जब मैं अपनी भावनाओं की कदर नहीं करता तो अपनी ऊर्जा गँवा रहा होता हूँ – 7 जून 2015

मेरा जीवन

काफी समय पहले से मेरा एक सिद्धान्त रहा है, जिसे मैं बार-बार आजमा भी चुका हूँ और वह हर बार सही भी प्रमाणित हुआ है: दूसरे लोगों के बारे में अपनी भावनाओं पर विश्वास कीजिए। अगर आप महसूस करते हैं कि आप दोनों के बीच पट नहीं पाएगी-किसी भी संबंध में यह लागू होता है-तो संबंध तोड़ दीजिए। अगर आप इंतज़ार करते हैं, कोशिश करते रहते हैं कि किसी तरह निभ जाए तो आप सिर्फ अपना समय और अपनी ऊर्जा नष्ट कर रहे होते हैं और आपको अंततः उसे समाप्त करना ही पड़ता है!

मेरे कहने का अर्थ क्या है, बताता हूँ। अपने जीवन में मैं कई बार ऐसे लोगों से मिला हूँ, जिनके साथ कुछ ही समय बाद मैंने महसूस किया कि हमारी पटरी आपस में नहीं बैठ पा रही है। उनकी बातों से, उनके कामों से, उनके चेहरे के हाव-भाव से या महज उनके व्यक्तित्व से प्रस्फुटित होती ऊर्जा से इस तरह की भावना या एहसास आपको होने लगता है। इन बातों का कुछ ऐसा असर आप पर पड़ता है कि आपको एहसास हो जाता है कि आप इस व्यक्ति के मित्र नहीं बन सकेंगे।

कभी-कभी यह भावना इतनी तीव्र होती है कि कि आप सतर्क रहते हैं कि उनसे किसी तरह का वाद-विवाद न हो। आपकी राय उनसे बहुत अलग होती हैं।

लेकिन इतनी सी बात पर उनसे विचारों का आदान-प्रदान समाप्त करने का आपको कोई कारण नज़र नहीं आता और वास्तव में आप उनके मित्र बने रहना चाहते हैं, उनके साथ सामान्य मधुर संबंध बनाए रखना चाहते हैं, उनके साथ समय गुज़ारना चाहते हैं। इस प्रकार उनके साथ आप किसी न किसी तरह निभाना चाहते हैं। आप उनकी उन टिप्पणियों को नज़रअंदाज़ करते हैं, जिन पर सामान्य रूप से आपको एतराज़ होता।

लेकिन कुछ समय पश्चात्-और यह समय कुछ हफ़्तों से लेकर महीनों का हो सकता है-आप ऐसे बिंदु तक पहुँच जाते हैं, जिसके आगे आप उस संबंध को निभा नहीं सकते। एक ऐसा बिंदु, जिसके बाद, अगर आप अपने प्रति सच्चे, ईमानदार बने रहना चाहते हैं, अपनी अस्मिता बनाए रखना चाहते हैं तो उनके साथ दूरी बनाना लाज़िमी हो जाता है।

इसी बिन्दु पर आकर संबंधों में दरार पड़ जाती है और फिर वे टूट जाते हैं। और उसके बाद आप बहुत हल्का, बहुत अच्छा महसूस करते हैं। बहुत दिनों तक आपने उस संबंध को बनाए रखा लेकिन उसके लिए आपको बहुत प्रयास करना पड़ा, बहुत सारी ऊर्जा और समय खर्च करना पड़ा! आखिर जब वह समाप्त हो गया, जब आपको अंतिम रूप से पता चल गया कि यह संबंध इसी तरह आगे नहीं चल पाएगा तो आप बहुत मुक्त महसूस करने लगे। मुक्त इसलिए कि आगे अब यह प्रयास आपको नहीं करना पड़ेगा!

हो सकता है कि आपको इस बात का अफसोस हो कि क्यों इस संबंध को बनाए रखने के लिए आपने इतने लम्बे समय तक इतना गम्भीर प्रयास किया। परेशान न हों-जो कुछ हुआ, अच्छा हुआ! आप सामने वाले को ठीक तरह से जानना चाहते थे और अब आप पूरी तरह आश्वस्त हैं कि आप दोनों एक-दूसरे के अनुरूप नहीं थे। अगली बार आप अपनी भावनाओं को कुछ जल्दी सुन पाएँगे और तदनुसार त्वरित कार्यवाही करेंगे!

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