प्रेम आपके जींस से ज्यादा महत्वपूर्ण है – 23 फरवरी 2014

मेरा जीवन

पिछले सप्ताह मैंने एक माँ के बारे में आपको बताया था, जो अपनी 18 वर्षीय बेटी को लेकर मेरे व्यक्तिगत सत्र में आई थी। उसने अपनी बेटी के 18वें जन्मदिन पर उसे बताया कि जिस व्यक्ति ने उसका लालन पालन किया था और जिसे वह अपना पिता मानती है वह दरअसल उसका जैविक पिता नहीं है। लड़की का जैविक पिता एक और व्यक्ति था, जिसके साथ अतीत में उस महिला का कुछ दिनों का विवाहेतर संबंध रहा था मगर अब उसके बारे में वह कुछ भी नहीं जानती थी। अब यह ज़िम्मेदारी मुझ पर आ पड़ी थी कि उस लड़की से बात करूँ जो, स्वाभाविक ही, मानसिक रूप से बुरी तरह हिल गई थी।

माँ व्यथित थी और अपराधबोध से ग्रसित नज़र आ रही थी क्योंकि उसने अपनी बेटी को इस मानसिक हड़कंप में डाल दिया था। उसने विस्तार के साथ मुझे बताया कि क्यों उसने इतने लंबे अंतराल के बाद अपनी बेटी पर यह रहस्य उजागर किया। दरअसल बेटी को इतने साल झूठ और धोखे में रखना उसे अनैतिक लग रहा था और यह अपराधबोध उसे भीतर से खा रहा था। इस झूठ को उसने अपने दिल में छिपाकर रखा था और उसे लगता था कि उसके बढ़ते बोझ से एक दिन वह फट पड़ेगा।

और मैं सोच रहा था कि इतने लंबे अंतराल के बाद इस सत्य को उजागर करने की कोई आवश्यकता ही नहीं थी। लड़की अब बालिग हो चुकी थी और इस भयावह सच से दूर, जिस स्थिति में थी, उसी में खुश थी। यह सत्य उसे कोई लाभ नहीं पहुँचाने वाला था। उसकी चिंता करने कोई और व्यक्ति नहीं आने वाला था क्योंकि उस व्यक्ति का कोई संपर्क-सूत्र उनके पास नहीं था। इसके विपरीत इस रहस्योद्घाटन से उसने उस पिता को भी खो दिया था, जिसे वह पिता मानती आई थी और जो हमेशा-हमेशा के लिए उसका पिता रहा आता! लेकिन अब ये विचार व्यर्थ थे क्योंकि उसने पहले मुझसे कोई सलाह नहीं ली थी। तब मैंने लड़की से बात की।

लड़की के दिमाग में वह पुरुष, जिसके जींस वह लिए हुए थी, पूरी तरह मौजूद था। मैं उससे किस तरह मिल सकती हूँ? अगर मैं उसकी खोज करूँ और पा जाऊँ तो वह मेरे साथ कैसा व्यवहार करेगा? और मेरे माँ के पूर्व-पति का क्या, जिसे मैं अपना पिता मानती हूँ? समझ में नहीं आता क्या सोचूँ, क्या करूँ। मैं सिर्फ बैठकर रो सकती हूँ क्योंकि मेरा सारा जीवन ही झूठ का पुलिंदा बन गया है! मैं आज तक एक झूठी ज़िंदगी जी रही थी! मुझे महसूस होता है जैसे मेरे शरीर का कोई महत्वपूर्ण हिस्सा मुझसे टूटकर अलग हो गया है!

मैंने उससे कहा कि वह अब एक वयस्क है और चीजों को देखने-समझने का उसके पास एक परिपक्व नज़रिया होना चाहिए। एक मजबूत महिला की तरह उसे अपने भीतर इस झटके को, जो महज एक जानकारी है, झेलने की हिम्मत पैदा करनी चाहिए और उसे देखना चाहिए, जो पीछे छूट रहा है: तब वह पाएगी कि वास्तव में कुछ भी नहीं बदला है।

मेरी नज़र में यह बिल्कुल महत्वपूर्ण नहीं था कि कौन उसका जैविक पिता है। आप उसका नाम नहीं जानते, उसके बारे में अब तक कभी सोचा भी नहीं और उसके बगैर आपने किसी बात की कमी भी महसूस नहीं की-अब उसकी कमी क्यों महसूस हो? अब वह अचानक इतना महत्वपूर्ण क्यों हो जाए कि उसके विचार मात्र से आप अपनी ज़िंदगी तहस नहस कर बैठें?

अगर आप मजबूत नहीं हैं तो यह बात आपको भ्रमित करती रहेगी। इसके विपरीत अगर आप उसे सही परिप्रेक्ष्य में देखने की हिम्मत जुटा लें तो पाएंगे कि आप अब भी उसी ठोस ज़मीन पर खड़े हुए हैं, दुनिया में आपकी जगह ज़रा भी नहीं बदली है। जिस पुरुष ने आपका लालन-पालन किया और जो आपसे प्रेम करता है और जिससे आप भी बहुत प्रेम करती हैं वही हमेशा आपका पिता था और हमेशा-हमेशा के लिए आपका पिता बना रहेगा! आपका जींस उस प्रेम के सामने कोई मानी नहीं रखता, जो उस व्यक्ति से आपको अब तक प्राप्त होता रहा है और आगे भी जीवन भर प्राप्त होता रहेगा!

आप जैसी भी हैं, एक परिपूर्ण व्यक्ति हैं और सबसे पहले आपको अपने जीवन में स्थिरता प्राप्त करने की कोशिश करनी चाहिए। बाद में अगर आपका दिल चाहे तो उस व्यक्ति की खोज भी कर सकती हैं मगर इस खोज से कोई बड़ी आशा न रखें। यह खोज तभी शुरू करें जब आपको लगे कि उस खोज के परिणाम आपकी मौजूदा ज़िंदगी पर कोई असर नहीं डाल पाएंगे।

वही बने रहें जो आप अब तक थीं। प्रेम आपके जींस से ज़्यादा महत्वपूर्ण है!

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