अपने दूसरे घर, जर्मनी में अपरा से साथ मस्ती – 15 नवम्बर 2015

आज आपको हमारी जर्मनी यात्रा की पहली रिपोर्ट प्राप्त होगी! हम लोग यहाँ सकुशल पहुँच गए थे और अभी से हमारे दूसरे गृहराष्ट्र, जर्मनी में हमारे रोमांचक अनुभवों की शुरुआत हो चुकी है!

सबसे पहले, हमारी यात्रा के बारे में: एक बार फिर से यह एक कमाल की निर्विघ्न यात्रा का अनुभव था। दिल्ली के यातायात के जाम को ध्यान में रखते हुए, हम लोग थोड़ा जल्दी ही निकल आए थे। लेकिन हम लोग आराम से पहुँच गए और इसलिए हमारे पास हवाई-अड्डे पर बिताने के लिए काफी समय था। हम इस समय का उपयोग न केवल आश्रम से लाया शानदार नाश्ता करते हुए बिता सकते थे बल्कि अपरा को बहुत-सी नयी चीज़ें भी दिखा सकते थे। वह वेंडिंग मशीन (विक्रय मशीन) देखकर मंत्रमुग्ध हो गई थी। काँच की खिड़कियों से बाहर झाँककर हवाई जहाज़ देखने और रोलिंग-फ्लोर पर चलने और आगे-पीछे होकर धमाचौकड़ी मचाने में भी उसे बड़ा मज़ा आ रहा था!

इन सब आकर्षणों के कारण उसे बोर होने का समय ही नहीं मिला और विमान पर चढ़ने का वक़्त हो गया। गज़ब! अपरा ने वहाँ जो मस्ती की है! हर चीज़ को देखकर वह रोमांचित हो उठती, चीज़ें कैसे काम करती हैं, यह देखना, खिड़की से बाहर झाँकना, बार-बार सीट की पेटी को बांधकर और फिर खोलकर देखना, सामने के फोल्डिंग टेबल को खोलना और बंद करना, एंटरटेनमेंट सिस्टम को ऑन और ऑफ करना, आदि, आदि। अपनी इन सब गतिविधियों से वह बहुत उत्साहित थी। आखिर विमान में मिले भोजन को चखने के बाद वह सो गयी और उसके बाद विमान-यात्रा का ज़्यादातर समय उसने सोते हुए ही बिताया!

समय के अंतर यानी जेटलैग की वजह से जब शाम को हम जर्मनी पहुँचे तो हम लोग कुछ थक से गए थे और निस्संदेह वहाँ हमारे हिसाब से मौसम भी काफी ठंडा था। परंतु पुनः जर्मनी आकर हमें बहुत अच्छा महसूस हो रहा था! बाहर की शान्ति, हवा में एक अलग तरह की गंध मुझे अत्यंत प्रिय है और ऊपर से चारों तरफ खुली हरियाली-पूछो मत! यह सुंदरता मन मोह लेती है! और हाँ, हम सभी मित्रों से बहुत प्यार करते हैं, जैसे थॉमस और आइरिस, जर्मनी में जिनका घर हमारा मुख्य आवास होता है और जहाँ ठीक इस वक़्त हम आनंदपूर्वक अपना समय बिता रहे हैं और मैं यह ब्लॉग लिख रहा हूँ!

कल एक लंबे जर्मन नाश्ते के साथ अद्भुत सुबह की शुरुआत हुई। उसके बाद हम सब अपनी एक और खूबसूरत मित्र, मेलनी से मिलने उसके घर गए। वही मेलनी जो पहले हमारे यहाँ भारत आ चुकी है। दो वर्ष पहले, जब अपरा पहली बार जर्मनी आई थी, हम उसके घर गए थे और अपरा ने उसके दो में से एक घोड़े की सवारी की थी! अब अपरा थोड़ी बड़ी हो गई है-घोड़े तो वही हैं परंतु उन्हें वह बिल्कुल अलग तरह से देख रही है, उनके साथ उसे एक अलग तरह का अनुभव हो रहा है, जो देखने में बड़ा खूबसूरत लगता है! आप कल्पना कर सकते हैं कि अपरा के लिए उन घोड़ों को थपथपाना, उनकी साफ़-सफाई में मदद करना और फिर उनकी सवारी करना कितना आनंददायक रहा होगा! और उसे ऐसा करते हुए देखना, हमारे लिए!

आज सुबह रमोना के स्कूल की एक पुरानी मित्र अपने पुरुषमित्र के साथ आई और एक बार पुनः शानदार नाश्ता लिया गया और उसके बाद हम लोग एक पार्क में स्थित खेल के मैदान में टहलने चले गए।

वहीं हमने नोटिस किया कि अपरा भी विमान-यात्रा के कारण होने वाले समयांतर यानी जेटलैग से प्रभावित हुई है और शायद थोड़ी थकावट महसूस कर रही है! सबेरे हम सब जल्दी उठ गए थे और दोपहर में भी वह बहुत थक गयी थी इसलिए सो गई थी, जबकि पिछले कई महीनों से दोपहर में वह झपकी तक नहीं ले रही है!

दोपहर की नींद से उसे शक्ति मिली होगी और जब कुछ और दोस्त मिलने आए तब वह पूरी तरह फिट थी! पवन नामक एक भारतीय, जो वीज़्बाडेन में एक भारतीय रेस्तराँ चलाता है, अपनी जर्मन पत्नी और बच्चों के साथ हमसे मिलने आया था। उस समय अपरा पूरी तरह चैतन्य थी और उसने एक डांस भी करके दिखाया!

मुझे लगता है कि आप अच्छी तरह देख पा रहे होंगे कि हम यहाँ कितने खुश हैं और कितना अच्छा समय गुज़ार रहे हैं!

Related posts

जब पिता ज़िंदा होकर भी मेरे नहीं थे…

जब पिता ज़िंदा होकर भी मेरे नहीं थे…

पिता पुत्र का वो रिश्ता, जो जीते-जी मर गया मेरे पिता का देहांत हो गया। मुझे यह समाचार भारत में ...
पिता के साथ मेरा सम्बन्ध

पिता के साथ मेरा सम्बन्ध

जब पिता कह दे कि मैं मर गया तेरे लिए! कल्पना करें मेरी उस मानसिक दशा की जबकि मैं बाप ...
जीवन का नया अध्याय, चुनौतियाँ और सबक

जीवन का नया अध्याय, चुनौतियाँ और सबक

मैं भी उनमें से एक हूँ. 7 साल पहले भारत छोड़ के चला गया. वहाँ व्यापार करता था और टैक्स ...
11 साल की उम्र में यौन शोषण की शिकार मेरी बहन को न बचा पाने की ग्लानि 

11 साल की उम्र में यौन शोषण की शिकार मेरी बहन को न बचा पाने की ग्लानि 

मेरी एक ही छोटी बहन थी परा, आज से 17 साल पहले जर्मनी के लिए एयरपोर्ट आते हुए कार दुर्घटना ...
भारत में मेरे परिवार ने मेरी पीठ में छुरा घोंपा है

भारत में मेरे परिवार ने मेरी पीठ में छुरा घोंपा है

बालेंदु लिख रहे हैं कि उन्होंने चैरिटी संस्था से इस्तीफा क्यों दिया और उनके परिवार ने उन्हें पैसे और संपत्ति ...
Apra

दुनिया भर के राजाओं की एक सी रुचियाँ: पैसा, युद्ध और औरतें – 17 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु अपनी पारिवारिक जयपुर यात्रा के बारे में लिख रहे हैं, जहाँ उन्होंने प्राचीन राजा-महाराजाओं के महलों, किलों और ...
अपरा का चौथा जन्मदिन समारोह - 10 जनवरी 2016

अपरा का चौथा जन्मदिन समारोह – 10 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु अपरा के चौथे जन्मदिन के समारोह का वर्णन कर रहे हैं, जिसे उसके जन्मदिन यानी कल, 9 जनवरी ...
कैनेडियन योग दल

हमें घनिष्ट रूप से जुड़ना पसंद है – एक कैनेडियन योग दल का आश्रम आगमन – 13 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे सारे आश्रम ने एक कैनेडियन दल के साथ बेहद सुखद और व्यस्त समय ...
जर्मनी के खूबसूरत दौरे से भारत वापसी - 6 दिसंबर 2015

जर्मनी के खूबसूरत दौरे से भारत वापसी – 6 दिसंबर 2015

भारत लौटकर स्वामी बालेंदु पिछले हफ्ते की अपनी पारिवारिक जर्मनी यात्रा का संक्षिप्त ब्यौरा प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसमें उनकी ...
जर्मनी में हमारी मौज-मस्ती - 29 नवंबर 2015

जर्मनी में हमारी मौज-मस्ती – 29 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपनी पत्नी और बेटी के साथ जर्मनी में बिताए दूसरे सप्ताह का विवरण लिख रहे हैं। उनके रोमांचक ...

Leave a Reply