में आई कि धोखेबाज़ दुनिया भर में मौजूद हैं और दुर्भाग्य से उनके झाँसे में आने वाले लोग भी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। इससे बचने का एकमात्र उपाय इस बात को समझना है कि कोई भी आपको यूँ ही रुपए क्यों देने लगा! पैसा कमाने के लिए आपको अथक प्रयास करना पड़ता है, श्रम करना पड़ता है!
Related posts
जब पिता ज़िंदा होकर भी मेरे नहीं थे…
पिता के साथ मेरा सम्बन्ध
जीवन का नया अध्याय, चुनौतियाँ और सबक
11 साल की उम्र में यौन शोषण की शिकार मेरी बहन को न बचा पाने की ग्लानि
भारत में मेरे परिवार ने मेरी पीठ में छुरा घोंपा है
दुनिया भर के राजाओं की एक सी रुचियाँ: पैसा, युद्ध और औरतें – 17 जनवरी 2016
अपरा का चौथा जन्मदिन समारोह – 10 जनवरी 2016
हमें घनिष्ट रूप से जुड़ना पसंद है – एक कैनेडियन योग दल का आश्रम आगमन – 13 दिसंबर 2015
जर्मनी के खूबसूरत दौरे से भारत वापसी – 6 दिसंबर 2015
