भारत में महिलाओं के साथ हाथ मिलाने के मौके पर अजीब परिस्थिति – हाथ मिलाएँ या नहीं मिलाएँ? 22 मार्च 2015

मेरा जीवन

कल रमोना और मैं दिल्ली में आयोजित एक मीटिंग में शामिल हुए। मीटिंग किस तरह की थी या किस सिलसिले में थी, यह मैं बाद में किसी समय बताऊँगा, अभी मैं आपको एक ऐसे विषय पर लिखना चाहता हूँ, जिस पर मैं और रमोना बहुत हँसे थे: भारत में हाथ मिलाने को लेकर पैदा होने वाली अटपटी स्थितियाँ।

यह नहीं कि भारतीय हाथ मिलाते ही नहीं। मिलाते हैं और मीटिंगों, सभा-सम्मेलनों और विभिन्न आयोजनों में दूसरे देशों की ही तरह जमकर हाथ मिलाए जाते हैं। वे भी 'हैलो' कहकर एक-दूसरे का अभिवादन करने का यह अंतर्राष्ट्रीय तरीका खुलकर इस्तेमाल करते हैं। थ्री-पीस सूट में पुरुष अपना हाथ आगे बढ़ाते हैं, दूसरे का लंबी बाँह वाली शर्ट या पुलोवर से ढँका हाथ अपने हाथ में लेते हैं और ज़ोर-शोर से झटकते हुए हाथ मिलाते हैं। कोई नया व्यक्ति प्रवेश करता है और सबसे पहले एक के बाद दूसरे व्यक्ति की ओर बढ़ता है, सबसे हाथ मिलाता है और पूरी कोशिश करता है कि कोई व्यक्ति छूट न जाए। अब मान लीजिए, किसी पुरुष के साथ, बगल में एक महिला भी खड़ी है….

हा, हा…उसे छोड़ दिया जाता है!

जी हाँ, बेचारी महिलाएँ अक्सर उस सुदृढ़-या कोमल-पंजों के स्पर्श से महरूम रह जाती हैं। या, आप कह सकते हैं कि उनके साथ अधिक नम्रता के साथ पेश आया जाता है: प्रणाम में जुड़े हाथों के साथ उन्हें 'नमस्ते' कहा जाता है, कभी हल्के से सिर हिलाकर तो कभी बाकायदा सिर झुकाकर!

मैंने बहुत स्पष्टता के साथ नोटिस नहीं किया है लेकिन स्वाभाविक ही रमोना ने किया है, यह समझने की कोशिश करते हुए कि भारत में लोगों का अभिवादन करते समय ठीक-ठीक क्या किया जाना चाहिए! मुझे लगता है, इससे ज़्यादा तकलीफदेह कुछ नहीं हो सकता कि आप किसी से हाथ मिलाने के लिए हाथ बढ़ाएँ और वह आपको पूरी तरह अनदेखा करके किसी और से हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़ जाए। और शायद उससे भी अधिक बुरा तब लगता है, जब सबसे हाथ मिलाने के बाद वह आपके पास आता है और हाथ बढ़ाता है लेकिन तब तक आपने उनकी झिझक देखते हुए निर्णय ले लिया होता है कि हाथ जोड़कर नमस्ते करना ही बेहतर होगा!

कई प्रयासों के बाद और उपरोक्त प्रक्रियाओं से गुज़रने के बाद भी हाथ मिलाने में असफल रहने पर उसने आशा छोड़ दी। आजकल वह सिर्फ मुस्कुराकर या हल्के से सिर हिलाकर अभिवादन करती है! 🙂

रमोना को बड़ा विचित्र लगा और वह इस व्यवहार के मूल कारणों तक पहुँचने का प्रयास करने लगी। हाथ मिलाने की प्रथा अंग्रेजों के आधिपत्य के साथ भारत आई लेकिन भारतीय संस्कृति में महिलाओं को छूने के प्रति झिझक, बल्कि उसकी वर्जना के चलते उसके प्रति आज भी संदेह बना हुआ है! हम यह सोचकर बहुत हँसे कि आज भी हाथ मिलाकर अभिवादन करना अशोभनीय और अभद्र माना जा रहा है। खासकर अभी, जब कि नवरात्रि का समय है और लोग उपवास रखते हैं! क्या पत्नी के अतिरिक्त किसी दूसरी महिला के स्पर्श को वे एक अनुचित यौन व्यवहार या घोर पाप समझते हैं, जिसके कारण उनका व्रत भंग हो जाएगा?

हमारे मूढ़ विचारों को क्षमा करें लेकिन हम बहुत हँसे और उसे बहुत गंभीरता से लिए बगैर और बिना किसी दुर्भावना के उसका मज़ा लेते रहे। मैं इसे सबके साथ साझा करना चाहता था-एक तरह की अजीबोगरीब लेकिन साथ ही मज़ाकिया स्थिति। साझा इसलिए करना चाहता था कि भविष्य में जब कभी आपके सामने ऐसी स्थिति पैदा हो तो आप निर्णय कर सकें कि आपको ठीक-ठीक क्या करना चाहिए: किसी विपरीत लिंगी को सामने पाकर हल्के से सिर डुलाकर गंभीर, संकोची और औपचारिक बने रहा जाए या कुछ लोगों को अचंभित करते हुए कसकर आलिंगनबद्ध कर लिया जाए – या गाल पर एक चुंबन? 🙂

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