अपने अंदर जागने वाली अपरंपरागत यौन फंतासियों के कारण स्वयं को अपराधी महसूस मत कीजिए! 21 दिसंबर 2014

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

आस्ट्रेलिया की अपनी 2007 की यात्रा में मेरे व्यक्तिगत सत्रों में शामिल होने वाले कुछ लोगों के बारे में मैं आपको पहले ही बता चुका हूँ। आज एक और किस्सा सुनिए-मेरे ख़याल से बहुत रोचक, जिसे आप पसंद भी करेंगे और शायद उससे सबक भी लेंगे। चलिए, बताता हूँ कि क्यों और कैसे।

इस महिला ने मेरे पास आकर बताया कि वह और उसका बॉय-फ्रेंड पिछले एक साल से साथ-साथ रह रहे हैं। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था-सिर्फ ठीक-ठाक नहीं, बेहद शानदार और मोहक था वह। बस, उनके यौन-व्यवहार को छोड़कर।

जब कोई अपनी बात इस तरह शुरू करता है तो मुझे अक्सर अंदाज़ हो जाता है कि उनके संबंधों में अवश्य ही गंभीर समस्याएँ हैं। जब प्रेम संबंधों में ही, जो आपका सबसे अंतरंग सम्बन्ध होता है, समस्या है तो समझिए कि यह आपके जीवन का सबसे बड़ा मामला है। लेकिन जब मैंने समस्या के स्वरुप की जानकारी ली तो मुझे लगा कि इस प्रकरण के निपटारे में ज़्यादा समस्या नहीं आनी चाहिए।

उसने कहा कि उसके बॉय-फ्रेंड ने कैसे एक दिन अपनी यौन वरीयताओं (पसंदगी) के बारे में बताया। वे आलिंगनबद्ध हुए और कुछ देर की उत्तेजक यौन हरकतों के बाद वे हमेशा की तरह सम्भोगरत हो गए-और उसे वह सम्भोग बहुत शानदार लगा। लेकिन तभी उसके बॉय-फ्रेंड ने कहा, बहुत हिचकिचाते हुए, धीरे-धीरे, कि वह इसे कुछ अलग तरह से करना चाहता है। कुछ अधिक उत्तेजक तरीके से, कुछ और खेल, कुछ अपरंपरागत हरकतों के साथ। आप कल्पना नहीं कर सकते कि कितनी मुश्किल से, शर्म से बार-बार लाल पड़ते हुए और जल्दी-जल्दी उसने अपनी बात मेरे सामने रखी। "वास्तव में वह चाहता था कि मैं उसे चपत मारूँ और वह भी मेरे शरीर पर हल्के प्रहार करे!" अर्थात् वे सेक्स और सेक्स पूर्व की कामुक क्रियाओं के दौरान एक दूसरे के साथ अधिक उत्तेजना के साथ जुड़ना चाहते थे और इसके लिए विभिन्न तरीके आजमाने की कोशिश कर रहे थे।

पहले तो उसे लगा कि उसके बॉय-फ्रेंड का दिमाग खराब हो गया है लेकिन फिर वह कुछ मामूली यौन क्रीड़ाओं के लिए तैयार हो गई और धीरे-धीरे उसे महसूस हुआ कि जो उसका बॉय-फ्रेंड कर रहा है, उसे वह भी पसंद कर रही है! कुछ बातें ज़्यादा और कुछ कम मगर उसके मुताबिक़, कुल मिलाकर यह सेक्स पहले से बहुत अधिक आनंददायक सिद्ध हुआ! अद्भुत और विस्मयकारी!

यह सब सुनने के बाद मैंने उससे पूछा, "ठीक-ठीक बताओ, इसमें तुम्हें किस बात से परेशानी है?"

और तब मुझे समझ में आया कि वह आपसी अंतरंगता के दौरान अपने यौन व्यवहार को लेकर अपराधग्रस्त थी। सेक्स के दौरान उसे अनिवर्चनीय आनंद प्राप्त होता था मगर बाद में यह सोचकर वह दुखी हो जाती थी कि अपने प्रेमी के साथ वह इस बुरी तरह क्यों जकड़ जाती है, क्या उसके आदेशानुसार सब कुछ करते चले जाना, उसके खेलों में निमग्न हो जाना, अपने आपको नीचे गिरा लेना नहीं है! यह स्पष्ट करने में उसने देर नहीं लगाई कि दोनों ही एक-दूसरे को अधिक ज़ोर से नहीं मारते केवल हलके प्रहार और मीठी पीड़ा पहुंचाते हैं और यह भी सुनिश्चित कर लिया कि मुझे पता रहे कि अपने बॉय-फ्रेंड के साथ सोने के लिए उस पर कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं है और वह स्वयं भी सेक्स में पूरी सक्रियता के साथ हिस्सा लेती है। लेकिन यही उसकी समस्या थी-वह इसका आनंद क्यों ले रही है? वह इसका आनंद कैसे ले सकती है? क्या यह घृणास्पद नहीं है?

मैंने उससे कहा कि ज़्यादा परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। अगर आप सिर्फ यौन क्रीड़ाओं में लगे हुए हैं और एक-दूसरे को शारीरिक सुख पहुँचाते हुए अपनी सेक्स फंतासियों को जी रहे हैं तो मैं नहीं समझता कि आप कोई गलत बात कर रहे हैं। इसके विपरीत, वास्तव में यह स्वस्थ सम्बन्ध की निशानी है: जब आप अपने दिल में गहरे दबी छोटी से छोटी इच्छा, लालसा और फंतासियों के बारे में अपने साथी से कह सकते हैं और वह भी आपके साथ आकर उनका आनंद लेता है! किसी का कोई नुकसान नहीं होता और दोनों उन्हें पसंद करते हैं-फिर अपने आपको अपराधी समझकर उस साझा आनंद पर पानी क्यों फेरा जाए?

मैंने उसे बताया कि यूरोप में ऐसी सेक्स फंतासियों का साकार अनुभव कराने वाले सेक्स संबंधी खिलौने दुकानों पर बिकते हैं और मैं सोचता था, वे खिलौने यहाँ भी मिलते होंगे। और यह भी कि स्वाभाविक ही अपने बेडरूम में वे जो भी करते हैं, वह उनका गुप्त निजी अनुभव है लेकिन उसे यह नहीं समझना चाहिए कि ऐसा करने वाले वे ऐसे अकेले दंपति हैं।

मुझे लगता है कि भारत जैसे देशों में लोग इसकी आलोचना कर सकते हैं, उन्हें बेतुका और त्याज्य समझ सकते हैं क्योंकि ऐसी बातें न तो उन्होंने कभी सुनी न कभी देखी होती हैं और न उनके बारे में कभी पढ़ा होता है।

मैंने उसे सेक्स की प्रबल इच्छा को एक सामान्य प्राकृतिक आवेग की तरह स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि उससे लड़ना व्यर्थ है। वे बिस्तर पर भी कभी-कभी आपस में लिपटते, गले लगते और जैसा कि उसने बताया, ‘परम्परागत तरीके से’ सम्भोग करते थे-अतः वास्तव में इसका कोई कारण नहीं था कि जो वे कर रहे थे, उसे गलत कहा जाए या उस व्यवहार को किसी तरह की विकृति कहा जाए।

अगर आप अपने यौन जीवन का आनंद ले रहे हैं और आपका साथी भी उससे खुश और संतुष्ट है तो मैं आपके दुःख और आपकी अप्रसन्नता का कोई कारण नहीं देखता कि आप एक-दूसरे को खुश कर पा रहे हैं तो एक-दूसरे को खुश करने के बाद खुद दुखी हो जाने का मैं कोई कारण नहीं देखता।

वह सिर उठाकर, तनकर चलती हुई मुझसे बिदा हुई। उसके चेहरे पर खेद और अपराधबोध के स्थान पर ख़ुशी और आत्मविश्वास छलके पड़ रहे थे!

और मैं मुस्कुरा उठा- क्या यह शानदार नहीं है कि दुनिया में अनेक प्रकार के लोग और उनकी अलग-अलग तरह की अनेकानेक रुचियाँ हैं? और सभी को प्रेम करने के लिए कोई न कोई मिल ही जाता है!