मैंने आपको परसों और कल हुए कार्यक्रमों के बारे में पहले ही बताया है-नास्तिकों का सम्मेलन। कार्यक्रम की तैयारियों के समय तक हम लोगों को नहीं पता था कि शुक्रवार या शनिवार को कितने लोग आएँगे। आज मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि हर स्तर पर, हर एतबार से यह एक सफल कार्यक्रम रहा और अंततः उसने बहुत से समान रुचि वाले लोगों का मिलना संभव किया!
कार्यक्रम के लिए शुक्रवार और शनिवार के दो दिन नियत थे लेकिन गुरुवार से ही अतिथियों का आना शुरू हो गया था। निस्संदेह-कुछ लोग बहुत दूर से आए थे! भारत के 13 भिन्न प्रदेशों से कुल मिलाकर 70 से अधिक अतिथियों ने इस कार्यक्रम में शिरकत की! हमारे उत्तर प्रदेश या करीबी दिल्ली से ही नहीं बल्कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तरांचल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, बिहार, उड़ीसा, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर से भी!
वर्ष के इस समय आम तौर पर आश्रम में ज़्यादा मेहमान नहीं होते और इस बार तो सिर्फ एक ही था। इस प्रकार हम अपने आश्रम में ही बहुत से मित्रों को ठहरा सके लेकिन इसके अलावा हमने पास में ही स्थित एक अतिथिगृह किराए पर लिया, यहाँ तक कि स्कूल के कमरों में भी रात में सोने की व्यवस्था करी। इस प्रकार रात में ठहरने की सब की व्यवस्था हो गयी और दिन में हम सभी आश्रम में आनंददायक समय व्यतीत करते रहे!
शुक्रवार को हमने सबको अपना स्कूल दिखाया। उन्होंने हमारे बच्चों और अध्यापिकाओं से भेंट की और वह सब प्रत्यक्ष देखा, जो वे लंबे समय से हमारी वैबसाइट पर चित्रों के माध्यम से देखा करते थे। उसके बाद मैं उन सबको हमारा निर्माणाधीन आयुर्वेदिक रेस्तराँ “अम्माजी’ज़” दिखाने ले गया।
दोपहर के समय वैसे भी हमारे पास एक दूसरे को जानने का पर्याप्त समय था फिर भी हमने शुक्रवार की शाम एक औपचारिक परिचय-सत्र भी आयोजित किया, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने सबके सामने नास्तिकता के बारे में अपने विचार रखे और अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं और उसके बाद संगीत, गिटार-वादन और गायन का कार्यक्रम हुआ।
कल, यानी शनिवार को हम सबने इस विषय में जानकारी हासिल की कि किस प्रकार मरणोपरान्त हम अपने शरीर चिकित्सा संबंधी प्रयोगों के लिए दान कर सकते हैं। मेरे पिताजी और नानी ने भी अपने देहदान संबंधी फॉर्म भरे और स्वाभाविक ही इस कार्यक्रम के बाद हमारी चर्चा का रुख इस ओर मुड़ गया कि किस प्रकार धर्म इस नेक काम में बाधाएँ पैदा करता है!
अंत में, यानी कल शाम को इस आयोजन का सबसे विशिष्ट हिस्सा एक नृत्य समारोह के रूप में आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य जीवन का उत्सव मनाना था! हम पागलों की भांति नाचे और खूब मौजमस्ती की–जिसके बारे में कुछ धार्मिक लोग कहते हैं कि यदि आप ईश्वर को नहीं मानते तो आप आनंदित भी नहीं हो सकते! आज भारत भर से आए हमारे अनेकानेक मित्र एक-दूसरे से बिदा ले रहे हैं।
मेरे लिए यह सप्ताहांत बड़ा असाधारण और बहुत विशिष्ट रहा। इतने सारे समान रुचि रखने वाले लोगों से मिलना, उनके साथ विद्वत्तापूर्ण चर्चा में हिस्सा लेना, अपना दृष्टिकोण रखना और उनकी सुनना, आपसी विचार, भावनाएँ, ज्ञान और आदर्श एक-दूसरे के साथ साझा करना–वाकई बहुत ही अद्भुत अनुभव था। भविष्य में भी नास्तिकों, धर्म में विश्वास न रखने वालों और विवेकपूर्ण विचारकों के लिए मंच तैयार कर उन्हें आमंत्रित करने में मुझे अत्यंत प्रसन्नता होगी!
यहाँ आप हमारे नास्तिक सम्मेलन के चित्र देख सकते हैं
Related posts
जब पिता ज़िंदा होकर भी मेरे नहीं थे…
पिता के साथ मेरा सम्बन्ध
जीवन का नया अध्याय, चुनौतियाँ और सबक
11 साल की उम्र में यौन शोषण की शिकार मेरी बहन को न बचा पाने की ग्लानि
भारत में मेरे परिवार ने मेरी पीठ में छुरा घोंपा है
दुनिया भर के राजाओं की एक सी रुचियाँ: पैसा, युद्ध और औरतें – 17 जनवरी 2016
अपरा का चौथा जन्मदिन समारोह – 10 जनवरी 2016
हमें घनिष्ट रूप से जुड़ना पसंद है – एक कैनेडियन योग दल का आश्रम आगमन – 13 दिसंबर 2015
जर्मनी के खूबसूरत दौरे से भारत वापसी – 6 दिसंबर 2015
