अपनी यात्राओं में मैं अक्सर ऐसे लोगों से मिलता रहता हूँ जो बहुत हद तक मेरे कोपेनहेगन वाले मित्र जैसे होते हैं, जिसके बारे में मैंने आपको पिछले हफ्ते बताया था। जोकि नकारात्मक होते हैं, ऐसी बातों पर भी, जिन पर अधिकांश लोग खुश होंगे, नाखुश ही बने रहने वाले। 2006 में मेरी एक मित्र के साथ बातचीत हुई और मुझे एक बार फिर यकीन हो गया कि वास्तव में वह अवसादग्रस्त रहकर ही खुश रह पाता है।
मेरा मित्र वास्तव में बड़ा निराशावादी था और लगता था जैसे वह हर वक़्त खराब मूड में ही रहता है-लेकिन मुझे कभी भी यह आशंका नहीं हुई थी कि हर वक़्त दुखी और अवसादग्रस्त रहकर दरअसल वह खुद अपने जीवन के लिए भी खतरनाक हो सकता है!
जब मैं उसके घर पहुँचा, हम दोनों गले लग गए और एक-दूसरे का हालचाल पूछा। मैंने कहा, ‘बढ़िया’ या ‘शानदार’ लेकिन उसका जवाब हमेशा ऐसा होता जिससे ज़ाहिर होता जैसे सब कुछ अच्छा न हो। या तो वह कहता, "मैं तुम जैसा भाग्यशाली नहीं हूँ!" या दुखी स्वर में कहता, "हाँ, ठीक ही चल रहा है, तुम तो जानते हो…"। बाकी बातें वह मेरे खुद समझने के लिए छोड़ देता।
मेरे मित्र को सन 2006 में एक नई गर्लफ्रेंड मिल गई थी और यह एक तरह से उसके जीवन की एक सकारात्मक घटना थी। उसे अक्सर हँसता-मुसकुराता देखना अपने आप में सुखद अनुभव था और फिर उसने अपने उस साथी का ज़िक्र करते हुए बताया कि क्यों उसे लगा कि यही उसके लिए सर्वथा उपयुक्त साथी सिद्ध होगी!
लेकिन उसकी परिणति कुछ और ही हो सकती थी और उसके पास इसका कोई इलाज भी नहीं था। जब हम दोनों अकेले होते तो वह मुझसे कहता, "पता नहीं कब तक हमारा संबंध चलेगा…उसकी कुछ आदतें मुझे पसंद नहीं हैं लेकिन कुछ कहा नहीं जा सकता, मुझे लगता है इस बार हमारा संबंध कुछ अधिक समय तक चल पाएगा!"
मुझे हँसी आ जाती। वह आश्चर्य से मगर बगैर आहत हुए मेरी तरफ देखता क्योंकि मेरी ऐसी प्रतिक्रियाओं का वह आदी हो चुका था। मैंने उससे कहा कि वह हमेशा उन बातों पर ज़्यादा ध्यान केन्द्रित करता है जो उसे पसंद नहीं हैं, कि उसे अपनी साथी की अच्छी बातों पर भी गौर करना चाहिए! क्या आप समझते हैं कि कोई भी महिला बार-बार यह सुनना पसंद कर सकती है कि "मुझे यह जगह पसंद नहीं है", "यह मेरा काम नहीं है" या "कैसे करना है, मैं नहीं जानता मगर इतना जानता हूँ कि जैसा तुम करती हो वह मुझे पसंद नहीं आता"? कतई नहीं! और फिर अपने संबंध की शुरुआत में ही आप ज़्यादा से ज़्यादा यही सोचते रहते हैं कि आपका संबंध कितने दिन चलेगा!
मेरा दोस्त समझ गया कि मैं क्या कहने की कोशिश कर रहा हूँ। इस बिन्दु पर आकर वह काफी गंभीर हो गया और जब मैं गुड-नाइट कहकर सोने जाने लगा तब तक वह गहरे विचारों में गुम हो गया था। उसने इस बारे में काफी सोचा और उसे बात समझ में आ गई और फिर वह अपना सोचने का नज़रिया बदलने में कामयाब भी हो गया।
यह व्यक्ति, जिससे सन 2006 में मेरे साथ बातचीत हुई थी, कुछ साल बाद मुझसे दोबारा मिला। उसकी वही गर्लफ्रेंड अब भी उसके साथ रह रही थी और उनके संबंध भी ठीक-ठाक चल रहे थे। उसने मुझसे कहा, "उस समझ के बाद मेरा जीवन ही बदल गया!"
मैं मुस्कुरा दिया और पूछा, "यानी अब तुम अवसादग्रस्त होकर खुश नहीं होते?" हम दोनों खुलकर हँसे। कभी-कभी लोग यह महसूस ही नहीं कर पाते कि वे कितने निराशावादी या नकारात्मक हैं, जब तककि उन्हें यह बताया न जाए!
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