झूठ, बहानेबाजी और देरी – बेईमानी पेशेवर रवैया नहीं है – 19 अप्रैल 2015

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

मैंने आपसे कहा था कि अपने रविवार के ब्लॉगों में मैं अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में, आश्रम के क्रियाकलापों के बारे में और जब मैं कंप्यूटर पर व्यस्त नहीं होता या अपरा के साथ खेल नहीं रहा होता, तब मेरे दिन कैसे गुज़र रहे होते हैं, इस बारे में आपको बताया करूँगा। पिछले कई हफ्तों से, स्वाभाविक ही, उनका विषय अधिकतर हमारा आयुर्वेदिक रेस्तराँ, ‘अम्माजी’ज़’ रहता आया है, जिसे हम जल्द ही शुरू करने जा रहे हैं। रेस्तराँ के अंदरूनी हिस्सों की सजावट और आवश्यक उपकरणों और फर्नीचर से उसे सुसज्जित करने का काम काफी समय से चल रहा है मगर इन दिनों मैं महसूस कर रहा हूँ कि यहाँ काम कर रहे बहुत से लोगों का रवैया पेशेवराना नहीं है, वे अपने वादे के मुताबिक समय पर नहीं आते, जिसके कारण बार-बार काम में व्यवधान उपस्थित होता है, उसमें देर होती रहती है, लिहाजा चिड़चिड़ाहट और क्रोध के वशीभूत मुझे लगातार उनसे हुज्जत करनी पड़ रही है!

सीधी सी बात है, लोग ईमानदार नहीं हैं! वे कहेंगे, ‘मैं कल आऊँगा’ जब कि मन ही मन उन्हें पता होता है कि वे झूठ बोल रहे हैं, वे किसी भी हालत में कल नहीं आयेंगे! बड़ी बेशर्मी से वे आपके मुँह पर सफ़ेद झूठ बोल देते हैं-और इस बात की भी उन्हें परवाह नहीं होती कि आप भी जानते हैं कि वे झूठ बोल रहे हैं!

मैं आपको इसका सबसे बड़ा उदाहरण देता हूँ: हमारा बाँस का ठेकेदार। बार-बार देर करने के बाद, कुछ मजदूरों के साथ बाँस का पहला ट्रक हमारे यहाँ आकर खड़ा हुआ और काम शुरू हुआ। लेकिन, उसके बाद अब तक बाँस की दूसरी खेप भी आ जानी चाहिए थी, जिससे काम लगातार चलता रहे। लेकिन आज तक वह ठेकेदार, जिसे बाँस मुहैया कराना था, नहीं आया है, जबकि उसे एक हफ्ता पहले आ जाना चाहिए था!

जो बात मुझे सबसे ज़्यादा हैरान करती है, वह है इन लोगों का काम के प्रति रवैया! पहली बात तो यह कि वह कभी भी साफ बात नहीं करेगा, ‘मैं 12 को आ जाऊँगा, ज़्यादा से ज़्यादा, 13 को’ लेकिन फिर खुद ही आने का दिन तय करने के बाद भी दोनों दिन उसका अता-पता नहीं होगा! वह उसे आगे किसी दिन के लिए मुल्तवी कर देगा और फिर अपने संभावित आगमन की अगली दो तारीखें हमें बताएगा!

स्वाभाविक ही, उसके पास कोई न कोई बहाना होता ही है: एक बार उसने कहा वह बीमार पड़ गया था, अगली बार उसकी पत्नी बीमार पड़ गई थी, और एक बार बाँस से लदे ट्रक की कमानी टूट गई थी, जिसे बनवाना ज़रूरी था और एक बार यह कि कोई प्रदर्शनी चल रही थी और उसका वहाँ उपस्थित रहना बहुत ज़रूरी था-मज़ेदार बात यह कि जैसे प्रदर्शनी का इतना बड़ा आयोजन अचानक ही तय हो गया हो कि वह पहले से इस विषय में सोच नहीं पाया, तदनुसार आने का दिन तय नहीं कर पाया! एक बार उसने कहा कि वह दोपहर में, ठीक एक बजे हाजिर हो जाएगा, फिर दोपहर दो बजे उसका एसएमएस आया कि वह आ रहा है, रास्ते में है लेकिन झूठ की हद देखिए कि फिर उस दिन वह आया ही नहीं! एक बार उसने लिखा वह चल चुका है, रास्ते में है और उस पर विश्वास करके मैंने अपनी इंटीरियर डेकोरेटर को बुला लिया-लेकिन वह कई घंटे देरी से आया, यहाँ तक कि वह महिला इंटीरियर डेकोरेटर एक बार फिर थक-हारकर वापस चली गई…

एकाध बार हो तो बात समझ में आती है और उससे बहुत फर्क भी नहीं पड़ता लेकिन जब यह बार-बार हो, हर मामले में हो तो हर बार जब वह कहता है कि आऊँगा, आप जानते होते हैं कि उसका कोई भरोसा नहीं, किसी न किसी बहाने से वह नहीं आएगा या देर से आएगा और कोई झूठी बात कहकर टाल जाएगा! तब आपको समझ जाना चाहिए कि यह व्यक्ति इतना बेशर्म है कि न तो उसे देर से आने या न आकर वादाखिलाफी करने की कोई शर्म है, न अपराधबोध। उसकी कोताही के चलते आपके काम के लंबित होते चले जाने का उसे कोई अफ़सोस भी नहीं है। उसे इस बात की भी चिंता नहीं है कि उसकी लापरवाही के कारण आपका कितना नुकसान हो रहा है और इसलिए वह किसी बात के लिए क्षमाप्रार्थी भी नहीं है!

इस समस्या के पीछे उन लोगों का रवैया है और यह एक तथ्य है कि ऐसी सोच वाले लोग ईमानदारी या ज़बान की कोई कीमत नहीं समझते!