कुछ दिन पहले हमें एक ईमेल प्राप्त हुआ, जिसमें आश्रम में लंबे आवास हेतु पूछताछ की गई थी। लेकिन नीचे दिया गया वार्तालाप अंततः सामान्य से बहुत अलग रहा!
महिला ने निकट भविष्य में कुछ माह तक आश्रम में निवास की संभावना और उसमें आने वाले खर्च के बारे में जानना चाहा था। हमेशा की तरह रमोना ने जवाब दिया और स्वाभाविक ही, खर्च के बारे में विस्तार से बताते हुए यह भी लिखा कि हम आश्रम में उसका स्वागत करके बहुत खुश होंगे। उसी दिन देर रात को उसका जवाब मिला कि हमारे द्वारा उद्धृत कीमत उसके बूते से बाहर है और वह इतना खर्च अदा करने के लिए राज़ी नहीं है। उसी ईमेल में उसने यह भी पूछा कि क्या कुछ कम पैसों में आश्रम में रहना संभव है।
तब तक रमोना बहुत थक चुकी थी और कोई गलती न हो जाए, इसलिए उसने अपने प्रतिउत्तर को दूसरे दिन के लिए मुल्तवी कर दिया कि सबेरे, सोच-समझकर कोई दैनिक स्वयंसेवी कार्य करवाने का प्रस्ताव सामने रखते हुए उसकी मदद की जाए, उसका खर्च कम किया जाए जिससे उसका आना संभव हो सके। कम खर्च में यात्रा करने वाले बहुत से पर्यटक इस विकल्प का चुनाव करते हैं और श्रमदान करके अपना खर्च सीमित कर लेते हैं। लेकिन जब सबेरे हमने कम्प्यूटर खोला तो हमें यह ईमेल प्राप्त हुआ, जिसका उत्तर देना भी रमोना ने उचित नहीं समझा:
'हेलो रमोना,
मैंने आपकी वेबसाइट का अवलोकन किया और उसमें आपके आश्रम का विस्तृत विवरण पढ़ा और फिर आपके प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया। मुझे लगता है कि मैं यह सब नहीं चाहती या यह मेरी आत्मा गवारा नहीं करती।
आप हमें क्या पेश कर रहे हैं? शुद्ध विलासिता! यह सब तो मुझे यहाँ भी किसी आश्रम में उपलब्ध हो सकता है!
मुझे ऐसी विलासपूर्ण सुविधाओं की ज़रूरत नहीं है!
इसके लिए मैं भारत की यात्रा नहीं करूँगी।
शुभकामनाओं सहित'
हमने सोचा कि वाह, यह आपने अच्छा किया कि हमारी वेबसाइट देख ली। हालांकि हमारा आश्रम कोई 5 सितारा होटल नहीं है और न ही हम यहाँ रहने का उस स्तर का किराया वसूल करते हैं लेकिन फिर भी अगर आपको लगता है कि हमारा आश्रम कुछ ज़्यादा ही सुख-सुविधा युक्त है तो यह अच्छा ही हुआ कि आपने यहाँ न आने का फैसला किया। और फिर आपकी बातें- और कुछ भी रही हों, शिष्ट नहीं थीं इसलिए हम भी यही चाहते हैं कि आप हमारे आश्रम में न ही आएँ तो अच्छा है!
लेकिन दो दिन बाद फिर उसका ईमेल आया। उसका लहजा पूरी तरह बदला हुआ था! उसे हमारी वेबसाइट का वालंटियर्स यानी कि स्वयंसेवकों वाला पेज मिल गया था, जहाँ हमने वही सब कुछ दर्ज कर रखा था जो हम उसे अपने अगले ईमेल में लिखने वाले थे। और उसका यह सन्देश मिला कि वह ठीक यही चाहती थी। तो खर्च कम करने की निश्चित ही एक व्यवस्था है- और ठीक यही वह चाहती थी!
लेकिन हमने उसे विनम्रतापूर्वक लिखा कि हमारे यहाँ 'सेवा' देने वाले वालंटियर्स भी ए सी कमरों की, सर्दियों में हीटर की, सुरक्षित मिनरल वाटर की, स्वास्थ्यकर, शाकाहारी और आयुर्वेदिक भोजन की और स्वच्छ बिस्तर और स्वच्छ बाथरूम की सुविधा पाते हैं। और क्योंकि उसे ऐसी किसी सुख-सुविधा की ज़रूरत नहीं है और इन सब चीजों के लिए वह भारत नहीं आ रही है इसलिए हमारा आश्रम वैसे भी उसके लिए उपयुक्त नहीं होगा। भारत में इससे कम सुविधाओं वाली जगहें कोई भी आसानी से प्राप्त कर सकता है! हमने, अंत में, खुद के लिए मनपसंद जगह तलाश करने में उसकी सफलता की शुभकामना भी व्यक्त की।
इस चर्चा से क्या शिक्षा मिलती है? यही कि अगर आप किसी के सामने भलमनसाहत के साथ अपनी बात रखते हैं तो सामने वाला भी आपके साथ अच्छा बर्ताव करता है!
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