मानसिक शांति अधिक महत्व्पूर्ण है या धन-दौलत? 30 नवम्बर 2014

मेरा जीवन

सन 2007 में मैं फिर से कुछ हफ्तों के लिए आस्ट्रेलिया यात्रा पर निकल गया था। जब एक साल पहले मैं वहाँ था तब एक दंपत्ति के साथ रहा था, जो हर वक्त लड़ते रहते थे। मुझे बड़ा आश्चर्य होता था कि जब वे पूरे समय लड़ते रहते हैं तो फिर एक साथ क्यों रहते हैं! जबकि दोनों मेरे आने से बड़े खुश थे, पुरुष के साथ मेरा संपर्क अधिक रहा और उनके आपसी संबंधों के बारे में मेरी उससे काफी बातचीत भी हुई। वह किसी भी हालत में उस महिला से अलग नहीं होना चाहता था और अपने इस दृढ निश्चय के उसने कुछ बहुत ठोस कारण भी बताए। लेकिन जब मैं 2007 में पुनः उससे मिला तो पता चला, उसने अपना इरादा बदल दिया है।

जब मुझे मित्र ने सम्बन्ध टूटने का कारण बताया तो वास्तव में मैं बहुत अचंभित हुआ। इस महिला के साथ वह पाँच साल से रह रहा था। उनके बीच सम्बन्ध की शुरुआत के साल भर बाद ही वह महिला उसके साथ रहने आ गई थी। जिस घर में वह रहता था वह उसी का घर था और घर के आसपास की काफी बड़ी और कीमती ज़मीन का मालिक भी वही था। आस्ट्रेलिया में मैंने खेतों और बाग़-बगीचों वाले ऐसे बहुत से घर देखे थे। अच्छी-खासी बहुत विशाल स्थान और निश्चित ही एक व्यक्ति के लिए आवश्यकता से बहुत बड़े। इसलिए जब उसकी गर्लफ्रेंड उसके साथ रहने आई तो स्वाभाविक ही वह बहुत खुश हुआ।

लेकिन लगभग दो साल बाद ही उनके बीच मुश्किलें पैदा होनी शुरू हो गईँ । छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने लगे। फिर वे लड़ाइयाँ बड़ी और महत्वपूर्ण बातों तक भी खिंचती चली गईँ। जब 2005 में मैं उनके यहाँ आया था तब उन्हें साथ रहते हुए चार साल हो चुके थे और वे लगभग रोज़ ही छोटी-मोटी बातों पर लड़ते-झगड़ते रहते थे और उनके झगड़े बड़े वाद-विवादों में परिणत हो जाते, जिनमें पिछले झगड़ों को याद कर-करके एक-दूसरे पर दोषारोपण किया जाता और इस तरह उनके बीच तनाव बढ़ता जा रहा था। दरअसल मुझे एहसास हो चुका था कि दोनों एक-दूसरे के प्रति इतने कटु हो चुके हैं कि उनके बीच प्रेम का कोई स्थान नहीं हो सकता था।

जब मैंने नपे-तुले शब्दों में इस बात को उसके सामने रखा तो मुझे लगा वह भी इस बात को अच्छी तरह जानता-समझता है। उसने कुछ भी छिपाया नहीं और तब मैंने उससे साफ़ शब्दों में कहा, ‘तो फिर तुम अलग क्यों नहीं हो जाते?’

तब मुझे पता चला कि आस्ट्रेलिया में एक क़ानून है, जिसके अनुसार साथ रहने वाले दो व्यक्तियों को एक-दूसरे की संपत्ति में हक़दार होने के लिए शादीशुदा होना आवश्यक नहीं है। मेरे मित्र ने मुझे बताया कि भले ही यह जगह उसकी मिल्कियत है, उसका एक हिस्सा अब उसकी भूतपूर्व साथी का हो चुका है क्योंकि वह उसके साथ दो साल से अधिक समय तक रह चुकी है। तो भले ही वे अलग हो जाएँ, भले ही वह छोड़कर चली जाए, कानूनन वह मित्र की संपत्ति के एक हिस्से की मालिक मानी जाएगी।

मेरे यह पूछने पर कि क्या पूरे समय लड़ते हुए साथ रहना और इस तरह अपनी मानसिक शान्ति खोना उचित है और वह भी सिर्फ संपत्ति के पीछे या पैसे के पीछे, तो वह कुछ देर के लिए खामोश हो गया कुछ कह नहीं पाया लेकिन अंत में, निर्णयात्मक स्वर में उसने कहा: नहीं, यह सिर्फ पैसे या धन-दौलत के लिए नहीं था-संभव है हमारे बीच यह छोटे से अंतराल के लिए हो और कुछ समय बाद हम फिर एक साथ रहने लगें!

जैसा कि मैंने बताया, जब 2007 में मैं दोबारा उनके घर पहुँचा, उसने यह प्रयास छोड़ दिया था। उनका सम्बन्ध-विच्छेद हो चुका था, वह उसे छोड़कर जा चुकी थी और मेरे मित्र ने अपनी ज़मीन का एक हिस्सा बेचकर उस महिला को उसकी कीमत अदा कर दी थी। अपनी मानसिक शान्ति के लिए अदा की गई एक छोटी सी कीमत-और वास्तव में उसके बाद वह बहुत खुश हुआ होगा!

इस बात ने मेरी इस धारणा को और भी दृढ़ कर दिया कि ख़ुशी और मानसिक शान्ति प्राप्त करने की राह में कोई भी चीज़ बाधा नहीं बननी चाहिए, धन-दौलत, ज़मीन-जायदाद, कुछ भी नहीं।

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