दैवी शक्तियों की मार्केटिंग – पवित्र शहर, वृंदावन के विज्ञापन – 13 सितंबर 2015

मेरा जीवन

मैंने आपको बताया था कि पिछले सप्ताह हमारे यहाँ अमरीका से कुछ मेहमान आए हुए थे। हालांकि वे यहाँ कुछ दिन ही रहे मगर वृंदावन में उनका समय बड़ा शानदार रहा। एक दिन वे वृंदावन की 10 किलोमीटर लंबी परिक्रमा करके आए जिसमें कि शहर का एक पूरा चक्कर लग जाता है। शहर के बारे में उनकी राय बहुत सकारात्मक थी और विशेष रूप से वे यहाँ के विज्ञापनों की रचनात्मकता से बेहद प्रभावित हुए।

जी हाँ, शहर का चक्कर लगाते हुए आपको तरह-तरह के विज्ञापन देखने को मिलते हैं-विशालकाय विज्ञापन-बोर्ड (होर्डिंग्स), बैनर्स और तरह-तरह के पोस्टर्स, जिन्हें ऐसी जगहों पर लगाया जाता है कि आने-जाने वालों की नज़र उन पर पड़े बिना न रह सके और लोग उन्हें आसानी से पढ़ सकें। निश्चय ही, बहुत से इश्तहार आध्यात्मिक प्रवचनों की सूचनाएँ होते हैं, जिनमें गुरुओं और बाबाओं आदि को विज्ञापित किया जाता है। अधिकतर ये विज्ञापन हिन्दी भाषा में होते हैं परन्तु इनमें आप तरह-तरह के गुरुओं और उपदेशकों के फोटो देख सकते हैं!

लेकिन जिस बात पर उन्हें सबसे अधिक हँसी आ रही थी, वह था विज्ञापनों का लोगों के इस विचार को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करना कि वृंदावन 'कृष्ण की पवित्र भूमि' है। निश्चित ही यह स्थान पूजा-अर्चना और ईश्वर की आराधना का पवित्र स्थान है और हिन्दू विश्वास करते हैं कि ईश्वर की कृपा से ही इस स्थान पर निवास करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। और इस भोले विश्वास पर व्यापारियों की नज़र न पड़े यह संभव नहीं है! इसीलिए भावभक्ति पूर्ण नामों वाली बहुत सी हाउसिंग सोसाइटियाँ, बहुमंज़िला इमारतें और अत्यंत सुंदर और विशालकाय प्रवेशद्वारों से सुसज्जित रिहाइशी बस्तियाँ अस्तित्व में आ गई हैं या आ रही हैं, जिन्हें देखकर यहाँ आने वाले धनाढ्य तीर्थयात्री एकाध फ्लॅट, कोई ड्यूप्लेक्स मकान या बंगला खरीदने के लिए लालायित हो जाते हैं।

लेकिन आपको मानना पड़ेगा कि विदेश से आए व्यक्तियों के लिए यह देखना काफी दिलचस्प होता है: 'कृष्णभूमि अपार्टमेंट्स', 'हरेकृष्णा ऑर्चिड' और निश्चय ही, 'कृष्णा हाइट्स' भी। मज़ाक करते हुए हमारे मित्रों ने चुटकी ली कि अमरीका में इसे इस तरह कहा जा सकता है: 'जीज़स टावर', 'सैंट मैरी हाउसिंग कॉम्प्लेक्स' इत्यादि…! हाँ, क्यों नहीं!

स्वाभाविक ही प्रचार-वाक्य और नारे भी यही राग अलापते हैं। आपको 'दयानिधान' के 'आध्यात्मिक और पावन सान्निध्य' में निवास हेतु आमंत्रित किया जाता है। फ्लॅट खरीदने पर 'दैवी अनुग्रह' की छत्रछाया आप पर सदा-सदा बनी रहेगी। या कोई बंगला खरीदने पर आप 'धरती पर अवतरित ईश्वरीय स्वर्ग' में निवास कर सकेंगे! पैसे नहीं हैं, कोई बात नहीं- आपको सस्ते ऋण उपलब्ध कराए जाएँगे। उसके बाद आप इस 'पवित्र भूमि में रहने के दैवी परमानंद' से बचकर कहाँ जा सकते हैं!

लेकिन यदि ईनाम ही देना हो तो किसी हाउसिंग सोसाइटी को वह प्राप्त नहीं होगा बल्कि हाइवे के निर्गम स्थल पर लगे एक विज्ञापन होर्डिंग को मिलेगा, जो एक बड़े होटल का विज्ञापन है। हमारे मित्रों ने इसे ही सबसे पहले देखा था और उसकी दिलचस्प रचनात्मकता से अभिभूत हो गए थे और अंत तक उनके मन से निकलता ही नहीं था:

'देवभूमि की विलासिता का जादुई एहसास'

वॉव! 🙂

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