पिछले हफ्ते मैंने आपको बहुत से ऐसे संगीतकारों के बारे में बताया था, जो हमेशा पश्चिम जाकर अपने कार्यक्रम प्रस्तुत करना चाहते थे और इसे पैसा, नाम और प्रसिद्धि पाने का एक मौका समझते थे। हो सकता है कि कुछ लोगों को यह सब प्राप्त हो जाता हो लेकिन मैंने देखा है कि ज़्यादातर लोग इन यात्राओं में एक दूसरी ही चीज़ पाते हैं और पाकर बड़े खुश होते हैं: पश्चिम की ‘खुली संस्कृति’, अर्थात सेक्स को लेकर उनका खुला व्यवहार।
मैंने देखा है कि पश्चिमी देशों की यात्रा करने वाले बहुत से भारतीय मर्द जब वहाँ अनंत संभावनाओं को अपने सामने खुलता हुआ देखते हैं तो उनकी आँखें फटी की फटी रह जाती हैं और वे उन्हें लपक लेने के विचार से बड़े उत्तेजित हो उठते हैं। वे देखते हैं कि वहाँ औरत और मर्द बिना विवाह किए किस तरह एक साथ रहते हैं, कैसे उनके बीच सामान्य परिचय के बावजूद आपस में बेखौफ सेक्स संबंध बन जाते हैं, जिन्हें वे ‘एक रात का बसेरा’ (वन नाइट स्टैंड) या ‘खुला संबंध’ (ओपन रिलेशनशिप) कहते हैं। उन लोगों के लिए, जो एक ऐसे देश के रहने वाले हैं, जहाँ किसी दूसरी महिला के साथ अकेले में मिलना लगभग असंभव सा ही होता है, यह बात अत्यंत आश्चर्यकारी हो सकती है। ध्यान-सत्र के पश्चात हम लोगों का सबसे गले मिलना हमारे साथ आए हुए बहुत से संगीतकारों के लिए बहुत मादक (कामुक) सिद्ध होता था-ऐसी महिलाओं को गले लगाना, जिन्हें वे जानते तक नहीं हैं!
पश्चिमी समाज की बिल्कुल भिन्न संस्कृति के प्रति उनकी उत्तेजना और उनका आश्चर्य देखकर मैं अपने आश्चर्य के बारे में सोचने लगता हूँ, जो मुझे यहाँ आने पर शुरुआत में कुछ माह तक होता रहा था। शर्म और यह अनोखा अनुभव प्राप्त करने की अंदरूनी ख़्वाहिश के बीच उलझी अपनी मनःस्थिति के विषय में सोचकर मेरे होठों पर मुस्कान खेल जाती है। लेकिन एक बार वह शुरुआती सम्मोहन समाप्त हो जाने के बाद मैंने वह सब भी देखा, जिसका अनुमोदन मैं नहीं कर सकता था और जिन पर मुझे बड़ा ताज्जुब भी हुआ करता था।
मैंने ऐसे लोगों को भी देखा है, जिनकी पत्नी और बच्चे देश में उसका इंतज़ार कर रहे हैं और वह खुद ‘खुले यौन’ वाले इन पश्चिमी देशों के अन्वेषन में लगा हुआ है। और यहाँ मैं सिर्फ मेरे साथ यात्रा पर आए संगीतकारों की बात नहीं कर रहा हूँ। दूसरे क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों को भी मैंने देखा और अपने प्रियकरों के साथ उनकी बेईमानी और दगाबाजी के बारे में सोचकर मैं हैरान रह जाया करता था। वे अपने उस जीवन-साथी के बारे में सोचते ही नहीं हैं या उसकी परवाह नहीं करते, जो घर में उनका इंतज़ार कर रही है-वे एक अनोखी यात्रा, एक उत्तेजक खेल में मुब्तिला होते हैं!
अगर वे कुछ ज़्यादा समय तक इन देशों में रहते हैं तो वे एक दोहरी ज़िंदगी जीने लगते हैं, एक तरफ पश्चिम में किसी के साथ संबंध और दूसरी तरफ घर में पत्नी, बच्चे और परिवार। स्वाभाविक ही वे अपनी पत्नी या बच्चों को यह नहीं बताते के वे विदेश में क्या करते रहे हैं!
संभव है कुछ लोगों के लिए, जैसे हमारे प्रकरण में संगीतकारों के लिए, कुछ अन्य लक्ष्य भी होते होंगे। अर्थात, यह कि किसी के साथ अंतरंग संबंध बनाने पर उसके साथ भावनात्मक संबंध भी बन जाएगा, जो उस व्यक्ति को उनके लक्ष्य में सहायता करने हेतु और भी प्रोत्साहित करेगा। वे और जल्दी विदेश में स्थापित हो सकेंगे और सफलता प्राप्त करने में उसकी मदद प्राप्त होगी। यही कारण है कि वे, विशेषकर महिलाओं की तरफ कुछ ज़्यादा ही तवज्जो देते हैं और कोशिश करते हैं कि उनके साथ अधिक से अधिक नजदीकी स्थापित कर सकें।
जब मैंने या मेरे छोटे भाई ने उन लोगों के साथ इस विषय में गंभीरता के साथ चर्चा की तो पाया कि उनके पास उनके व्यवहार के पक्ष में बहुत से बहाने, कारण और सच्ची-झूठी कहानियाँ होती हैं। एक बार एक ने कहा: ‘मैं बहुत आगे नहीं बढ़ता! मैं शादीशुदा हूँ और मेरे बच्चे भी हैं, जो घर में मेरा इंतज़ार कर रहे हैं!’ वे इस कहावत का पालन करते नज़र आते हैं कि: जैसा देस वैसा भेस! लेकिन उन्हें इस बात का गुमान नहीं होता कि ‘खुले सेक्स’ वाली उनकी धारणा वास्तविकता से कोसों दूर होती है। वे यह नहीं जानते कि पश्चिम में यौनिकता (sexuality) के साथ भी कड़े नैतिक मूल्य जुड़े होते हैं और वहाँ पत्नी के साथ धोखेबाज़ी को सामान्य नहीं माना जाता बल्कि उसे बड़ी गंभीरता से लिया जाता है।
इसके बावजूद यह बताना आवश्यक है कि सभी ऐसे नहीं होते-कई मर्द बहुत ईमानदार होते हैं, जो सालों विदेश में रहते हैं मगर किसी प्रेम-संबंध में लिप्त होने के बारे में सोच भी नहीं सकते।
यह एक मुश्किल और विवादास्पद विषय है और जब तक मनुष्य इस धरती पर है यह प्रश्न हल नहीं होने वाला और यह समस्या भी हमेशा बनी रहेगी।
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