एक नकारात्मक रवैया रखने वाले मित्र को सकारात्मक बनने में मदद करना – 27 जुलाई 2014

अपनी यात्राओं में मैं अक्सर ऐसे लोगों से मिलता रहता हूँ जो बहुत हद तक मेरे कोपेनहेगन वाले मित्र जैसे होते हैं, जिसके बारे में मैंने आपको पिछले हफ्ते बताया था। जोकि नकारात्मक होते हैं, ऐसी बातों पर भी, जिन पर अधिकांश लोग खुश होंगे, नाखुश ही बने रहने वाले। 2006 में मेरी एक मित्र के साथ बातचीत हुई और मुझे एक बार फिर यकीन हो गया कि वास्तव में वह अवसादग्रस्त रहकर ही खुश रह पाता है।

मेरा मित्र वास्तव में बड़ा निराशावादी था और लगता था जैसे वह हर वक़्त खराब मूड में ही रहता है-लेकिन मुझे कभी भी यह आशंका नहीं हुई थी कि हर वक़्त दुखी और अवसादग्रस्त रहकर दरअसल वह खुद अपने जीवन के लिए भी खतरनाक हो सकता है!

जब मैं उसके घर पहुँचा, हम दोनों गले लग गए और एक-दूसरे का हालचाल पूछा। मैंने कहा, ‘बढ़िया’ या ‘शानदार’ लेकिन उसका जवाब हमेशा ऐसा होता जिससे ज़ाहिर होता जैसे सब कुछ अच्छा न हो। या तो वह कहता, "मैं तुम जैसा भाग्यशाली नहीं हूँ!" या दुखी स्वर में कहता, "हाँ, ठीक ही चल रहा है, तुम तो जानते हो…"। बाकी बातें वह मेरे खुद समझने के लिए छोड़ देता।

मेरे मित्र को सन 2006 में एक नई गर्लफ्रेंड मिल गई थी और यह एक तरह से उसके जीवन की एक सकारात्मक घटना थी। उसे अक्सर हँसता-मुसकुराता देखना अपने आप में सुखद अनुभव था और फिर उसने अपने उस साथी का ज़िक्र करते हुए बताया कि क्यों उसे लगा कि यही उसके लिए सर्वथा उपयुक्त साथी सिद्ध होगी!

लेकिन उसकी परिणति कुछ और ही हो सकती थी और उसके पास इसका कोई इलाज भी नहीं था। जब हम दोनों अकेले होते तो वह मुझसे कहता, "पता नहीं कब तक हमारा संबंध चलेगा…उसकी कुछ आदतें मुझे पसंद नहीं हैं लेकिन कुछ कहा नहीं जा सकता, मुझे लगता है इस बार हमारा संबंध कुछ अधिक समय तक चल पाएगा!"

मुझे हँसी आ जाती। वह आश्चर्य से मगर बगैर आहत हुए मेरी तरफ देखता क्योंकि मेरी ऐसी प्रतिक्रियाओं का वह आदी हो चुका था। मैंने उससे कहा कि वह हमेशा उन बातों पर ज़्यादा ध्यान केन्द्रित करता है जो उसे पसंद नहीं हैं, कि उसे अपनी साथी की अच्छी बातों पर भी गौर करना चाहिए! क्या आप समझते हैं कि कोई भी महिला बार-बार यह सुनना पसंद कर सकती है कि "मुझे यह जगह पसंद नहीं है", "यह मेरा काम नहीं है" या "कैसे करना है, मैं नहीं जानता मगर इतना जानता हूँ कि जैसा तुम करती हो वह मुझे पसंद नहीं आता"? कतई नहीं! और फिर अपने संबंध की शुरुआत में ही आप ज़्यादा से ज़्यादा यही सोचते रहते हैं कि आपका संबंध कितने दिन चलेगा!

मेरा दोस्त समझ गया कि मैं क्या कहने की कोशिश कर रहा हूँ। इस बिन्दु पर आकर वह काफी गंभीर हो गया और जब मैं गुड-नाइट कहकर सोने जाने लगा तब तक वह गहरे विचारों में गुम हो गया था। उसने इस बारे में काफी सोचा और उसे बात समझ में आ गई और फिर वह अपना सोचने का नज़रिया बदलने में कामयाब भी हो गया।

यह व्यक्ति, जिससे सन 2006 में मेरे साथ बातचीत हुई थी, कुछ साल बाद मुझसे दोबारा मिला। उसकी वही गर्लफ्रेंड अब भी उसके साथ रह रही थी और उनके संबंध भी ठीक-ठाक चल रहे थे। उसने मुझसे कहा, "उस समझ के बाद मेरा जीवन ही बदल गया!"

मैं मुस्कुरा दिया और पूछा, "यानी अब तुम अवसादग्रस्त होकर खुश नहीं होते?" हम दोनों खुलकर हँसे। कभी-कभी लोग यह महसूस ही नहीं कर पाते कि वे कितने निराशावादी या नकारात्मक हैं, जब तककि उन्हें यह बताया न जाए!

Related posts

जब पिता ज़िंदा होकर भी मेरे नहीं थे…

जब पिता ज़िंदा होकर भी मेरे नहीं थे…

पिता पुत्र का वो रिश्ता, जो जीते-जी मर गया मेरे पिता का देहांत हो गया। मुझे यह समाचार भारत में ...
पिता के साथ मेरा सम्बन्ध

पिता के साथ मेरा सम्बन्ध

जब पिता कह दे कि मैं मर गया तेरे लिए! कल्पना करें मेरी उस मानसिक दशा की जबकि मैं बाप ...
जीवन का नया अध्याय, चुनौतियाँ और सबक

जीवन का नया अध्याय, चुनौतियाँ और सबक

मैं भी उनमें से एक हूँ. 7 साल पहले भारत छोड़ के चला गया. वहाँ व्यापार करता था और टैक्स ...
11 साल की उम्र में यौन शोषण की शिकार मेरी बहन को न बचा पाने की ग्लानि 

11 साल की उम्र में यौन शोषण की शिकार मेरी बहन को न बचा पाने की ग्लानि 

मेरी एक ही छोटी बहन थी परा, आज से 17 साल पहले जर्मनी के लिए एयरपोर्ट आते हुए कार दुर्घटना ...
भारत में मेरे परिवार ने मेरी पीठ में छुरा घोंपा है

भारत में मेरे परिवार ने मेरी पीठ में छुरा घोंपा है

बालेंदु लिख रहे हैं कि उन्होंने चैरिटी संस्था से इस्तीफा क्यों दिया और उनके परिवार ने उन्हें पैसे और संपत्ति ...
Apra

दुनिया भर के राजाओं की एक सी रुचियाँ: पैसा, युद्ध और औरतें – 17 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु अपनी पारिवारिक जयपुर यात्रा के बारे में लिख रहे हैं, जहाँ उन्होंने प्राचीन राजा-महाराजाओं के महलों, किलों और ...
अपरा का चौथा जन्मदिन समारोह - 10 जनवरी 2016

अपरा का चौथा जन्मदिन समारोह – 10 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु अपरा के चौथे जन्मदिन के समारोह का वर्णन कर रहे हैं, जिसे उसके जन्मदिन यानी कल, 9 जनवरी ...
कैनेडियन योग दल

हमें घनिष्ट रूप से जुड़ना पसंद है – एक कैनेडियन योग दल का आश्रम आगमन – 13 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे सारे आश्रम ने एक कैनेडियन दल के साथ बेहद सुखद और व्यस्त समय ...
जर्मनी के खूबसूरत दौरे से भारत वापसी - 6 दिसंबर 2015

जर्मनी के खूबसूरत दौरे से भारत वापसी – 6 दिसंबर 2015

भारत लौटकर स्वामी बालेंदु पिछले हफ्ते की अपनी पारिवारिक जर्मनी यात्रा का संक्षिप्त ब्यौरा प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसमें उनकी ...
जर्मनी में हमारी मौज-मस्ती - 29 नवंबर 2015

जर्मनी में हमारी मौज-मस्ती – 29 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपनी पत्नी और बेटी के साथ जर्मनी में बिताए दूसरे सप्ताह का विवरण लिख रहे हैं। उनके रोमांचक ...

Leave a Reply