आस्ट्रेलिया में जब मैं तंत्र के पश्चिमी अर्थ ‘सेक्स’ में उलझ गया – 11 अगस्त 2013

यूरोप की अपनी लंबी यात्राओं के बाद कुछ दिन घर में आराम करके 2005 के अंत में मैं एक और यात्रा पर निकल पड़ा। इस बार धरती के दूसरे छोर की तरफ, आस्ट्रेलिया। मज़ेदार बात यह हुई कि धरती के दूसरे हिस्से की अपनी पिछली यात्रा की तरह इस बार भी मुझे फिर वही अनुभव हुआ और मैंने फिर यौन भावनाओं को लेकर अपने आपको बहुत बुद्धू (अनुभवहीन) महसूस किया। …चलिये, मैं आपको पूरा किस्सा शुरू से सुनाता हूँ।

एक बार ईमेल द्वारा मुझे आस्ट्रेलिया आने का एक निमंत्रण प्राप्त हुआ। एक महिला ने मुझे बताया कि उसका एक केंद्र है जो आध्यात्मिक कार्यों के लिए समर्पित है और जहां वह चाहती है कि मैं भी योग की कुछ कार्यशालाएँ आयोजित करूँ। एक नया संपर्क होने की संभावना को देखते हुए मैं बड़ा खुश हुआ। यह भी मेरे लिए खुशी की बात थी कि इतने सारे गुरुओं की ऑनलाइन सेवाओं की भीड़ में उसकी नज़र मुझ पर पड़ गई थी और उसने मुझे बुलाया था। मैंने तुरंत उसका निमंत्रण स्वीकार कर लिया और साल के अंत की कुछ तारीखें पक्की कर लीं।

मैं सिडनी पहुंचा तो वह महिला मुझे लेने एयरपोर्ट आई और मुझे सीधे अपने ‘केंद्र’ ले गई। उसने बताया कि उसका केंद्र घर के रूप में विकसित नहीं किया गया है मगर किसी तरह उसने अपने रहने की व्यवस्था वहीं कर रखी है। वहाँ बाथरूम और संडास तो था, लेकिन कोई रसोईघर नहीं था। उसने मुझे यह कह कर समझाने की कोशिश की कि इंश्योरेंस की शर्तों के अनुसार यहाँ खाना बनाना संभव नहीं होगा और हमें बाहर ही कहीं खाने का इंतज़ाम करना होगा। यह सब मेरे लिए बहुत अनोखा था और मैं उसके व्यवहार और उस जगह को लेकर सोच में पड़ गया।

अपने जीवन में मैंने कई आश्चर्यजनक स्थानों की यात्राएं की हैं और मैंने अपने इस अनुभव को भी सहजता के साथ, एक और अनुभव की तरह, स्वीकार कर लिया और सोचा कि "आगे-आगे देखिए, होता है क्या"! उस महिला ने पूरे सप्ताह का कार्यक्रम तैयार कर रखा था, जो दूसरे दिन सबेरे से ही शुरू हो जाने वाला था। हमने वह दिन एक दूसरे को समझने में बिताया और जब मैंने अपने और अपने जीवन के अनुभवों के बारे में उसे बताया तो वह मुझे अपने बारे में और अपने केंद्र और अपने काम के बारे में बताने लगी और अचानक, तुरंत ही मुझे लगा कि यहाँ नहीं आना चाहिए था और यह जगह मेरे लिए ठीक नहीं है।

उसने बताया कि उसने पूर्वी भारत के किन्हीं तांत्रिक गुरु से यह विद्या सीखी है और यहाँ कुछ समय से "तंत्र विद्या" पर काम करती रही है। यूरोप के अनुभव से मुझे मालूम है कि जब कोई विदेशी ‘तंत्र’ कहता है तो आम तौर पर उसका मतलब यौन क्रियाओं से ही होता है। जब उसने पावर-पॉइंट प्रस्तुतीकरण की सहायता से अपने कार्यक्रमों के बारे में बताना शुरू किया तो मेरा वह अनुभव और पुष्ट हो गया। वह पूरी तरह यौन और लैंगिक सामाग्री से परिपूर्ण था। उसमें एक दूसरे को उत्तेजित करने के तरीकों को चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया था और साथ में इस विषय पर कई महीन जानकारियाँ और अधिक से अधिक आनंद प्राप्त करने के और चरम पर पहुँचने के तरीके बताए गए थे। और भी बहुत कुछ था और सब कुछ सेक्स पर ही केन्द्रित था। नए, आध्यात्मिक तरीके से, मगर पूरी तरह सेक्स पर केन्द्रित।

फिर उसने मुझे बताया कि अपने बड़े से हाल में वह इस विषय पर कार्यशालाएँ आयोजित करती है और कमरे किराये पर भी देती है जहां वह "तांत्रिक मालिश" और कई "विशेष मसाजों" की सुविधा प्रदान करती है जो "तांत्रिक ऊर्जा" का संचार करते हैं।

मैं आश्चर्य में पड़ गया। मुझे वहाँ आने का अफसोस हो रहा था मगर मैंने उसे प्रदर्शित नहीं होने दिया। अपने कमरे में आकर मैं सोचता रहा कि उसके न्योते पर जो भी मेरी कार्यशाला में आएगा या मेरे व्यक्तिगत सत्रों में शामिल होगा वह ऐसी अपेक्षा करेगा जिन्हें पूरा करना मेरे लिए संभव नहीं होगा। न ही उन्हें पूरा करने में मेरी कोई रुचि होगी!

आगे जो कुछ हुआ वह सब किसी विचित्र हास्य कथा की तरह है, मगर वह कहानी अगले रविवार को!

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