नशीले पदार्थों का सेवन करने के बाद होने वाला मतिभ्रम आध्यात्मिक अनुभव नहीं है – 27 अप्रैल 2014

मेरा जीवन

पिछले हफ्ते आपको मैंने अपने कुछ युवा मित्रों के समूह के साथ जंगल में बिताए सप्ताहांत के विषय में बताया था। उनमें से कुछ गाने-बजाने वाले संगीतज्ञ थे और सामान्य रूप से वे सभी भारत, भारतीय संगीत और भारतीय अध्यात्म की ओर आकृष्ट थे। और दुर्भाग्य से उन सभी की नशीले पदार्थों की मस्तिष्क को चलायमान कर देने वाली शक्तियों में भी दिलचस्पी थी, बल्कि उससे वे अभिभूत थे। इस बात ने मुझे लोगों के ‘आध्यात्मिक अनुभव’ और नशीले पदार्थों के बीच मौजूद संबंध पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया।

युवक-युवतियों के इस समूह से मैं पहली बार तब मिला था जब वे मेरे ध्यान-सत्र में शामिल होने के लिए आए थे। वे सब कार्यक्रम की समाप्ति के बाद भी रुके रहे और हम सब आपस में बातचीत करते रहे। चर्चा रोचक थी और मज़ा आ रहा था। अगले दिन वे फिर आए और हमने थोड़ा सा गाने-बजाने का आनंद भी लिया। वे विभिन्न विषयों पर मेरे विचार जानने की कोशिश करते रहे और फिर किसी ने यह सवाल दागा: क्या आप धूम्रपान करते हैं? जब मैंने कहा कि नहीं तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सिर्फ तंबाकू पीने की बात नहीं कर रहे हैं।

मैंने पुनः एक बार साफ-साफ ‘नहीं’ कहा और सलाह दी कि आप लोग भी किसी तरह का नशा न किया करें।

लेकिन मैं उनके इस भ्रम का कि मैं नशा करता होऊंगा, कारण जानता हूँ: यही कि मैं भारत से हूँ, मैंने अधिकांश जीवन एक साधु की तरह जिया है, मैं एक गुफा में एकांतवास कर चुका हूँ और मैं अपने कार्यक्रमों में आध्यात्मिकता, ध्यान-योग और उससे संबन्धित विषयों पर बात करता रहता हूँ। पहले मैं भी बहुत से भारतीय साधुओं की तरह, जिनके बारे में प्रसिद्ध है कि वे लोग नशा करके ‘आध्यात्मिक अनुभव’ प्राप्त करते हैं, मैं लम्बी जटायें भी रखता था। लेकिन मेरे खयाल से इन दोनों बातों का एक-दूसरे से कोई संबंध नहीं है।

किसी ने मुझे खुलकर नहीं बताया कि वे नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं, तंबाखू के बारे में भी नहीं-शायद इसलिए कि वे मेरा और मेरे विचारों का सम्मान करते थे या शायद इस डर से कि मैं उनके प्रति कोई गलत धारणा न बना लूँ। लेकिन उस दिन जंगल में, कम से कम कुछ लोग नशीले पदार्थों का सेवन कर रहे थे और सुरूर में पहले से कुछ अधिक निश्चिंत और तनाव-मुक्त लग रहे थे। अपने मन की बात बताने के लिए कुछ ज़्यादा तैयार, खुलकर हंसने के लिए, दिमाग पर ज़ोर डाले बगैर हंसने-गाने और खुशी मनाने को उत्सुक।

मुझे क्यों लगता है कि यह ठीक नहीं है? क्योंकि मैं समझता हूँ कि आप किसी नशीले पदार्थ का सेवन किए बगैर भी विचार-शून्यता, बेफिक्री, तनाव मुक्ति और खुलेपने की अवस्था प्राप्त कर सकते हैं! मैं सोचता हूँ कि नशीले पदार्थ के सेवन के जरिये प्राप्त की गई यह स्थिति किसी भी तरह से आध्यात्मिक अनुभव नहीं है बल्कि महज उसका भ्रम है।

इस तरह मित्रों के उस समूह ने जाना कि वे मुझे जो समझ रहे थे, मैं वह नहीं हूँ। शायद इसीलिए इतना खुशनुमा सप्ताहांत उनके साथ गुजारने के बाद भी मेरे साथ उनका बहुत नजदीकी रिश्ता नहीं बन पाया। शायद वे मुझसे कुछ और ही अपेक्षा किए हुए थे। नशा करके बहकना, मदहोश होना और समझना कि वे आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त कर रहे हैं! माफ करें, इस पर मेरा ज़रा भी विश्वास नहीं है।

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